डीजल को कहें अलविदा! CNG-CBG ट्रैक्टर से खेती होगी सस्ती, साफ और ज्यादा मुनाफेदार

भारत सरकार प्राकृतिक गैस और बायोगैस को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है. गांवों में CBG प्लांट लग रहे हैं, जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर ही ईंधन उपलब्ध हो सके. इससे न सिर्फ ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि किसान ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर भी बनेंगे.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 1 Jan, 2026 | 12:33 PM

CNG and CBG Tractors: भारत की खेती आज एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. डीजल की बढ़ती कीमतें, प्रदूषण की चिंता और टिकाऊ खेती की जरूरत ने किसानों को नए विकल्पों की ओर देखने पर मजबूर किया है. ऐसे समय में CNG और CBG ट्रैक्टर खेती की दुनिया में एक गेम-चेंजर बनकर उभरे हैं. ये ट्रैक्टर न सिर्फ पर्यावरण के लिए बेहतर हैं, बल्कि किसानों की जेब पर भी भारी बोझ नहीं डालते.

क्या होते हैं CNG और CBG ट्रैक्टर

CNG ट्रैक्टर कंप्रेस्ड नेचुरल गैस पर चलते हैं, जबकि CBG ट्रैक्टर कंप्रेस्ड बायोगैस का इस्तेमाल करते हैं. इन दोनों ईंधनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये डीजल की तुलना में कहीं ज्यादा साफ और सस्ते हैं. इंजन में ईंधन का दहन बेहतर होता है, जिससे धुआं कम निकलता है और इंजन भी ज्यादा स्मूद तरीके से काम करता है. अब CNG हाइब्रिड तकनीक के आने से इन ट्रैक्टरों की ताकत और भरोसेमंद प्रदर्शन में भी काफी सुधार हुआ है, जिससे ये भारी कृषि कार्यों के लिए भी उपयुक्त बनते जा रहे हैं.

खर्च में राहत, मुनाफे में बढ़ोतरी

किसानों के लिए किसी भी मशीन को अपनाने का सबसे बड़ा सवाल लागत का होता है. भारत में CNG ट्रैक्टर की कीमत अक्सर डीजल ट्रैक्टर के आसपास ही रहती है, लेकिन असली फायदा इसके रोजमर्रा के खर्च में दिखाई देता है. CNG और CBG ईंधन की कीमत डीजल से काफी कम होती है, जिससे ईंधन खर्च में 40 से 50 प्रतिशत तक की बचत संभव है.

इसके अलावा, CNG इंजन में कार्बन जमाव कम होता है, जिससे मेंटेनेंस का खर्च भी घट जाता है. चाहे बड़ा ट्रैक्टर हो या छोटा मिनी ट्रैक्टर, लंबे समय में CNG और CBG मॉडल किसानों के लिए ज्यादा किफायती साबित हो रहे हैं.

सरकार की हरित ऊर्जा नीति से मिल रहा बढ़ावा

भारत सरकार प्राकृतिक गैस और बायोगैस को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है. गांवों में CBG प्लांट लग रहे हैं, जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर ही ईंधन उपलब्ध हो सके. इससे न सिर्फ ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि किसान ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर भी बनेंगे. सरकार का यह फोकस CNG और CBG ट्रैक्टरों को भविष्य के लिए एक मजबूत विकल्प बना रहा है.

बड़ी कंपनियां ला रहीं नई तकनीक

भारत में कई नामी कंपनियां इस हरित बदलाव का नेतृत्व कर रही हैं. Mahindra Tractors, Eicher Tractors और Massey Ferguson जैसी कंपनियां CNG और CBG तकनीक वाले ट्रैक्टरों पर तेजी से काम कर रही हैं. इन मॉडलों में ताकतवर इंजन, आधुनिक डिजाइन और किसान-अनुकूल फीचर्स दिए जा रहे हैं. आने वाले समय में मिनी ट्रैक्टर सेगमेंट में भी CNG हाइब्रिड तकनीक देखने को मिल सकती है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को खास फायदा होगा.

2026 तक खेती की तस्वीर बदलने की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 तक भारत में CNG और CBG ट्रैक्टरों की संख्या तेजी से बढ़ेगी. इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं—कम ईंधन खर्च, पर्यावरण के लिए सुरक्षित संचालन और बेहतर प्रदर्शन. ये ट्रैक्टर न सिर्फ कार्बन उत्सर्जन को कम करेंगे, बल्कि खेती को आधुनिक और टिकाऊ भी बनाएंगे.

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