Lakshadweep tuna export: नीले समंदर की गोद में बसे लक्षद्वीप के छोटे-छोटे द्वीप अब सिर्फ अपनी खूबसूरती और शांति के लिए नहीं, बल्कि अपनी बेशकीमती समुद्री संपदा के लिए भी दुनिया भर में चर्चा में हैं. यहां के मछुआरों द्वारा पारंपरिक तरीके से पकड़ी जाने वाली टूना मछली अब अंतरराष्ट्रीय बाजार की नजर में आ गई है. हाल ही में अमेरिका, थाईलैंड, कोरिया, मालदीव, वियतनाम और ऑस्ट्रिया जैसे देशों से आए समुद्री उत्पाद विशेषज्ञों और व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने लक्षद्वीप का दौरा किया और यहां से टूना मछली के निर्यात की संभावनाओं को करीब से समझा.
पारंपरिक मछली पकड़ने की कला ने जीता दिल
इस विदेशी टीम ने कवारत्ती, अगत्ती, मिनीकॉय और एंड्रॉट द्वीपों में स्थानीय मछुआरों से मुलाकात की. उन्होंने देखा कि कैसे पीढ़ियों से मछुआरे “पोल-एंड-लाइन” पद्धति से टूना मछली पकड़ते आ रहे हैं. यह तरीका न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित है, बल्कि समुद्र की जैव विविधता को भी नुकसान नहीं पहुंचाता. यही वजह है कि लक्षद्वीप की टूना मछली को शुद्ध, ताजा और प्रीमियम क्वालिटी का माना जाता है. विदेशी व्यापारियों ने माना कि ऐसी साफ-सुथरी और टिकाऊ मछली पकड़ने की तकनीक आज के वैश्विक बाजार में बहुत कम देखने को मिलती है.
टूना से बने उत्पादों में भी दिखी बड़ी संभावना
दौरे के दौरान सिर्फ ताजा टूना मछली ही नहीं, बल्कि इससे बनने वाले प्रोसेस्ड और वैल्यू-एडेड उत्पादों पर भी चर्चा हुई. खास तौर पर लक्षद्वीप की पारंपरिक सूखी टूना मछली ‘मस्मिन’ को लेकर विदेशी बाजारों में अच्छी मांग की संभावना जताई गई. प्रतिनिधिमंडल ने भरोसा दिलाया कि वे आधुनिक मदर वेसल की सुविधा उपलब्ध करा सकते हैं, जिनमें उन्नत कोल्ड स्टोरेज और हैंडलिंग सिस्टम होंगे. इससे मछली की ताजगी बनी रहेगी और लंबी दूरी तक निर्यात करना आसान हो सकेगा.
मछुआरों के जीवन में आ सकता है बड़ा बदलाव
एंड्रॉट आइलैंड फिशरमेन कोऑपरेटिव सोसाइटी के अध्यक्ष मोहम्मद अल्थाफ हुसैन का कहना है कि यह दौरा मछुआरा समुदाय के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है. लंबे समय से सीमित बाजार, सही दाम न मिलना और कटाई के बाद मछली को सुरक्षित रखने की दिक्कतें मछुआरों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई थीं. अगर विदेशी व्यापार समझौते होते हैं, तो मछुआरों की आमदनी बढ़ेगी और उनके जीवन स्तर में भी सुधार आएगा.
प्रशासन के साथ हुई अहम बातचीत
विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने लक्षद्वीप प्रशासन और मत्स्य विभाग के अधिकारियों से भी विस्तार से चर्चा की. बातचीत में निर्यात से जुड़े नियमों को आसान बनाने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीधे जुड़ने जैसे मुद्दे शामिल रहे. अधिकारियों का मानना है कि इन चर्चाओं से आने वाले समय में लक्षद्वीप के समुद्री कारोबार को नई दिशा मिल सकती है.
वैश्विक बाजार में पहचान की ओर लक्षद्वीप
इस दौरे का समन्वय एंड्रॉट आइलैंड फिशरमेन कोऑपरेटिव सोसाइटी ने किया था और प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व थाईलैंड की बड़ी सीफूड कंपनी एनएस सीफूड्स की ओर से जयेंद्रन मुथुसंकर ने किया. जानकारों का कहना है कि अगर ये प्रयास जमीन पर उतरते हैं, तो लक्षद्वीप की टूना मछली जल्द ही दुनिया के प्रीमियम सीफूड बाजार में अपनी खास पहचान बना सकती है. इससे न केवल मछुआरों की किस्मत बदलेगी, बल्कि भारत के समुद्री निर्यात को भी एक नई ताकत मिलेगी.