कपास की कीमतों में अचानक उछाल, एक दिन में 4 फीसदी बढ़े दाम, चीन-बांग्लादेश बने वजह
cotton price hike: वैश्विक बाजार में भी कपास की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) पर जुलाई डिलीवरी के लिए कपास का भाव 84.5 सेंट प्रति पाउंड के ऊपर पहुंच गया है. मार्च की शुरुआत से अब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास के दाम करीब 28 फीसदी तक बढ़ चुके हैं.
cotton price hike: भारत में कपास के दाम में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे बाजार और उद्योग दोनों में हलचल मच गई है. एक ही दिन में करीब 4 फीसदी की बढ़त ने व्यापारियों, किसानों और कपड़ा उद्योग को चौंका दिया है. इस तेजी के पीछे वैश्विक बाजार की स्थिति, बढ़ती विदेशी मांग और सप्लाई चेन में आई बाधाएं मुख्य वजह मानी जा रही हैं.
कपास की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय पर आया है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसके भाव तेजी से बढ़ रहे हैं. इससे भारतीय बाजार पर भी सीधा असर पड़ा है और कीमतें पिछले दो साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं.
एक दिन में 4 फीसदी की तेजी, CCI ने बढ़ाए दाम
बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, सरकारी एजेंसी भारतीय कपास निगम लिमिटेड ने कपास की कीमतों में 2,900 रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) की बढ़ोतरी की है. यह इस सीजन की एक दिन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है. इस बढ़ोतरी के बाद कपास के दाम करीब 65,600 रुपये प्रति कैंडी के आसपास पहुंच गए हैं, जबकि कुछ समय पहले यह 54,600 रुपये के स्तर पर थे. यानी थोड़े ही समय में कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिला है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
वैश्विक बाजार में भी कपास की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) पर जुलाई डिलीवरी के लिए कपास का भाव 84.5 सेंट प्रति पाउंड के ऊपर पहुंच गया है. मार्च की शुरुआत से अब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास के दाम करीब 28 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है और यहां कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं.
विदेशी मांग में तेजी
हाल के दिनों में भारत से कपास और यार्न की मांग विदेशों में तेजी से बढ़ी है. खासकर चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से भारतीय कपास की मांग बढ़ी है. विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे भारतीय कपास की मांग अचानक बढ़ गई है.
स्टॉक और सप्लाई की स्थिति
व्यापार विशेषज्ञ आनंद पोपट के अनुसार, भारतीय कपास निगम लिमिटेड के पास करीब 105 लाख गांठ कपास का स्टॉक है, जिसमें से लगभग 40 लाख गांठ अभी भी बिना बिके हैं.
सीसीआई लगातार कपास की बिक्री कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी से इसे अच्छा समर्थन मिल रहा है. पहले जहां अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले भारत में प्रीमियम ज्यादा था, अब यह लगभग बराबर हो गया है, जिससे विदेशी कंपनियों के लिए भारतीय कपास खरीदना और आकर्षक हो गया है.
कपास की आवक बनी हुई स्थिर
कपास की आवक फिलहाल स्थिर बनी हुई है. रोजाना करीब 35,000 से 45,000 गांठ कपास बाजार में आ रही है. कुल मिलाकर अब तक करीब 305 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी है, जो उत्पादन के बेहतर होने का संकेत देती है. आने वाले समय में भी आवक जारी रहने की उम्मीद है.
कपड़ा उद्योग पर असर
कपास और यार्न की कीमतों में तेजी का असर अब कपड़ा उद्योग पर भी दिखने लगा है. बिजनेस लाइन के अनुसार, रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूभ का कहना है कि यार्न की कीमतें बढ़ने से फैब्रिक बनाने वाली कंपनियों को परेशानी हो रही है. पहले से ही मजदूरों की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा था, और अब कच्चे माल की कीमत बढ़ने से डिलीवरी में देरी और लागत दोनों बढ़ गई हैं.
बाजार में मिला-जुला असर
कपास की कीमतों में बढ़ोतरी से किसानों को फायदा हो सकता है, क्योंकि उन्हें अपनी फसल का बेहतर दाम मिलेगा. लेकिन दूसरी ओर, कपड़ा उद्योग और निर्यातकों के लिए यह स्थिति चुनौती बन सकती है, क्योंकि लागत बढ़ने से प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है.