Explainer: पाकिस्तान-अफगान तनाव से बढ़ रही महंगाई, क्या भारत पर होगा इसका असर?

पाकिस्तान में सबसे पहले असर खाने-पीने की चीजों पर दिखा है. अफगानिस्तान से आने वाले सेब, अंगूर और सूखे मेवे अब महंगे बिक रहे हैं. टमाटर जैसी आम सब्जी के दाम कई गुना बढ़ने की खबरें सामने आई हैं. प्याज, लहसुन और अदरक जैसे रोजमर्रा के मसाले भी महंगे हो गए हैं.

नई दिल्ली | Updated On: 27 Feb, 2026 | 03:21 PM

Pakistan Afghanistan conflict impact: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता तनाव अब सिर्फ सीमा पर गोलाबारी या राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा है. इसका असर सीधे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है. सीमा बंद होने से व्यापार लगभग रुक गया है, ट्रकों की आवाजाही थम गई है और बाजारों में जरूरी सामान महंगा होने लगा है. ऐसे में सवाल उठता है कि इस टकराव का असली आर्थिक असर क्या है? पाकिस्तान और अफगानिस्तान में क्या-क्या महंगा हो रहा है? और क्या इसका प्रभाव भारत पर भी पड़ेगा? आइए इसे विस्तार से समझते हैं.

सीमा क्यों अहम है और बंद होने से क्या हुआ?

द संडे गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा है. इस सीमा से रोज हजारों ट्रक गुजरते थे, जो कोयला, फल, सब्जियां, दवाइयां, गेहूं, सीमेंट और अन्य सामान लेकर आते-जाते थे. टोरखम और चमन जैसे बड़े बॉर्डर पॉइंट दोनों देशों के लिए व्यापार की जीवनरेखा थे.

तनाव बढ़ने के बाद इन रास्तों को बंद कर दिया गया. इसका सीधा मतलब है कि जो सामान पहले आसानी से पहुंच जाता था, अब वह या तो फंस गया है या बिल्कुल नहीं आ पा रहा. जब सप्लाई रुकती है और मांग बनी रहती है, तो बाजार में कीमतें बढ़ना तय है. यही अभी दोनों देशों में हो रहा है.

पाकिस्तान में क्या हो रहा है असर?

पाकिस्तान में सबसे पहले असर खाने-पीने की चीजों पर दिखा है. अफगानिस्तान से आने वाले सेब, अंगूर और सूखे मेवे अब महंगे बिक रहे हैं. टमाटर जैसी आम सब्जी के दाम कई गुना बढ़ने की खबरें सामने आई हैं. प्याज, लहसुन और अदरक जैसे रोजमर्रा के मसाले भी महंगे हो गए हैं.

उद्योगों की हालत भी कमजोर हो रही है. पाकिस्तान का सीमेंट उद्योग सस्ते अफगान कोयले पर निर्भर था. अब कोयला नहीं मिल पा रहा, तो दूर देशों से महंगा कोयला मंगाना पड़ रहा है. इससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और निर्माण क्षेत्र पर दबाव पड़ रहा है.

टेक्सटाइल सेक्टर को भी झटका लगा है. कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित होने से उत्पादन धीमा पड़ सकता है. सीमा पर हजारों कंटेनर फंसे होने से व्यापारियों को नुकसान हो रहा है. ट्रांसपोर्ट महंगा होने से बाकी सामान भी महंगा बिक रहा है. पाकिस्तान में महंगाई का ये आलम है कि किलों से बिकने वाली चीजें भी लोग पीस में खरीदने को मजबूर है. जैसे टमाटर के एक पीस की कीमत फिलहाल 75 रुपये है.

अफगानिस्तान में क्यों गहराई चिंता?

अफगानिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है. वहां बड़ी आबादी खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है. पाकिस्तान से दवाइयां, गेहूं, आटा, चीनी और डेयरी उत्पाद बड़ी मात्रा में जाते थे. सीमा बंद होने से इनकी सप्लाई पर असर पड़ा है.

