Explainer: कोर्ट के फैसले के बाद भारत-अमेरिका टैरिफ में क्या बदला, आसान भाषा में समझिए पूरा मामला
अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के व्यापक टैरिफ आदेश को रद्द कर दिया. इसके बाद व्हाइट हाउस ने 20 फरवरी को एक नई घोषणा जारी की. इसके तहत 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का अस्थायी आयात शुल्क लागू किया गया है.
India US tariff news: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े फैसले के बाद भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में नया मोड़ आया है. पहले जहां भारतीय सामानों पर अमेरिका में 25 प्रतिशत तक का अतिरिक्त टैरिफ लग रहा था, अब इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है. यह बदलाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई घोषणा के बाद हुआ है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इसका भारत के कारोबार, निर्यातकों और चल रही व्यापार वार्ता पर क्या असर पड़ेगा. आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.
टैरिफ क्या होता है और क्यों लगाया जाता है
टैरिफ दरअसल आयात शुल्क होता है. जब कोई देश दूसरे देश से सामान खरीदता है तो उस पर सरकार एक टैक्स लगाती है. इसे ही टैरिफ या कस्टम ड्यूटी कहते हैं. आमतौर पर यह टैक्स कंपनियां उपभोक्ताओं से वसूल करती हैं, जिससे सामान महंगा हो जाता है.
अमेरिका का कहना रहा है कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर ज्यादा शुल्क लगाता है, जिससे अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़ता है. इसी वजह से अमेरिका ने “रिसिप्रोकल टैरिफ” यानी बराबरी वाला शुल्क लगाने की नीति अपनाई.
रिसिप्रोकल टैरिफ क्या है
रिसिप्रोकल टैरिफ का मतलब है अगर कोई देश अमेरिकी सामान पर जितना शुल्क लगाएगा, अमेरिका भी उसी अनुपात में उस देश के सामान पर शुल्क लगाएगा. अप्रैल 2025 में ट्रंप प्रशासन ने करीब 60 देशों पर ऐसे टैरिफ लगाए थे, जिनमें भारत भी शामिल था.
पहले भारत पर 26 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क की घोषणा हुई. बाद में यह 25 प्रतिशत कर दिया गया. रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क भी लगाया गया था, जिससे कुल बोझ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया. हालांकि बाद में अस्थायी समझौते के तहत इसे घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या बदला
अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के व्यापक टैरिफ आदेश को रद्द कर दिया. इसके बाद व्हाइट हाउस ने 20 फरवरी को एक नई घोषणा जारी की. इसके तहत 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का अस्थायी आयात शुल्क लागू किया गया है.
इसका मतलब यह है कि अब भारत पर अलग से 25 प्रतिशत रिसिप्रोकल टैरिफ नहीं लगेगा. उसकी जगह 10 प्रतिशत का समान वैश्विक शुल्क लागू होगा. उदाहरण के लिए, अगर किसी भारतीय उत्पाद पर पहले 5 प्रतिशत एमएफएन ड्यूटी थी और उसके ऊपर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लग रहा था, तो अब कुल 30 प्रतिशत की जगह सिर्फ 15 प्रतिशत (5 + 10) शुल्क लगेगा.
व्यापार समझौते पर क्या असर
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है. 23 फरवरी 2026 से भारतीय टीम वाशिंगटन में अपने अमेरिकी समकक्षों से मिलेगी, ताकि पहले चरण के समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि समझौता अगले महीने साइन हो सकता है और अप्रैल से लागू हो सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि जब अमेरिका ने सभी देशों पर टैरिफ घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया है, तो भारत को भी अपने समझौते की शर्तों की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए. क्योंकि भारत ने पहले 18 प्रतिशत टैरिफ के आधार पर कुछ रियायतें देने की सहमति जताई थी.
किन उत्पादों पर नहीं लगेगा शुल्क
व्हाइट हाउस की जानकारी के अनुसार कुछ जरूरी वस्तुओं को इस अस्थायी शुल्क से छूट दी गई है. इनमें ऊर्जा उत्पाद, कुछ जरूरी खनिज, दवाएं और दवा सामग्री, कुछ कृषि उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और विमानन से जुड़े सामान शामिल हैं.
हालांकि स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर जैसे सेक्टरों पर 50 प्रतिशत का सेक्टोरल टैरिफ जारी रहेगा. कुछ ऑटो पार्ट्स पर 25 प्रतिशत शुल्क भी बना रहेगा.
भारत-अमेरिका व्यापार की स्थिति
अमेरिका 2021 से 2025 के बीच भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है. 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इसमें भारत का निर्यात 86.5 अरब डॉलर और आयात 45.3 अरब डॉलर रहा.
भारत को अमेरिका के साथ 41 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष मिला. सेवाओं के क्षेत्र में भी भारत को 3.2 अरब डॉलर का फायदा हुआ. कुल मिलाकर भारत का अमेरिका के साथ लगभग 44.4 अरब डॉलर का कुल अधिशेष रहा.
भारत अमेरिका को दवाएं, टेलीकॉम उपकरण, कीमती पत्थर, पेट्रोलियम उत्पाद, कपड़े और ऑटो पार्ट्स निर्यात करता है. वहीं अमेरिका से भारत कच्चा तेल, कोयला, हीरे, विमान के पार्ट्स और सोना आयात करता है.
निर्यातकों को राहत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से फिलहाल भारतीय निर्यातकों को राहत मिली है क्योंकि 25 प्रतिशत की जगह अब 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगेगा. इससे भारतीय सामान अमेरिका में सस्ता होगा और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी.
लेकिन यह व्यवस्था केवल 150 दिनों के लिए है. आगे क्या होगा, यह दोनों देशों की बातचीत और राजनीतिक फैसलों पर निर्भर करेगा. फिलहाल दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं.
कुल मिलाकर, यह फैसला भारत के लिए एक अवसर भी है और चुनौती भी. आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की दिशा काफी हद तक इसी बातचीत से तय होगी.