सर्दियों में अचानक क्यों छा जाता है घना कोहरा? जानिए इसके पीछे की असली वजह

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता प्रदूषण और जलवायु में हो रहे बदलाव आने वाले वर्षों में कोहरे की समस्या को और गंभीर बना सकते हैं. ठंडी रातें, ज्यादा नमी और प्रदूषण मिलकर कोहरे को पहले से ज्यादा घना और लंबे समय तक टिकने वाला बना सकते हैं.

नई दिल्ली | Published: 8 Jan, 2026 | 09:54 AM

Weather: सुबह-सुबह घर से निकलते ही जब सामने की सड़क, पेड़ और इमारतें धुंध में लिपटी नजर आएं और कुछ मीटर आगे का रास्ता भी साफ न दिखे, तो समझ लेना चाहिए कि कोहरे ने अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है. सर्दियों के मौसम में यह नजारा उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में आम हो गया है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर कोहरा अचानक कैसे बन जाता है? क्यों कुछ दिन हल्की धुंध होती है और कभी-कभी इतना घना कोहरा छा जाता है कि मानो सफेद चादर तनी हो? इसके पीछे मौसम विज्ञान का एक रोचक और आसान विज्ञान छिपा है.

हवा में छिपी नमी से होती है शुरुआत

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हमारे आसपास की हवा में हमेशा थोड़ी नमी मौजूद रहती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में जलवाष्प (Water Vapor)  कहा जाता है. यह नमी हमें दिखाई नहीं देती, लेकिन यही कोहरे की पहली वजह बनती है. सर्दियों में जैसे ही रात होती है, तापमान तेजी से गिरने लगता है. ठंडी हवा की एक खासियत यह है कि वह ज्यादा नमी अपने अंदर नहीं रख पाती. जैसे ही हवा ठंडी होती है, उसमें मौजूद जलवाष्प छोटी-छोटी पानी की बूंदों में बदलने लगती है. इस बदलाव की प्रक्रिया को संघनन कहा जाता है. यही बेहद महीन बूंदें हवा में तैरने लगती हैं और धीरे-धीरे कोहरे का रूप ले लेती हैं.

रात और सुबह में कोहरा ज्यादा क्यों दिखता है

आपने गौर किया होगा कि कोहरा सबसे ज्यादा देर रात या तड़के सुबह दिखाई देता है. इसकी वजह यह है कि इस समय तापमान दिन के मुकाबले सबसे कम होता है. रात के दौरान जमीन तेजी से ठंडी हो जाती है और उसके संपर्क में आने वाली हवा भी ठंडी होकर नमी को बूंदों में बदल देती है. जैसे ही सूरज निकलता है, उसकी गर्मी से तापमान बढ़ने लगता है. इससे हवा में मौजूद पानी की बूंदें फिर से भाप बनकर उड़ने लगती हैं और कोहरा धीरे-धीरे छंट जाता है. यही कारण है कि कई बार दोपहर तक मौसम साफ हो जाता है.

कभी हल्का, कभी बेहद घना क्यों होता है कोहरा

हर दिन कोहरा एक जैसा नहीं होता. कभी यह हल्की धुंध की तरह दिखता है तो कभी इतना घना कि कुछ कदम आगे देखना भी मुश्किल हो जाता है. इसकी वजह हवा में नमी की मात्रा और तापमान में गिरावट की रफ्तार होती है. अगर हवा में नमी ज्यादा हो और तापमान अचानक तेजी से गिरे, तो कोहरा ज्यादा घना बनता है. वहीं अगर हल्की हवा चल रही हो, तो कोहरे की बूंदें फैल जाती हैं और कोहरा हल्का पड़ जाता है. यानी नमी, ठंड और हवा की गति ये तीनों मिलकर तय करते हैं कि कोहरा कितना गहरा होगा.

प्रदूषण कोहरा क्यों बढ़ा देता है

शहरों में कोहरा अक्सर ज्यादा घना और लंबे समय तक बना रहता है. इसकी एक बड़ी वजह प्रदूषण है. हवा में मौजूद धूल, धुआं और अन्य सूक्ष्म कण पानी की बूंदों को चिपकने के लिए सतह दे देते हैं. इससे बूंदें बड़ी और भारी हो जाती हैं और हवा में ज्यादा देर तक टिकी रहती हैं. यही कारण है कि प्रदूषित शहरों में कोहरे के साथ स्मॉग की समस्या भी देखने को मिलती है और दृश्यता काफी कम हो जाती है.

हर जगह एक जैसा नहीं होता कोहरा

कोहरा हर जगह एक ही वजह से नहीं बनता. तटीय इलाकों में समुद्र से आने वाली ठंडी हवा के कारण कोहरा बनता है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में ऊंचाई और तापमान में तेजी से बदलाव इसकी वजह बनते हैं. उत्तर भारत में सर्दियों का कोहरा मुख्य रूप से ठंडी रातों, नमी और शांत मौसम की स्थिति के कारण बनता है.

आने वाले समय में क्यों बढ़ सकती है कोहरे की समस्या

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता प्रदूषण और जलवायु में हो रहे बदलाव आने वाले वर्षों में कोहरे की समस्या को और गंभीर बना सकते हैं. ठंडी रातें, ज्यादा नमी और प्रदूषण मिलकर कोहरे को पहले से ज्यादा घना और लंबे समय तक टिकने वाला बना सकते हैं. इसका असर न सिर्फ यातायात और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा, बल्कि स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे सकता है.

Topics: