पाम ऑयल बना पहली पसंद, जनवरी में आयात उछला… जानिए सोयाबीन-सूरजमुखी तेल का हाल
जनवरी में पाम ऑयल की कीमतें सोयाबीन तेल की तुलना में काफी कम रहीं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोनों तेलों के बीच प्रति टन 100 डॉलर से अधिक का अंतर देखने को मिला. इसी कीमत के फर्क ने भारतीय रिफाइनरों और आयातकों को पाम ऑयल की खरीद बढ़ाने के लिए प्रेरित किया.
Oil imports: खाद्य तेल के बाजार में जनवरी महीने ने एक नया रुख दिखाया है. बढ़ती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय खरीदारों ने रणनीति बदलते हुए पाम ऑयल की ओर रुख किया है. नतीजा यह रहा कि जनवरी में पाम ऑयल का आयात पिछले चार महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया, जबकि सोयाबीन तेल की खरीद में तेज गिरावट दर्ज की गई. यह बदलाव केवल आयात आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक बाजारों और तेल उत्पादक देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता दिख रहा है.
सस्ता पड़ने से पाम ऑयल की बढ़ी मांग
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में पाम ऑयल की कीमतें सोयाबीन तेल की तुलना में काफी कम रहीं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोनों तेलों के बीच प्रति टन 100 डॉलर से अधिक का अंतर देखने को मिला. इसी कीमत के फर्क ने भारतीय रिफाइनरों और आयातकों को पाम ऑयल की खरीद बढ़ाने के लिए प्रेरित किया. अनुमान के मुताबिक, जनवरी में पाम ऑयल का आयात बढ़कर करीब 7.66 लाख टन तक पहुंच गया, जो दिसंबर में करीब 5.07 लाख टन था. यह अक्टूबर 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है.
सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर दबाव
जहां पाम ऑयल की चमक बढ़ी, वहीं सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल की मांग कमजोर पड़ी. जनवरी में सोयाबीन तेल का आयात लगभग 45 प्रतिशत गिरकर करीब 2.8 लाख टन रह गया, जो पिछले करीब 19 महीनों का निचला स्तर है. इसी तरह सूरजमुखी तेल का आयात भी घटकर करीब 2.69 लाख टन पर आ गया. विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची कीमतें और पर्याप्त घरेलू स्टॉक होने के कारण खरीदार इन दोनों तेलों से फिलहाल दूरी बना रहे हैं.
कुल खाद्य तेल आयात में हल्की गिरावट
हालांकि पाम ऑयल की खरीद बढ़ी, लेकिन सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात में कमी के चलते जनवरी में भारत का कुल खाद्य तेल आयात थोड़ा घटा. अनुमान के अनुसार, यह करीब 3.5 प्रतिशत घटकर 13.2 लाख टन के आसपास रहा. इसमें नेपाल से भूमि मार्ग के जरिए आने वाले शुल्क-मुक्त आयात को शामिल नहीं किया गया है. बाजार जानकारों के मुताबिक, अगर इन आयातों को जोड़ा जाए तो कुल आंकड़े थोड़े अलग हो सकते हैं.
उत्पादक देशों को मिल सकती है राहत
भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक है. ऐसे में यहां पाम ऑयल की बढ़ती मांग का सीधा फायदा प्रमुख उत्पादक देशों जैसे इंडोनेशिया और मलेशिया को मिल सकता है. इन देशों में लंबे समय से पाम ऑयल का भंडार बढ़ा हुआ है. भारत की मजबूत खरीद से इन भंडारों में कमी आ सकती है, जिससे मलेशियाई पाम ऑयल फ्यूचर्स को सहारा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. वहीं दूसरी ओर, सोयाबीन तेल की कमजोर मांग का दबाव अमेरिकी बाजार पर भी पड़ सकता है.
फरवरी में भी जारी रह सकता है यही रुझान
तेल कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी में भी पाम ऑयल का आयात मजबूत बना रह सकता है. कीमतों का अंतर अगर इसी तरह बना रहता है तो भारतीय खरीदार पाम ऑयल को प्राथमिकता देते रहेंगे. इसके उलट, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की खरीद पर दबाव बना रह सकता है. भारत आमतौर पर पाम ऑयल इंडोनेशिया और मलेशिया से मंगाता है, जबकि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन जैसे देशों से आता है.
बाजार की दिशा तय करेगा कीमतों का खेल
जनवरी के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि खाद्य तेल बाजार में कीमतें ही सबसे बड़ा फैक्टर बनी हुई हैं. जैसे ही किसी तेल की कीमत दूसरे विकल्पों की तुलना में कम होती है, खरीदार तुरंत अपना रुख बदल लेते हैं. आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय कीमतों, मुद्रा विनिमय दर और घरेलू मांग के आधार पर यह तस्वीर और साफ होगी कि भारतीय बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है. फिलहाल इतना तय है कि पाम ऑयल ने जनवरी में बाजी मार ली है और इसका असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है.