पाम ऑयल सस्ता होने के बावजूद घटा आयात, जानिए सोया और सूरजमुखी तेल का हाल

भारत में पाम ऑयल आयात घटने का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है. इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में भंडार बढ़ने की संभावना है, जिससे वहां के पाम ऑयल वायदा दामों पर दबाव बन सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 6 Jan, 2026 | 08:33 AM

palm oil import: दिसंबर के महीने में खाद्य तेल बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. सर्दियों की सुस्ती और उपभोक्ता मांग में आई कमी का सीधा असर पाम ऑयल के आयात पर पड़ा है. भारत, जो दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है, वहां दिसंबर 2025 में पाम ऑयल का आयात पिछले आठ महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि ठंड के मौसम और दूसरे विकल्पों की बढ़ती उपलब्धता ने पाम ऑयल की मांग को कमजोर कर दिया है.

आठ महीने के निचले स्तर पर पहुंचा पाम ऑयल आयात

डीलरों के अनुमान के मुताबिक दिसंबर में भारत का पाम ऑयल आयात महीने-दर-महीने करीब 20 प्रतिशत घटकर 5.07 लाख टन रह गया. यह आंकड़ा अप्रैल 2025 के बाद सबसे कम माना जा रहा है. आमतौर पर पाम ऑयल का इस्तेमाल देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन सर्दियों में इसकी खपत अपने आप कम हो जाती है. ठंडे मौसम में पाम ऑयल जमने लगता है, खासकर उत्तर भारत में, जिससे रसोई और खाद्य उद्योग में इसका उपयोग सीमित हो जाता है.

सोया और सूरजमुखी तेल की बढ़ी चमक

जहां पाम ऑयल का आयात घटा है, वहीं इसके विकल्प के तौर पर सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल की मांग तेजी से बढ़ी है. दिसंबर में सोया ऑयल का आयात करीब 37 प्रतिशत बढ़कर 5.08 लाख टन तक पहुंच गया. वहीं सूरजमुखी तेल का आयात तो दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 3.50 लाख टन हो गया, जो पिछले 17 महीनों का उच्च स्तर है. जानकारों के मुताबिक रिफाइनर और कारोबारी सर्दियों के मौसम को देखते हुए ऐसे तेलों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो ठंड में भी तरल बने रहते हैं.

कुल खाद्य तेल आयात में बढ़ोतरी

दिलचस्प बात यह है कि पाम ऑयल की गिरावट के बावजूद भारत का कुल खाद्य तेल आयात दिसंबर में बढ़ा है. आंकड़ों के अनुसार कुल खाद्य तेल आयात 19 प्रतिशत बढ़कर करीब 13.7 लाख टन तक पहुंच गया, जो तीन महीनों का उच्च स्तर है. इसका मुख्य कारण सोया और सूरजमुखी तेल की ज्यादा खरीद है. हालांकि, यह आंकड़े नेपाल से थल मार्ग के जरिए आने वाले शुल्क-मुक्त आयात को शामिल नहीं करते हैं.

घरेलू तेलों की उपलब्धता भी बनी वजह

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार घरेलू स्तर पर मूंगफली तेल, कपास बीज तेल और सोया ऑयल की उपलब्धता बेहतर रही है. इसी वजह से भी पाम ऑयल की मांग पर दबाव बना. गुजरात के राजकोट स्थित खाद्य तेल कारोबारी राजेश पटेल के अनुसार सर्दियों में उपभोक्ता आमतौर पर ऐसे तेल पसंद करते हैं, जो ठंड में जमते नहीं हैं. इसका सीधा फायदा सोया और सूरजमुखी तेल को मिला है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ेगा असर

भारत में पाम ऑयल आयात घटने का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है. इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में भंडार बढ़ने की संभावना है, जिससे वहां के पाम ऑयल वायदा दामों पर दबाव बन सकता है. वहीं अमेरिका के सोया ऑयल बाजार को इससे कुछ समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

तेल उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि जनवरी में हालात बदल सकते हैं. पाम ऑयल इस समय सोया और सूरजमुखी तेल के मुकाबले सस्ता हो रहा है, ऐसे में आने वाले महीने में इसकी खरीद फिर से बढ़ सकती है. हालांकि, सर्दियों के असर और उपभोक्ता रुझानों पर आगे की तस्वीर निर्भर करेगी. फिलहाल दिसंबर के आंकड़े यह साफ दिखाते हैं कि मौसम और विकल्पों की उपलब्धता खाद्य तेल बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा रही है.

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