केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के विरोध में उतरे कपास किसान, लगाया गंभीर आरोप

एसकेएम का आरोप है कि ‘अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र बाहर है’. यह दावा गलत है और लोगों को गुमराह करने के लिए किया जा रहा है. संगठन का कहना है कि मोदी सरकार द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) भारत की आर्थिक गुलामी का रास्ता खोलते हैं.

नोएडा | Updated On: 17 Feb, 2026 | 12:10 AM

Cotton Farmer: देश भर के कपास किसानों के कई समूहों ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के हालिया बयान का विरोध किया है. मंत्री ने कहा था कि अगर भारत अमेरिका से कच्चा कपास खरीदकर उसे देश में प्रोसेस करे, कपड़ा बनाए और फिर तैयार माल अमेरिका को निर्यात करे, तो भारत को भी बांग्लादेश की तरह शून्य (जीरो) रेसिप्रोकल टैरिफ की सुविधा मिल सकती है. ऐसे में किसान संगठनों का कहना है कि इस तरह की नीति से घरेलू कपास किसानों के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है. उनका मानना है कि विदेश से कच्चा कपास मंगाने से देश के किसानों को नुकसान हो सकता है. मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष जनता को गुमराह कर रहा है और भारत को भी वही सुविधा मिलेगी जो बांग्लादेश को मिल रही है.

इसी मुद्दे पर खासकर कपास उगाने वाले किसानों के संगठन विरोध प्रदर्शन  की तैयारी कर रहे हैं. पंजाब के फाजिल्का जिले में भारतीय किसान यूनियन (एकता-उग्राहन) के जिला नेता गुरभेज सिंह रोहिवाला ने कहा कि फाजिल्का कभी अपनी बेहतरीन कपास के लिए ‘पंजाब का मैनचेस्टर’ कहलाता था. फाजिल्का के किसान नेता गुरभेज सिंह रोहिवाला ने कहा कि इस जिले के पांच ब्लॉक कपास उत्पादन के लिए मशहूर थे. यहां कपास की खरीद के लिए अलग मंडी भी थी. लेकिन पिछले दस साल में सही दाम न मिलने के कारण उत्पादन घटता गया. अब समझ में आ रहा है कि आखिर इस फसल की अनदेखी क्यों की जा रही थी. अगर सरकार अमेरिका से कपास मंगाना चाहती है, तो पंजाब और दूसरे राज्यों के कपास किसानों के लिए उसकी क्या योजना है?

किसान नेता का सरकार पर हमला

गुजरात के किसान नेता पालभाई अंबालिया ने भी यही चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कोई किसान ऐसे बयानों को कैसे स्वीकार कर सकता है? लगता है कि पीयूष गोयल किसानों के हित में नहीं, बल्कि बड़ी टेक्सटाइल कंपनियों  के लिए काम कर रहे हैं. अगर भारत में सस्ता अमेरिकी कपास आने लगा, तो हमारे कपास किसानों का क्या होगा?

क्या है एसकेएम का आरोप

एसकेएम का आरोप है कि ‘अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र बाहर है’. यह दावा गलत है और लोगों को गुमराह करने के लिए किया जा रहा है. संगठन का कहना है कि मोदी सरकार द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) भारत की आर्थिक गुलामी का रास्ता खोलते हैं. एसकेएम ने आरोप लगाया कि भाजपा भारत को अमेरिकी उत्पादों का बाजार और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए मुनाफे का केंद्र बनाना चाहती है.

कपास आयात में बंपर बढ़ोतरी

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि अगर कच्चे कपास का आयात शून्य शुल्क  पर किया गया, तो इससे भारत के कपास किसानों को भारी नुकसान होगा और घरेलू बाजार में दाम गिर जाएंगे. संगठन का कहना है कि एम.एस. स्वामीनाथन फॉर्मूले के अनुसार कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 10,075 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए था, जबकि सरकार ने इसे 7,710 रुपये प्रति क्विंटल तय किया. एसकेएम ने यह भी कहा कि जनवरी-नवंबर 2024 में अमेरिका से कपास आयात 199.30 मिलियन डॉलर था, जो जनवरी-नवंबर 2025 में बढ़कर 377.90 मिलियन डॉलर हो गया. यानी लगभग 95.5 फीसदी की बढ़ोतरी.

 

 

Published: 17 Feb, 2026 | 06:45 AM

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