हल्दी बाजार में नए खिलाड़ियों की एंट्री, वियतनाम-अफ्रीका दे रहे भारत को टक्कर, जानिए कैसे

वियतनाम, म्यांमार और अफ्रीकी देशों ने पिछले कुछ वर्षों में हल्दी की खेती पर खास ध्यान देना शुरू किया है. इन देशों ने बेहतर बीज, आधुनिक खेती तकनीक और प्रोसेसिंग पर निवेश किया है. नतीजा यह है कि उनकी हल्दी न केवल कम नमी वाली होती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर भी खरी उतरती है.

नई दिल्ली | Updated On: 18 Dec, 2025 | 09:39 AM

Turmeric Export: भारतीय रसोई से लेकर आयुर्वेद और दवा उद्योग तक हल्दी की अहम भूमिका रही है. दुनिया में सबसे ज्यादा हल्दी का उत्पादन भारत करता है और लंबे समय तक वैश्विक बाजार में इसकी बादशाहत बनी रही. लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय हल्दी को वियतनाम, म्यांमार और अफ्रीकी देशों से कड़ी चुनौती मिल रही है. बढ़ती प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता से जुड़े सवालों ने निर्यातकों और किसानों दोनों की चिंता बढ़ा दी है.

गुणवत्ता के मोर्चे पर पिछड़ती भारतीय हल्दी

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय हल्दी की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं हैं. कई खेपों में नमी की मात्रा ज्यादा पाई जा रही है और कर्क्यूमिन कंटेंट भी अंतरराष्ट्रीय मानकों से कम रह जाता है. यही वजह है कि अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में भारतीय हल्दी को बार-बार अस्वीकृति का सामना करना पड़ रहा है. इन बाजारों में नियम बेहद सख्त हैं और थोड़ी सी चूक भी पूरे निर्यात को नुकसान पहुंचा सकती है.

प्रतिस्पर्धी देशों की आक्रामक रणनीति

वियतनाम, म्यांमार और अफ्रीकी देशों ने पिछले कुछ वर्षों में हल्दी की खेती पर खास ध्यान देना शुरू किया है. इन देशों ने बेहतर बीज, आधुनिक खेती तकनीक और प्रोसेसिंग पर निवेश किया है. नतीजा यह है कि उनकी हल्दी न केवल कम नमी वाली होती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर भी खरी उतरती है. यही कारण है कि वैश्विक खरीदार अब इन देशों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.

निर्यातकों की उम्मीद और शर्तें

राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय हल्दी की मांग अब भी बनी हुई है. खरीदार उतनी मात्रा लेने को तैयार हैं, जितनी भारत सप्लाई कर सके. लेकिन उनकी सबसे बड़ी शर्त गुणवत्ता है. अच्छी किस्म के बीज, गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज के तहत खेती और कीट नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीकों का पालन अब जरूरी हो गया है. केवल पारंपरिक तरीके से खेती करने से वैश्विक बाजार में टिके रहना मुश्किल होता जा रहा है.

वैज्ञानिक शोध और वैल्यू एडिशन पर जोर

हल्दी को सिर्फ कच्चे मसाले के रूप में बेचने का दौर अब पीछे छूट रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि हल्दी के औषधीय और औद्योगिक उपयोगों पर वैज्ञानिक अध्ययन बढ़ाने की जरूरत है. अगर हल्दी से जुड़े हाई-वैल्यू प्रोडक्ट, जैसे कर्क्यूमिन एक्सट्रैक्ट, सप्लीमेंट्स और प्रोसेस्ड उत्पाद तैयार किए जाएं, तो किसानों और निर्यातकों दोनों को बेहतर दाम मिल सकते हैं.

तेलंगाना और अन्य राज्यों की भूमिका

तेलंगाना जैसे राज्य वैश्विक हल्दी उत्पादन में बड़ी भूमिका निभाते हैं. यहां के प्रमुख बाजारों में किसानों को गुणवत्ता सुधार, सही सुखाने की तकनीक और प्रोसेसिंग की जानकारी दी जाए, तो भारतीय हल्दी की स्थिति मजबूत हो सकती है. इसके साथ ही अन्य उत्पादक राज्यों में भी एक समान रणनीति अपनाने की जरूरत है.

Published: 18 Dec, 2025 | 09:38 AM

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