दवाओं की कमी से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है. गेहूं और आटे की कमी से आम लोगों के लिए रोटी जुटाना मुश्किल हो सकता है. हालांकि अफगानिस्तान के कुछ उत्पाद जैसे फल और कोयला बाहर नहीं जा पा रहे, जिससे घरेलू बाजार में उनके दाम गिर सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर आयातित जरूरी सामान महंगा हो रहा है.

वैकल्पिक रास्ते कितने कारगर?

अफगानिस्तान अब ईरान और मध्य एशियाई देशों के रास्ते व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन ये रास्ते लंबे और खर्चीले हैं. ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा तो अंतिम कीमत भी बढ़ेगी.

पाकिस्तान के लिए भी नए सप्लायर ढूंढना आसान नहीं है. महंगे आयात का बोझ आखिर में आम जनता पर ही पड़ेगा.

भारत पर कितना असर?

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, तनाव के बीच भारत-अफगान व्यापार को लेकर भी चर्चा हो रही है.  2024-25 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत ने अफगानिस्तान से करीब 66 करोड़ डॉलर का आयात किया. इसमें सबसे ज्यादा हिस्सा फलों और सूखे मेवों का रहा, जो लगभग 39 करोड़ डॉलर से ज्यादा था. इसके अलावा गोंद, हींग, मसाले, कॉफी और चाय का भी आयात हुआ.

भारत अफगानिस्तान को दवाइयां, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, रेडीमेड कपड़े और अन्य उत्पाद निर्यात करता है. भारत की फार्मा इंडस्ट्री अफगानिस्तान के लिए एक अहम सप्लायर मानी जाती है.

व्यापार का रास्ता क्यों सुरक्षित है?

भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार मुख्य रूप से ईरान के चाबहार पोर्ट और एयर फ्रेट कॉरिडोर के जरिए होता है. पाकिस्तान के रास्ते जमीनी ट्रांजिट पहले से ही बंद है, इसलिए मौजूदा तनाव का भारत-अफगान व्यापार पर सीधा असर सीमित रहने की संभावना है. हालांकि, अगर क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ती है तो लॉजिस्टिक खर्च और ट्रांसपोर्ट समय बढ़ सकता है. इससे बाजार में कुछ उत्पादों की कीमतों पर अस्थायी दबाव बन सकता है.

किन चीजों के दाम बढ़ सकते हैं?

भारतीय बाजार में सूखे मेवे, खासकर किशमिश, बादाम, अखरोट, पिस्ता, अंजीर और खुबानी की सप्लाई पर हल्का असर पड़ सकता है. हींग और कुछ मसालों की कीमतों में भी अस्थायी बढ़ोतरी देखी जा सकती है. हालांकि यह बढ़ोतरी व्यापक आर्थिक संकट में नहीं बदलेगी, क्योंकि इन वस्तुओं का कुल आयात भारत की अर्थव्यवस्था की तुलना में सीमित है.

पाकिस्तान से भारत का सीमित व्यापार

भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं. इसके बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. 2019 के बाद आधिकारिक आयात-निर्यात में बड़ी गिरावट जरूर आई, लेकिन कुछ चुनिंदा सामान आज भी अप्रत्यक्ष रास्तों से भारतीय बाजार तक पहुंचते हैं. अक्सर ये वस्तुएं सीधे सीमा पार नहीं आतीं, बल्कि दुबई या अन्य तीसरे देशों के जरिए व्यापारिक चैनल से भारत पहुंचती हैं. सेंधा नमक के अलावा कुछ मौकों पर सूखे मेवे, फल, चमड़े के उत्पाद और कपड़ा भी पाकिस्तान से आता है, हालांकि इनकी मात्रा पहले की तुलना में काफी कम है.

बता दें कि भारत के पास वैकल्पिक व्यापार मार्ग और विविध सप्लाई स्रोत मौजूद हैं. इसलिए यह संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर झटका नहीं माना जा रहा. हां, कुछ विशेष कृषि उत्पादों की कीमतों में अस्थायी उतार-चढ़ाव होने की संभावना है.

Published: 27 Feb, 2026 | 02:45 PM

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