20 फीसदी कम पानी में तैयार होंगी ये फसलें, सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए बड़ा मौका

कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति में किसानों के लिए मोटा अनाज बेहतर विकल्प बनकर उभरा है. ये फसलें धान के मुकाबले कम पानी और कम लागत में तैयार हो जाती हैं. बदलते मौसम के बीच इनकी खेती सुरक्षित और लाभदायक मानी जा रही है, जिससे किसानों को अच्छी कमाई का मौका मिल सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 9 Mar, 2026 | 01:56 PM

Millet Farming: बिहार के कई इलाके हर साल कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति का सामना करते हैं. ऐसे में धान जैसी ज्यादा पानी वाली फसल किसानों के लिए जोखिम बन जाती है. लेकिन अब खेती की तस्वीर बदल सकती है. मोटा अनाज यानी श्री अन्न की खेती कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है. यही वजह है कि बिहार में इसे बढ़ावा दिया जा रहा है.

धान से 20 फीसदी कम पानी, लागत भी कम

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के दक्षिणी और कम वर्षा वाले इलाकों में मोटा अनाज बेहतरीन विकल्प माना जा रहा है. मडुआ (रागी), बाजरा, ज्वार, सावां, कोदो, कुटकी और चीना जैसी फसलें धान और गेहूं  के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत कम पानी में उगाई जा सकती हैं. इन फसलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन पर लागत भी कम आती है. खाद और सिंचाई पर खर्च कम होता है, जिससे किसान की जेब पर बोझ नहीं पड़ता. मौसम खराब होने पर भी ये फसलें जल्दी खराब नहीं होतीं. यही कारण है कि सूखे की स्थिति में भी किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

पशुओं के चारे से लेकर सेहत तक फायदेमंद

मोटे अनाज सिर्फ खेत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घर और पशुपालन दोनों के लिए उपयोगी हैं. मडुआ, सावां और बाजरा का इस्तेमाल  मुर्गी चारा, हरा चारा, सूखा चारा और साइलेज बनाने में किया जाता है. खाने के रूप में भी ये अनाज काफी पौष्टिक हैं. लोग इनसे रोटी, चावल, केक, पुडिंग और मिठाइयां बनाते हैं. इनमें भरपूर रेशा, कैल्शियम, आयरन और विटामिन पाए जाते हैं. ये अनाज कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने, हड्डियां मजबूत करने और मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी माने जाते हैं. कोदो, चीना और कांगनी जैसे अनाज में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट अच्छी मात्रा में होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देते हैं. इसलिए बाजार में भी इनकी मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है.

कम जोखिम, ज्यादा फायदा

बिहार में बदलते मौसम को देखते हुए मोटे अनाज की खेती  सुरक्षित और लाभदायक मानी जा रही है. ये फसलें कम पानी में तैयार हो जाती हैं और खराब मिट्टी में भी उग सकती हैं. अगर किसान सही तरीके से बुवाई और देखभाल करें, तो कम लागत में लाखों रुपये तक की कमाई संभव है. साथ ही, सरकार भी श्री अन्न को बढ़ावा दे रही है, जिससे बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिल रही है. आज के समय में खेती में जोखिम कम करना जरूरी है. ऐसे में मोटा अनाज किसानों के लिए एक मजबूत सहारा बन सकता है. कम पानी, कम खर्च और बेहतर मुनाफा-यही है खेती का नया और समझदारी भरा रास्ता.

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Published: 9 Mar, 2026 | 01:56 PM

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