मॉनसून के दूसरे चरण में बदलेगा मौसम का खेल! अल नीनो बढ़ाएगा टेंशन, IMD ने दिया बड़ा अपडेट
India Monsoon Update: देश में मॉनसून आधा सफर तय कर चुका है और अब दूसरे चरण में मौसम का मिजाज बदल सकता है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो के मजबूत होने से मध्य और पश्चिम भारत में बारिश कमजोर पड़ सकती है, जबकि उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों, उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर में अच्छी बारिश की संभावना है.
IMD Weather Forecast: देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब अपने आधे सफर तक पहुंच चुका है. इस बार मॉनसून का पहला आधा हिस्सा काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. जून में कई राज्यों में उम्मीद से कम बारिश हुई, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी. हालांकि जुलाई में अच्छी बारिश ने हालात काफी हद तक संभाल लिए और खरीफ फसलों की बुवाई को रफ्तार मिली. अब सभी की नजर अगस्त और सितंबर पर है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मॉनसून के दूसरे चरण में अल नीनो का असर और ज्यादा दिख सकता है. ऐसे में देश के कई हिस्सों में बारिश का पैटर्न बदलने की संभावना है.
अगस्त-सितंबर में बदल सकता है बारिश का पैटर्न
यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट (ECMWF) के अनुसार, आने वाले दिनों में मध्य भारत, पश्चिम भारत और पश्चिमी तट पर भारी बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे कम हो सकती हैं. इसके बजाय बारिश का फोकस उत्तर और पूर्वी भारत की ओर बढ़ सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पूर्वोत्तर राज्यों और पूर्वी भारत के कई इलाकों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है.
अल नीनो बढ़ा सकता है चिंता
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो का असर धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जिससे भारत के मॉनसून पर असर पड़ सकता है. अगर यह और मजबूत हुआ, तो देश के कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. इसी वजह से अगस्त और सितंबर का समय किसानों के लिए बहुत अहम माना जा रहा है. खरीफ फसलों की अच्छी बढ़वार काफी हद तक इन दो महीनों में होने वाली बारिश पर निर्भर करती है. अगर इस दौरान अच्छी बारिश हुई, तो फसलों को फायदा मिलेगा. वहीं, बारिश कम होने पर पैदावार प्रभावित हो सकती है, जिससे किसानों की कमाई पर भी असर पड़ सकता है.
कमजोर पड़ा लो-प्रेशर सिस्टम
हाल के दिनों में दक्षिण-पश्चिम राजस्थान में बना कम दबाव का क्षेत्र अब कमजोर पड़ गया है. इसकी वजह से मध्य और पश्चिम भारत के कई इलाकों में बारिश कम होने की संभावना है. वहीं जम्मू-कश्मीर के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की वजह से उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश हो सकती है. मौसम विभाग का मानना है कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रह सकता है.
मॉनसून ट्रफ की बदली स्थिति
मौसम विभाग के अनुसार मॉनसून ट्रफ की स्थिति में भी बदलाव आया है. इसका पूर्वी हिस्सा अब पूरी तरह जमीन के ऊपर आ गया है और बंगाल की खाड़ी से इसका सीधा संपर्क फिलहाल टूट गया है. बंगाल की खाड़ी से ही आमतौर पर नए कम दबाव के क्षेत्र बनते हैं, जो देश के बड़े हिस्से में बारिश लाते हैं. जब तक नया सिस्टम नहीं बनता, तब तक बारिश का वितरण अलग-अलग क्षेत्रों में बदलता रह सकता है.
इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है.
- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश हो सकती है.
- हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में छह दिनों तक बारिश जारी रहने का अनुमान है.
- पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले चार दिनों तक अच्छी बारिश हो सकती है.
- हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली में तीन दिनों तक बारिश के आसार हैं.
- पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड, ओडिशा और बिहार में भी कई स्थानों पर बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं.
किसानों के लिए क्यों अहम है अगस्त?
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ फसलों के लिए अगस्त का महीना सबसे अहम होता है. इसी समय धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और दालों जैसी फसलों की बढ़वार सबसे तेज होती है. अगर अगस्त में अच्छी और समय पर बारिश होती है, तो फसलों की क्वालिटी और पैदावार दोनों बेहतर रहने की उम्मीद रहती है. लेकिन अगर अल नीनो के असर से बारिश कम हुई, तो फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. इससे उत्पादन घटने के साथ किसानों की कमाई पर भी असर पड़ सकता है.
आगे कैसा रहेगा मौसम?
फिलहाल जुलाई में हुई अच्छी बारिश की वजह से खेती की स्थिति सामान्य बनी हुई है. लेकिन मॉनसून का दूसरा आधा हिस्सा किसानों के लिए चुनौती लेकर आ सकता है. मौसम विशेषज्ञ अल नीनो और बदलते मौसम के हालात पर लगातार नजर रखे हुए हैं. ऐसे में किसानों और आम लोगों को मौसम विभाग की ताजा जानकारी और चेतावनियों पर नजर बनाए रखनी चाहिए. समय रहते सही तैयारी करने से मौसम में अचानक होने वाले बदलाव से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.