जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देंगे ब्रिक्स देश, किसानों को सस्ती दरों पर मिलेगा उर्वरक

इंदौर में पांच दिवसीय BRICS कृषि सम्मेलन का समापन ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के साथ हुआ. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि BRICS देश वैश्विक कृषि उत्पादन में 42 फीसदी योगदान देते हैं. सम्मेलन में डिजिटल कृषि, जलवायु अनुकूल खेती, बीज संरक्षण और कृषि सहयोग पर चार नई पहलें शुरू की गईं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 13 Jun, 2026 | 08:04 PM

BRICS Agriculture Conference: इंदौर में आयोजित पांच दिवसीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन का आज समापन हो गया. इस सम्मेलन के अंत में सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ को अपनाया. इसमें खाद्य सुरक्षा, किसानों के कल्याण, जलवायु-अनुकूल खेती, कृषि व्यापार और डिजिटल कृषि को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण फैसले शामिल हैं. इस मौके पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि BRICS देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक कृषि उत्पादन में लगभग 42 प्रतिशत योगदान देते हैं. उन्होंने कहा कि इंदौर डिक्लेरेशन सिर्फ एक समझौता नहीं है, बल्कि ब्रिक्स देशों की साझा जिम्मेदारी और मजबूत इच्छाशक्ति का प्रतीक है.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस सम्मेलन में कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए चार नई संस्थागत पहल भी शुरू की गईं. पहली पहल के तहत प्राकृतिक और पुनर्जीवित (रीजनरेटिव) खेती पर संयुक्त शोध के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस नेटवर्क’ बनाया जाएगा, जिसमें भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान अहम भूमिका निभाएगा. वहीं, दूसरी पहल में ‘ब्रिक्स डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क’ स्थापित किया जाएगा, जो खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  और डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देगा. इसका समन्वय IIT Delhi करेगा.

पारंपरिक बीजों के संरक्षण के लिए बनेगा वैश्विक मंच

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि तीसरी पहल के तहत किसानों के बीज अधिकारों की सुरक्षा और पारंपरिक बीज किस्मों के संरक्षण के लिए एक वैश्विक मंच बनाया जाएगा. जबकि, चौथी पहल में ब्रिक्स देशों के बीच कृषि इनपुट और जेनेटिक संसाधनों को साझा करने के लिए ‘BRICS AgriN नेटवर्क’ स्थापित किया जाएगा. इस सम्मेलन को कृषि क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

किसानों को सस्ती दरों पर मिलेगा उर्वरक

साथ ही केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध  कराना जारी रखेगी. उन्होंने बताया कि यूरिया 266 रुपये प्रति बैग और डीएपी 1350 रुपये प्रति बैग की दर से किसानों को मिलता रहेगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाजार की बढ़ी हुई कीमतों का अतिरिक्त बोझ सरकार खुद वहन करेगी.

महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है और यह खेती में बड़े बदलाव की मजबूत आधारशिला बन रही है. उन्होंने बताया कि देशभर में स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से करोड़ों महिलाएं अब खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं. उन्होंने ‘ड्रोन दीदी’ जैसी योजनाओं को ग्रामीण भारत में तकनीकी और सामाजिक बदलाव का बड़ा उदाहरण बताया, जिससे महिलाएं आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन रही हैं.

कृषि में तकनीक के बढ़ते उपयोग से नए अवसर बन रहे

इसके साथ ही उन्होंने युवाओं की बढ़ती भागीदारी पर भी जोर दिया. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्टार्टअप, नवाचार, डिजिटल तकनीक और एग्री-उद्यमिता के जरिए युवा अब कृषि क्षेत्र को अधिक आधुनिक, प्रभावी और आकर्षक बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि कृषि में तकनीक के बढ़ते उपयोग से नए अवसर बन रहे हैं और एक ऐसा भविष्य-तैयार कृषि ढांचा तैयार हो रहा है, जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होगा.

बैठक में 60 विदेशी प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इंदौर में हुई ब्रिक्स कृषि समूह की मंत्री स्तरीय और उससे पहले हुई अधिकारी स्तरीय दोनों बैठकें सफल, सार्थक और शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुईं. उन्होंने अपने सहयोगी मंत्रियों रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मीडिया से बातचीत में यह जानकारी दी. शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य और सहयोगी देशों के करीब 60 विदेशी प्रतिनिधियों सहित कुल लगभग 100 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी भागीदारी यह दिखाती है कि कृषि और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर ब्रिक्स देशों के बीच गहरी गंभीरता और मजबूत सहयोग है.

 

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Published: 13 Jun, 2026 | 07:57 PM

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