ऑनलाइन बिक रहे नकली कीटनाशकों की बिक्री बनी चुनौती, उद्योग ने की केंद्र से सख्त कानून की मांग

इन नकली उत्पादों का सीधा असर किसानों पर पड़ता है. फसल पर सही असर न होने से उत्पादन घटता है, लागत बढ़ती है और कई बार मिट्टी व पर्यावरण को भी स्थायी नुकसान पहुंचता है. सबसे गंभीर बात यह है कि कई नकली या मिलावटी कीटनाशक इंसानी सेहत के लिए भी खतरनाक साबित हो सकते हैं.

नई दिल्ली | Published: 22 Jan, 2026 | 07:42 AM

Pesticides Management Bill 2025: भारत के कीटनाशक उद्योग संगठन क्रॉपलाइफ इंडिया ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 को इस तरह तैयार किया जाए कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक रहे नकली और बिना अनुमति वाले कीटनाशकों पर पूरी तरह लगाम लग सके. उद्योग का कहना है कि अगर इस दिशा में सख्त और साफ नियम नहीं बने, तो आने वाले समय में इसका नुकसान किसानों से लेकर देश की खेती तक को झेलना पड़ेगा.

बढ़ता डिजिटल बाजार और नई चुनौती

भारत में डिजिटल लेनदेन और ई-कॉमर्स का दायरा तेजी से बढ़ रहा है. आज गांव-देहात तक ऑनलाइन खरीदारी पहुंच चुकी है और किसान भी मोबाइल के जरिए खाद, बीज और कीटनाशक मंगाने लगे हैं. यही बदलाव अब एक नई चुनौती बनकर सामने आया है. क्रॉपलाइफ इंडिया के अनुसार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई ऐसे कीटनाशक बिक रहे हैं, जिनकी न तो गुणवत्ता की गारंटी है और न ही उनके स्रोत का कोई ठोस रिकॉर्ड.

उद्योग का मानना है कि कीटनाशक कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं है. यह एक सख्ती से नियंत्रित रसायन है, जिसकी बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल से पहले कई स्तरों पर जांच और अनुमति जरूरी होती है. ऑफलाइन बाजार में इन नियमों का पालन अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से होता है, लेकिन ऑनलाइन बिक्री में यही निगरानी कमजोर पड़ जाती है.

नकली कीटनाशकों का बड़ा खेल

उद्योग ने बताया कि देश में नकली कीटनाशकों के बाजार को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं. कुछ आकलन इसे करीब 250 करोड़ रुपये का बताते हैं, जबकि कुछ रिपोर्टों में इसका आकार 5,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा आंका गया है. आंकड़े चाहे जो हों, लेकिन यह साफ है कि नकली कीटनाशकों का कारोबार तेजी से फैल रहा है.

इन नकली उत्पादों का सीधा असर किसानों पर पड़ता है. फसल पर सही असर न होने से उत्पादन घटता है, लागत बढ़ती है और कई बार मिट्टी व पर्यावरण को भी स्थायी नुकसान पहुंचता है. सबसे गंभीर बात यह है कि कई नकली या मिलावटी कीटनाशक इंसानी सेहत के लिए भी खतरनाक साबित हो सकते हैं.

ऑनलाइन बिक्री में नियमों की कमी

क्रॉपलाइफ इंडिया के अध्यक्ष अंकुर अग्रवाल का कहना है कि मौजूदा कानूनों में ऑनलाइन बिक्री को लेकर कई खामियां हैं. ऑफलाइन बाजार में जहां हर गोदाम, डीलर और विक्रेता को लाइसेंस लेना जरूरी होता है, वहीं कई ई-कॉमर्स मॉडल में यही प्रक्रिया ढीली पड़ जाती है.

कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ऐसे विक्रेताओं को भी कीटनाशक बेचने की अनुमति दे देते हैं, जिनके पास जरूरी अनुमोदन प्रमाणपत्र नहीं होते. इससे न सिर्फ नियमों का उल्लंघन होता है, बल्कि नकली उत्पादों की पहचान और ट्रैकिंग भी मुश्किल हो जाती है.

उद्योग प्रतिबंध नहीं, निगरानी चाहता है

उद्योग ने साफ किया है कि वह ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ नहीं है. संगठन का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म भविष्य का हिस्सा हैं और किसान सुविधा के लिए इनका इस्तेमाल जरूरी भी है. लेकिन मांग सिर्फ इतनी है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों के लिए एक जैसे नियम हों.

अंकुर अग्रवाल के मुताबिक, कीटनाशक जैसे संवेदनशील उत्पादों के लिए पूरी सप्लाई चेन में पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी जरूरी है. इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसान तक पहुंचने वाला उत्पाद असली, सुरक्षित और मानकों के अनुरूप हो.

किसानों की सुरक्षा और भरोसा दांव पर

उद्योग का कहना है कि नकली कीटनाशकों पर रोक से आर्थिक फायदा भले ही बहुत बड़ा न दिखे, लेकिन इसका सामाजिक और कृषि से जुड़ा असर कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है. अनुमान के मुताबिक, अगर अवैध ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगती है, तो घरेलू कारोबार में एक प्रतिशत से भी कम की बढ़ोतरी होगी.

असल मकसद किसानों की सुरक्षा, फसल की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं का भरोसा बनाए रखना है. इसी वजह से कई कंपनियों ने अनधिकृत बिक्री के खिलाफ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को कानूनी नोटिस भेजे हैं और कुछ मामलों में अदालतों ने ऐसे उत्पादों की लिस्टिंग हटाने के निर्देश भी दिए हैं.

आगे क्या हो सकता है

भारत का कीटनाशक उद्योग करीब 66,000 करोड़ रुपये का है और निर्यात का आंकड़ा लगभग 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. उद्योग को उम्मीद है कि आने वाले दस वर्षों में इसमें 8 से 9 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हो सकती है.

लेकिन यह विकास तभी टिकाऊ होगा, जब नकली और गैरकानूनी उत्पादों पर सख्ती से लगाम लगे. क्रॉपलाइफ इंडिया कीटनाशक उद्योग संगठन का मानना है कि कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 में ऑनलाइन बिक्री को लेकर स्पष्ट और मजबूत प्रावधान जोड़कर सरकार इस दिशा में बड़ा कदम उठा सकती है. इससे न सिर्फ किसानों को सुरक्षित उत्पाद मिलेंगे, बल्कि भारतीय कृषि व्यवस्था में भरोसा और स्थिरता भी बनी रहेगी.

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