अंडा के साथ चिकन भी महंगा, कीमत में 110 रुपये किलो की बढ़ोतरी.. बिगड़ा किचन का बजट
आंध्र प्रदेश में चिकन और अंडों की कीमतों में भारी उछाल से उपभोक्ताओं का बजट बिगड़ गया है. दो सप्ताह में चिकन की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अंडे 6 रुपये से 8.50 रुपये प्रति पीस हो गए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, भीषण गर्मी से उत्पादन घटने और आपूर्ति कम होने के कारण कीमतें बढ़ी हैं.
Egg Price Hike: चिकन और अंडों की कीमतों में अचानक आई तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. आंध्र प्रदेश में पिछले दो सप्ताह में चिकन के दाम में 110 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है. 15 जून को जहां चिकन 220 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वहीं अब इसकी खुदरा कीमत 330 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. चिकन के साथ-साथ अंडों के दाम भी बढ़ गए हैं. 15 जून को एक अंडा करीब 6 रुपये में मिल रहा था, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर 8.50 रुपये प्रति अंडा हो गई है.
कीमतों में इस तेजी का असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है. वहीं, अंडे और चिकन पर निर्भर छोटे कारोबारियों और खाद्य व्यवसायों की लागत भी बढ़ गई है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है. पोल्ट्री उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि चिकन और अंडों की कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता अंतर है. गर्मी के मौसम में बड़ी संख्या में मुर्गियों की मौत होने से पोल्ट्री उत्पादन पर असर पड़ा और बाजार में आपूर्ति कम हो गई.
पोल्ट्री फार्मों को भारी नुकसान
वहीं, उपभोक्ताओं की मांग लगातार बनी हुई है, जिसके कारण कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. पोल्ट्री कारोबारी बी. रामाराव ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि भीषण गर्मी के कारण पोल्ट्री फार्मों को भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि उत्पादन अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है और जब तक बाजार में पर्याप्त संख्या में नई मुर्गियां नहीं पहुंचतीं, तब तक चिकन और अंडों की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं.
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चिकन महंगा होने से बिगड़ बजट
चिकन की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों के घरेलू बजट पर भी साफ दिखाई देने लगा है. उपभोक्ताओं का कहना है कि लगातार बढ़ रहे दामों के कारण उन्हें अपने साप्ताहिक खाद्य खर्च में बदलाव करना पड़ रहा है. शहर की गृहिणी बेथु विजया ने कहा कि हाल के दिनों में चिकन की कीमतें कई बार मटन के बराबर पहुंच गई हैं. उन्होंने कहा कि चिकन के दाम लगातार बदलते रहते हैं, जिससे परिवार का बजट बिगड़ जाता है. बढ़ती कीमतों के कारण उन्होंने और उनके परिवार ने चिकन का सेवन कम कर दिया है. उपभोक्ताओं का मानना है कि कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से रसोई का खर्च काफी बढ़ गया है.
ग्राहक अब कम मात्रा में चिकन खरीद रहे हैं
खुदरा विक्रेताओं का भी कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण कई ग्राहक अब कम मात्रा में चिकन खरीद रहे हैं या फिर प्रोटीन के दूसरे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं. चिकन पर अधिक निर्भर रहने वाले रेस्तरां और सड़क किनारे के खाने-पीने के कारोबार भी इससे प्रभावित हो रहे हैं. बढ़ी हुई लागत के कारण कुछ होटल और रेस्तरां लोकप्रिय व्यंजनों की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं.
अंडों की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं
उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले कुछ सप्ताह तक चिकन और अंडों की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं. उनका कहना है कि गर्मी के कारण हुए नुकसान से पोल्ट्री फार्मों को उबरने और उत्पादन सामान्य होने में समय लगेगा. जब तक बाजार में आपूर्ति नहीं बढ़ती, तब तक उपभोक्ताओं को चिकन और अंडों के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है.