जायद सीजन बुआई में हल्की बढ़त: धान घटा, दलहन और मोटे अनाज ने संभाली खेती की रफ्तार

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण खाद और अन्य इनपुट की सप्लाई को लेकर कुछ चिंताएं जरूर सामने आई हैं. लेकिन सरकार का कहना है कि शुरुआती खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है और किसानों को किसी तरह की कमी नहीं होगी.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 7 Apr, 2026 | 09:10 AM

Summer crop sowing: देश में इस साल ग्रीष्मकालीन (जायद) फसलों की बुआई में हल्की बढ़त देखने को मिली है. हालांकि यह बढ़त बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन इसके पीछे खेती के बदलते रुझानों की झलक साफ दिखाई दे रही है. खास बात यह है कि जहां धान की बुआई में गिरावट आई है, वहीं दलहन, मोटे अनाज और तिलहन फसलों ने इस कमी को काफी हद तक पूरा कर दिया है.

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 3 अप्रैल 2026 तक देश में कुल 58.2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुआई हो चुकी है, जो पिछले साल के 57.8 लाख हेक्टेयर के मुकाबले थोड़ी ज्यादा है. यह वृद्धि भले ही मामूली हो, लेकिन इसके पीछे कई अहम कारण हैं.

क्या होता है जायद सीजन और क्यों है खास

जायद सीजन मार्च से जून के बीच का समय होता है, जब रबी और खरीफ के बीच छोटी अवधि वाली फसलें बोई जाती हैं. इस सीजन में खेती मुख्य रूप से सिंचाई पर निर्भर होती है. इस समय किसान जल्दी तैयार होने वाली फसलों जैसे मूंग, उड़द, मक्का, बाजरा और कुछ तिलहन फसलों की बुआई करते हैं. यह सीजन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया भी बनता है.

धान की बुआई में गिरावट, लेकिन अन्य फसलों ने संभाली स्थिति

इस बार धान की बुआई में गिरावट देखने को मिली है, जो कुल आंकड़ों को प्रभावित कर रही है. हालांकि इस कमी को दलहन, मोटे अनाज और तिलहन फसलों की बढ़ती बुआई ने काफी हद तक संतुलित कर दिया है.

दलहन फसलों का क्षेत्र बढ़कर 8.79 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 7.02 लाख हेक्टेयर था. इसमें मूंग और उड़द की बुआई में खास बढ़ोतरी देखी गई है.

वहीं मोटे अनाज यानी “श्री अन्न” की खेती भी बढ़ी है. इसका क्षेत्र 87 हजार हेक्टेयर बढ़कर 11.6 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. इसमें बाजरा और मक्का की भूमिका अहम रही है, हालांकि ज्वार में थोड़ी गिरावट आई है.

तिलहन फसलों की बात करें तो इनका रकबा भी 31 हजार हेक्टेयर बढ़कर 7.74 लाख हेक्टेयर हो गया है. इसमें मूंगफली की खेती ने बढ़त दिखाई है, जबकि तिल (सेसमम) में हल्की कमी आई है.

खेती के पैटर्न में बदलाव

इन आंकड़ों से यह साफ संकेत मिलता है कि किसान अब धीरे-धीरे कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ रहे हैं. धान की तुलना में दलहन और मोटे अनाज कम पानी में भी अच्छे से उग जाते हैं, इसलिए इनकी लोकप्रियता बढ़ रही है. यह बदलाव लंबे समय में पानी की बचत और खेती की स्थिरता के लिए भी अच्छा माना जा रहा है.

अभी और बढ़ सकती है बुआई

सरकार के अनुसार, जायद सीजन का सामान्य क्षेत्र करीब 75.3 लाख हेक्टेयर होता है. इसका मतलब है कि अभी भी बुआई के लिए काफी गुंजाइश बाकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बुआई की रफ्तार और तेज हो सकती है. शुरुआती देरी का कारण मौसम की अनुकूलता न होना था, लेकिन अब हालात सुधर रहे हैं.

इनपुट सप्लाई को लेकर चिंता

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण खाद और अन्य इनपुट की सप्लाई को लेकर कुछ चिंताएं जरूर सामने आई हैं. लेकिन सरकार का कहना है कि शुरुआती खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है और किसानों को किसी तरह की कमी नहीं होगी.

अनाज का पर्याप्त भंडार

देश में अनाज का भंडार भी मजबूत स्थिति में है. 28 फरवरी 2026 तक भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियों के पास कुल 601 लाख टन अनाज का स्टॉक था. इसमें 236.2 लाख टन गेहूं और 364.7 लाख टन चावल शामिल है. यह अतिरिक्त स्टॉक सरकार को बाजार में दाम नियंत्रित रखने और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करने की सुविधा देता है.

हालांकि, इतना बड़ा स्टॉक बनाए रखना अपने आप में एक चुनौती भी है, क्योंकि इससे भंडारण लागत बढ़ती है और बेहतर प्रबंधन की जरूरत होती है.

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Published: 7 Apr, 2026 | 09:10 AM
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