कीमत और घटती मांग से दाल आयात में भारी कमी, FY26 में 35 प्रतिशत घटा खर्च

भारत में दालों के आयात बिल करीब 35 प्रतिशत घटकर 3.57 अरब डॉलर रह गया है. कम कीमतों और घटती मांग के कारण आयात की मात्रा भी घटी है. चना, पीली मटर और मसूर जैसी दालों की कीमतों में गिरावट से बाजार पर असर पड़ा है, वहीं पिछले साल का स्टॉक ज्यादा होने से नई खरीद भी कम हुई है.

नई दिल्ली | Published: 17 Apr, 2026 | 08:54 AM

pulses import FY26: भारत में दालों के आयात को लेकर इस साल एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. वित्त वर्ष 2025-26 में देश का दाल आयात बिल करीब 35 प्रतिशत तक घट गया है. यह गिरावट केवल आयात की मात्रा कम होने से ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दालों की कीमतों में आई कमी के कारण भी हुई है. इससे सरकार और बाजार दोनों को राहत मिली है.

आयात बिल में भारी कमी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में दालों का कुल आयात बिल घटकर 3.57 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल यह 5.44 अरब डॉलर था. यह गिरावट अपने आप में बड़ी है और दिखाती है कि इस साल भारत ने कम मात्रा में दालों का आयात किया.

अगर इसे भारतीय रुपये में देखें तो आयात मूल्य 31,793 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 46,427 करोड़ रुपये के मुकाबले 31.52 प्रतिशत कम है. यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि दालों की खरीद में इस साल काफी कमी आई है.

आयात की मात्रा भी घटी

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, ट्रेड से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 5.6 से 5.7 मिलियन टन दालों का आयात किया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 7.3 मिलियन टन तक पहुंच गया था.

इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के सचिव सतीश उपाध्याय के अनुसार, आयात की मात्रा कम होने और कीमतों में गिरावट दोनों ने मिलकर कुल आयात बिल को नीचे लाया है.

कीमतों में औसतन 10 प्रतिशत गिरावट

इस साल दालों की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली है. सतीश उपाध्याय के अनुसार, चना, पीली मटर, मसूर और अरहर जैसी प्रमुख दालों की कीमतों में औसतन 10 प्रतिशत की गिरावट आई है.

यह गिरावट उस समय हुई जब सरकार ने पीली मटर के आयात पर 30 प्रतिशत शुल्क भी लगाया था.

किन दालों का आयात सबसे ज्यादा घटा

एक्सपर्ट के अनुसार, इस साल चना का आयात करीब 50 प्रतिशत तक घट गया है. पिछले साल 1.4 से 1.5 मिलियन टन चना आयात हुआ था, लेकिन इस साल इसमें भारी कमी आई. इसी तरह पीली मटर और मसूर के आयात में भी गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि अरहर और उड़द (काली मटपे) को छोड़कर बाकी लगभग सभी दालों के आयात में कमी देखने को मिली.

ज्यादा स्टॉक भी बना कारण

आईग्रेन इंडिया के राहुल चौहान ने बिजनेस लाइन के बताया कि पिछले साल का स्टॉक ज्यादा होने के कारण भी इस साल आयात कम हुआ है. जब पहले से ही बाजार में दालों का पर्याप्त भंडार मौजूद था, तो नई खरीद की जरूरत कम पड़ गई. इससे आयात में स्वाभाविक गिरावट आई.

ऑस्ट्रेलिया से आयात धीमा

ऑस्ट्रेलिया, जो पिछले साल भारत को चना की बड़ी मात्रा में सप्लाई कर रहा था, इस साल भी उत्पादन अच्छा कर रहा है. लेकिन वहां के किसान 575 डॉलर प्रति टन से कम कीमत पर चना बेचने को तैयार नहीं हैं. इस वजह से भारत के लिए वहां से आयात करना महंगा पड़ रहा है और यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया से चना का आयात धीमा हो गया है.

आगे क्या असर पड़ सकता है?

दालों के आयात में आई यह गिरावट कई मायनों में सकारात्मक है, क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और घरेलू बाजार पर दबाव कम हुआ है. हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अगर भविष्य में घरेलू उत्पादन में कमी आती है, तो फिर से आयात बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है.

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