जंग का देखने लगा असर, अंडा निर्यात में 85 फीसदी तक गिरावट.. बढ़ गया शिपिंग खर्च
माल ढुलाई की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है. पहले जो खर्च लगभग 1,800 डॉलर था, वह अब बढ़कर करीब 9,500 डॉलर तक पहुंच गया है. शिपिंग कंपनियां इसका कारण ‘वार रिस्क चार्ज’ यानी युद्ध जैसी स्थिति से जुड़े जोखिम को बता रही हैं. इसके साथ ही जहाजों की उपलब्धता भी कम हो गई है.
Egg Export: खाड़ी देशों में चल रहे संघर्ष का असर अब तमिलनाडु के नमक्कल में पोल्ट्री निर्यात पर भी दिखने लगा है. माल ढुलाई की लागत बढ़ने और शिपिंग रूट में दिक्कतों के कारण निर्यात में 85 फीसदी तक गिरावट आई है. उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, जहाजों की उपलब्धता कम हो गई है और युद्ध के खतरे की वजह से अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है. इससे पिछले कुछ हफ्तों में निर्यात काफी धीमा हो गया है और व्यापारियों को अपनी शिपमेंट कम करनी पड़ रही है.
ऑल इंडिया पोल्ट्री प्रोडक्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव वल्सन परमेश्वरन ने ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि पहले रोजाना लगभग 20 कंटेनर भेजे जाते थे, लेकिन अब यह घटकर सिर्फ 3 कंटेनर रह गया है. उन्होंने कहा कि इस गिरावट से पूरे पोल्ट्री निर्यात कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है. उन्होंने बताया कि फरवरी के अंत में जब तनाव बढ़ गया था, तब भेजा गया एक शिपमेंट कई दिनों तक समुद्र में फंसा रहा. इससे निर्यातकों में अपने माल की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई थी.
इसके बाद एसोसिएशन और APEDA (एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी) ने मिलकर लगातार कोशिश की और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों से बातचीत की. इसके बाद आखिरकार कंटेनर पिछले हफ्ते अपने गंतव्य तक पहुंच पाए. उन्होंने कहा कि इससे थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन अभी भी निर्यात बहुत सीमित मात्रा में ही हो रहा है.
बढ़ गई निर्यात लागत
माल ढुलाई की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है. पहले जो खर्च लगभग 1,800 डॉलर था, वह अब बढ़कर करीब 9,500 डॉलर तक पहुंच गया है. शिपिंग कंपनियां इसका कारण ‘वार रिस्क चार्ज’ यानी युद्ध जैसी स्थिति से जुड़े जोखिम को बता रही हैं. इसके साथ ही जहाजों की उपलब्धता भी कम हो गई है और कई शिपिंग कंपनियां जोखिम की वजह से नियमित रूप से काम करने से बच रही हैं. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं माल फिर से बीच रास्ते में न फंस जाए, और यही अनिश्चितता निर्यातकों और शिपिंग कंपनियों दोनों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन गई है.
अब तुर्की से मंगा रहे अंडा
माल ढुलाई (फ्रेट) महंगा होने की वजह से विदेशी खरीदार भी भारत से व्यापार करने में हिचकिचा रहे हैं. अब वे तुर्की जैसे नजदीकी देशों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां माल भेजना आसान, तेज और कम खर्चीला है. फिलहाल भारत से केवल कुछ चुनिंदा देशों, जैसे ओमान, को ही सीमित मात्रा में निर्यात हो रहा है. अधिकारियों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो निर्यातकों को कुछ समय के लिए घरेलू बाजार पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है. इस बीच APEDA शिपिंग कंपनियों, बंदरगाह अधिकारियों, दूतावासों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है. साथ ही उसने उद्योग को राहत देने के लिए माल ढुलाई शुल्क कम करने की भी अपील की है.
अंडा उत्पादन में गिरावट
तमिलनाडु पोल्ट्री फार्मर्स एसोसिएशन के सचिव के. सुंदरराजन ने कहा कि निर्यात में गिरावट से उद्योग पर असर जरूर पड़ा है, लेकिन गर्मी के मौसम में उत्पादन कम होने की वजह से किसानों को अभी पूरा नुकसान महसूस नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि नमक्कल में अंडा उत्पादन करीब 15 फीसदी घट गया है, जिससे रोजाना लगभग 1 करोड़ अंडों की कमी आई है. इसी वजह से कीमतों को कुछ हद तक स्थिर रखने में मदद मिली है.
अंडा की कीमतों में बढ़ोतरी
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा मछली पकड़ने पर लगे प्रतिबंध के कारण अंडों की खपत बढ़ने की संभावना है, जिससे घरेलू बाजार में मांग को सहारा मिल सकता है. उन्होंने कहा कि निर्यात धीमा होने से मार्च के अंत में अंडों की कीमत गिरकर करीब 3.85 रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन अब सुधार हुआ है और पिछले 10 दिनों से कीमत लगभग 5.10 रुपये प्रति अंडा बनी हुई है. हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो कीमतें लंबे समय तक स्थिर नहीं रह पाएंगी.