IMD का बड़ा अपडेट, मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार.. अंडमान-निकोबार में जल्द एंट्री, पर बारिश को लेकर बढ़ी टेंशन

Monsoon 2026: मॉनसून 2026 को लेकर मौसम विभाग (IMD) ने बताया है कि इस हफ्ते के अंत तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अंडमान-निकोबार और दक्षिणी बंगाल की खाड़ी तक पहुंच सकता है. यानी बारिश की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. लेकिन चिंता की बात यह है कि इस बार मॉनसून कमजोर रह सकता है और बारिश सामान्य से कम होने की आशंका जताई गई है.

नोएडा | Updated On: 13 May, 2026 | 10:44 AM

IMD Weather Update: देशभर में तेज गर्मी से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, इस हफ्ते के आखिर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून अंडमान सागर, दक्षिणी बंगाल की खाड़ी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में पहुंच सकता है. विभाग का कहना है कि वहां मौसम तेजी से मॉनसून के अनुकूल बन रहा है.

हालांकि मॉनसून समय पर आने की उम्मीद है, लेकिन इस बार बारिश सामान्य से कम हो सकती है. अगर ऐसा हुआ, तो इसका असर खेती-किसानी और गांवों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. किसानों के लिए यह चिंता की बात मानी जा रही है.

बंगाल की खाड़ी में बना लो-प्रेशर सिस्टम

IMD के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र (लो-प्रेशर एरिया) बना हुआ है. इसके साथ एक चक्रवाती हवाओं का घेरा भी है, जो समुद्र तल से करीब 4.5 किलोमीटर ऊपर तक फैला हुआ है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 48 घंटों में यह सिस्टम और मजबूत हो सकता है. यही सिस्टम मॉनसून को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है. जब बंगाल की खाड़ी में इस तरह का कम दबाव बनता है, तो समुद्र से नमी तेजी से ऊपर उठती है और मॉनसूनी हवाएं सक्रिय हो जाती हैं. इससे मॉनसून के आगे बढ़ने की रफ्तार तेज हो जाती है.

कब तक पहुंचेगा मॉनसून?

हर साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की शुरुआत सबसे पहले अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से होती है. आमतौर पर यह वहां करीब 20 मई के आसपास पहुंच जाता है. इसके बाद मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए केरल तक पहुंचता है. केरल में इसकी सामान्य एंट्री लगभग 1 जून के आसपास मानी जाती है और यहीं से पूरे देश में मॉनसून सीजन की आधिकारिक शुरुआत हो जाती है. फिर अगले कुछ हफ्तों में मानसूनी हवाएं देश के अलग-अलग राज्यों में फैल जाती हैं. इस बार भी मौसम विभाग को उम्मीद है कि मॉनसून समय के आसपास ही आगे बढ़ेगा, लेकिन बारिश की मात्रा कम रहने की चिंता बनी हुई है.

इस बार कम बारिश के संकेत

IMD के अनुसार, इस साल मॉनसून सामान्य से कमजोर रह सकता है. औसतन करीब 80 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जबकि सामान्य औसत (LPA) लगभग 87 सेंटीमीटर होता है. यानी बारिश कम होने की आशंका है. कम बारिश का असर खेती और पानी के भंडारण पर पड़ सकता है. सिंचाई के लिए भूजल और जलाशयों पर दबाव बढ़ सकता है. साथ ही खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, सोयाबीन और दालों की बुवाई भी प्रभावित हो सकती है.

अल नीनो बढ़ा रहा चिंता

मौसम विभाग के मुताबिक, प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में बन रहे अल नीनो (El Nino) की स्थिति इस बार कमजोर मानसून की एक बड़ी वजह हो सकती है. अभी ENSO सिस्टम न्यूट्रल से धीरे-धीरे एल नीनो की तरफ बढ़ रहा है. जब एल नीनो सक्रिय होता है, तो समुद्र का तापमान बदल जाता है, जिससे भारत में मानसूनी बारिश कमजोर हो सकती है.

पिछले कई सालों के आंकड़े भी बताते हैं कि एल नीनो के दौरान अक्सर बारिश सामान्य से कम रहती है. इसी वजह से इस बार के मानसून को लेकर मौसम वैज्ञानिक सतर्क हैं.

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

भारत की बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है और खेती काफी हद तक मॉनसून आधारित है. ऐसे में यदि बारिश सामान्य से कम होती है, तो इसका असर सीधे किसानों की आय पर पड़ सकता है. कम बारिश की स्थिति में फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है, सिंचाई की लागत बढ़ सकती है और उत्पादन में कमी आ सकती है. इसका असर बाजार में खाद्यान्न कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है.

विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे मौसम विभाग के अपडेट पर लगातार नजर रखें और उसी के अनुसार फसल योजना तैयार करें. कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता देना, जल संरक्षण तकनीकों को अपनाना और सिंचाई प्रबंधन पर ध्यान देना इस बार बेहद जरूरी हो सकता है.

Published: 13 May, 2026 | 10:32 AM

Topics: