Mandi Rate: अंडा हुआ महंगा, कीमत में 1.40 रुपये प्रति पीस की बढ़ोतरी.. जानें ताजा रेट

केरल में अंडों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों और फूड इंडस्ट्री की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. नामक्कल से सप्लाई, सर्दियों की बढ़ी मांग और निर्यात के चलते दाम चढ़े हैं. बेकरी और छोटे कारोबारियों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है.

Kisan India
नोएडा | Published: 4 Jan, 2026 | 11:38 AM

Egg Price Hike: केरल में अडों की बढ़ती कीमतें अब आम लोगों की जेब पर साफ असर डाल रही हैं. सप्लाई कम होने और मांग बढ़ने की वजह से बीते एक साल में अंडों के दाम में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में केरल में तमिलनाडु के नामक्कल से ज्यादातर अंडों की सप्लाई होती है. पिछले एक साल में यहां एक अंडे की कीमत करीब 1 रुपये से 1.40 रुपये तक बढ़ गई है. सर्दियों में अंडों की मांग ज्यादा हो जाती है. साथ ही निर्यात भी लगातार जारी है. इसी वजह से घरेलू बाजार में अंडों की उपलब्धता घट गई है और दाम बढ़ गए हैं.

कीमत में बढ़ोतरी का आलम यह है कि इसका असर केरल की पूरी फूड इंडस्ट्री  पर दिख रहा है. चाय की दुकानों से लेकर बेकरी तक, अंडे से बनने वाले स्नैक्स और मिठाइयों की लागत बढ़ गई है. नामक्कल में जनवरी में 100 अंडों की कीमत 490 रुपये थी, जो दिसंबर तक बढ़कर 640 रुपये हो गई. कोच्चि के खुदरा बाजार में अंडे 7 से 7.50 रुपये (कहीं-कहीं 8 रुपये तक) बिक रहे हैं, जो पिछले क्रिसमस के मुकाबले 1.50 से 2 रुपये अधिक है. केरल हर साल करीब 560 करोड़ अंडे खपत करता है, जिनमें से लगभग 300 करोड़ बाहर से, खासकर तमिलनाडु से आते हैं. व्यापारियों का कहना है कि दिसंबर आमतौर पर महंगा होता है, लेकिन इस साल के दाम हाल के वर्षों में सबसे ऊंचे हैं.

6 करोड़ अंडे का होता है उत्पादन

जॉर्ज के अनुसार, गर्मियों में आमतौर पर अंडों के दाम कुछ कम हो जाते हैं, क्योंकि यह पूरी तरह मौसमी उतार-चढ़ाव का बाजार है. उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में दूध, अंडे और ब्रेड की खपत तेजी से बढ़ी है, क्योंकि ये आसानी से मिल जाते हैं और जल्दी खाए जा सकते हैं. लेकिन मांग कई गुना बढ़ने के बावजूद स्थानीय उत्पादन उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पाया है. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु का नामक्कल इलाका अकेले रोजाना करीब 6 करोड़ अंडे पैदा करता है, जिससे केरल की बाहरी राज्यों पर निर्भरता साफ दिखती है. केरल में खुद का अंडा उत्पादन  न तो पर्याप्त है और न ही इसमें कोई बड़ी बढ़ोतरी हुई है. ऊपर से पोल्ट्री फीड की कीमतें भी बढ़ रही हैं, जिससे किसानों की लागत बढ़ती है और इसका सीधा असर अंडों के दाम पर पड़ता है.

इतना महंगा हुआ अंडा

हालांकि दाम बढ़े हैं, फिर भी व्यापारी मानते हैं कि अंडा अब भी सबसे सस्ता और सुलभ नॉन-वेज प्रोटीन  है. दूसरी प्रोटीन चीजों के मुकाबले अंडे हर आय वर्ग के लिए किफायती बने हुए हैं. लेकिन बेकरी कारोबार पर दबाव साफ है. कन्नूर की ‘बेक स्टोरी लाइव बेकरी’ के मैनेजिंग पार्टनर नौशाद एम ने कहा कि क्रिसमस के पीक सीजन में अंडों की महंगाई ने मुनाफा घटा दिया है. इस समय प्लम केक और गाजर-पाइनएप्पल जैसे ड्राय केक की मांग ज्यादा होती है, लेकिन पिछले कुछ सालों में अंडे के दाम करीब 2 रुपये प्रति पीस बढ़ने से लागत काफी बढ़ गई है.

 

 

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