Edible oil crisis: देश में खाद्य तेल और तिलहन का कारोबार इस समय एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है. एक तरफ दुनिया भर में चल रहे तनाव और महंगे होते कच्चे तेल का असर है, तो दूसरी तरफ मौसम भी अनिश्चित बना हुआ है. इन दोनों वजहों से बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है और कीमतों पर दबाव साफ दिख रहा है.
कच्चे तेल की महंगाई का सीधा असर
बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अध्यक्ष संजीव अस्थाना का कहना है कि भारत जैसे देश, जो कच्चे तेल और LPG के लिए आयात पर निर्भर हैं, उन्हें मौजूदा हालात में ज्यादा सावधानी बरतनी होगी.
उनके मुताबिक, जब कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं तो उसका असर सीधे खाद्य तेल की कीमतों पर पड़ता है. उत्पादन और ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ जाती है, जिससे बाजार में तेल महंगा हो जाता है. साथ ही शिपिंग और बीमा की लागत भी बढ़ रही है, जिससे आयातित तेल और महंगा पड़ रहा है.
वैश्विक तनाव से बढ़ी मुश्किलें
पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आने वाली दिक्कतों ने व्यापार को प्रभावित किया है. हालांकि सरकार ने समय रहते कुछ कदम उठाए हैं, जिससे हालात को संभालने की कोशिश की जा रही है. संजीव अस्थाना का मानना है कि इस समय सरकार, व्यापारियों और उद्योग से जुड़े लोगों के बीच बेहतर तालमेल बहुत जरूरी है, ताकि सप्लाई बनी रहे और बाजार में ज्यादा उथल-पुथल न हो.
अल नीनो का खतरा, मानसून पर असर
मौसम को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. पहले जहां ला नीना की बात हो रही थी, अब संकेत मिल रहे हैं कि अल नीनो और शायद ‘सुपर एल नीनो’ का असर देखने को मिल सकता है. इसका मतलब है कि भारत में मानसून कमजोर रह सकता है. अगर ऐसा हुआ, तो इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा.
खरीफ फसलों के लिए चुनौती
कम बारिश होने पर सोयाबीन और मूंगफली जैसी तिलहन फसलों की बुवाई कम हो सकती है. इससे देश में उत्पादन घट सकता है और हमें ज्यादा आयात करना पड़ सकता है. ऐसे हालात में बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, जिससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ेगा.
सरसों की फसल से राहत
हालांकि इस बीच एक अच्छी खबर भी है. सरसों की फसल इस बार अच्छी स्थिति में है. रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 में सरसों का रकबा बढ़कर 89.36 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 86.29 लाख हेक्टेयर था.
अच्छे मौसम की वजह से फसल की स्थिति सामान्य है और कई जगहों पर कटाई भी शुरू हो गई है. इससे उम्मीद है कि इस साल उत्पादन ज्यादा हो सकता है और बाजार को थोड़ी राहत मिल सकती है.
योजना बनाना बहुत जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सही योजना बनाना बहुत जरूरी है. घरेलू उत्पादन बढ़ाना, आयात को सही तरीके से मैनेज करना और बाजार पर नजर रखना ये सभी कदम जरूरी हैं. अगर समय रहते सही फैसले लिए गए, तो हालात को संभाला जा सकता है. लेकिन अगर लापरवाही हुई, तो इसका असर सीधे आम लोगों की रसोई पर पड़ेगा.