महंगाई पर सरकार की सख्ती: गेहूं-चावल का भरपूर स्टॉक, जमाखोरी- कालाबाजारी पर कड़ा एक्शन
सरकार का कहना है कि देश में गेहूं और चावल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे किसी भी आपात स्थिति से आसानी से निपटा जा सकता है. साथ ही राज्यों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती से कार्रवाई की जाए, ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो.
food price stability: देश में जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर आम लोगों के मन में अक्सर चिंता बनी रहती है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर संकट की खबरें सामने आती हैं. हाल ही में पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच यह सवाल और भी ज्यादा उठने लगा कि क्या इसका असर भारत में खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा. लेकिन केंद्र सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल ऐसी कोई असामान्य स्थिति नहीं है और कीमतें नियंत्रण में हैं.
सरकार का कहना है कि देश में गेहूं और चावल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे किसी भी आपात स्थिति से आसानी से निपटा जा सकता है. साथ ही राज्यों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती से कार्रवाई की जाए, ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो.
गेहूं और चावल का मजबूत स्टॉक, चिंता की जरूरत नहीं
खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग की संयुक्त सचिव सी. शिखा के अनुसार, देश में इस समय करीब 222 लाख टन गेहूं और लगभग 380 लाख टन चावल का भंडार मौजूद है. यह मात्रा सरकार द्वारा तय न्यूनतम बफर स्टॉक से लगभग तीन गुना ज्यादा है. नियमों के अनुसार 1 अप्रैल तक 74.6 लाख टन गेहूं और 135.8 लाख टन चावल का स्टॉक होना जरूरी होता है.
ऐसे में साफ है कि देश के पास इतना अनाज है कि वह न केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की जरूरतें पूरी कर सकता है, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में भी काम आ सकता है. अच्छी बात यह भी है कि पिछले एक साल में गेहूं और चावल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है.
#WATCH | Delhi | Joint Secretary in the Department of Food and Public Distribution, Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution, C Shikha says, “We have adequate buffer stock of both wheat and rice, three times the buffer stock norms, which is there. For wheat, we… pic.twitter.com/e7mc9oNoGG
— ANI (@ANI) April 6, 2026
खाद्य तेल की स्थिति भी फिलहाल संतुलित
भारत में खाद्य तेल की जरूरत का लगभग 55 से 60 फीसदी हिस्सा आयात से पूरा होता है. इसके बावजूद सरकार का कहना है कि फिलहाल सप्लाई सामान्य बनी हुई है.
इंडोनेशिया, मलेशिया, रूस, यूक्रेन, अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे देशों से आयात जारी है, जिससे बाजार में उपलब्धता बनी हुई है.
इसके साथ ही देश में सरसों के उत्पादन में भी सुधार हुआ है, जिससे घरेलू सप्लाई को मजबूती मिली है. हालांकि सरकार इस क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप भी कर सकती है.
दालों की स्थिति बेहतर, स्टॉक भी पर्याप्त
दालों के मामले में इस साल स्थिति पिछले साल के मुकाबले बेहतर बताई जा रही है. सरकार के पास करीब 28 लाख टन दालों का बफर स्टॉक मौजूद है. इसके बावजूद एहतियात के तौर पर तुअर और उड़द दाल के आयात को मार्च 2027 तक बिना किसी मात्रा सीमा के अनुमति दी गई है, ताकि बाजार में किसी तरह की कमी न हो.
सब्जियों में मिला-जुला रुख
प्याज, आलू और टमाटर जैसी रोजमर्रा की सब्जियों के उत्पादन की बात करें तो कुल मिलाकर स्थिति लगभग पिछले साल जैसी ही है. हालांकि कुछ आंकड़ों के अनुसार प्याज का उत्पादन इस साल करीब 11 फीसदी तक कम हो सकता है, जबकि टमाटर का उत्पादन करीब 10 फीसदी ज्यादा रहने का अनुमान है. आलू का उत्पादन लगभग स्थिर बना हुआ है. इसका मतलब है कि कुछ सब्जियों में हल्की उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रह सकती है, लेकिन कुल मिलाकर बड़ी कमी की संभावना नहीं है.
कीमतों पर रोजाना नजर, 528 केंद्रों से डेटा
उपभोक्ता मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव अनुपम मिश्रा ने बताया कि सरकार देशभर में 528 केंद्रों से रोजाना 40 जरूरी वस्तुओं के थोक और खुदरा दामों की निगरानी कर रही है. इसके लिए मोबाइल ऐप के जरिए डेटा जुटाया जाता है, जिससे किसी भी बदलाव पर तुरंत नजर रखी जा सके. अब तक के आंकड़ों के अनुसार, जरूरी वस्तुओं की कीमतों में कोई असामान्य उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है.
जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती
सरकार ने राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कदम उठाएं. यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि कुछ लोग कृत्रिम कमी पैदा कर कीमतें न बढ़ा सकें और आम जनता को परेशानी न हो.
LPG शिकायतों में आई कमी
सरकार ने यह भी बताया कि LPG से जुड़ी शिकायतों में कमी आई है. जहां 15 मार्च को 919 शिकायतें दर्ज हुई थीं, वहीं 5 अप्रैल तक यह संख्या घटकर 493 रह गई है. इससे पता चलता है कि सप्लाई सिस्टम में सुधार हुआ है और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिल रही है.