जल्द पड़ेगी महंगाई की मार! गर्मी में भी अंडा हुआ महंगा, एक हफ्ते से लगातार बढ़ रही हैं कीमतें

कर्नाटक के मंगलुरु में अंडों की कीमतें गर्मी के बावजूद बढ़ रही हैं. उत्पादन में 20-30 फीसदी कमी और गल्फ देशों को निर्यात दोबारा शुरू होने से दाम चढ़े हैं. कमजोर स्थानीय मांग के बावजूद थोक भाव 6.20 और खुदरा 7 रुपये प्रति अंडा पहुंच गया है, जिससे घरेलू बजट प्रभावित हुआ है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 26 Apr, 2026 | 12:08 PM

Egg Price Hike: गर्मी के मौसम में अमूमन अंडा सस्ता हो जाता है. लेकिन कर्नाटक में अंडे की कीमतें कम होने के बजाए बढ़ती ही जा रही हैं. इससे रिटेल मार्केट में अंडा महंगा हो गया है. खासकर मंगलुरु में पिछले एक हफ्ते से अंडों की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है. शुक्रवार को मंगलुरु में थोक में अंडे की कीमत 6.20 रुपये प्रति अंडा रही. जबकि, खुदरा में रेट 7 रुपये प्रति अंडा रहा. ऐसे में आम जनता के किचन का बजट बिगड़ गया है.

हालांकि, इससे पहले मार्च में पश्चिम एशिया संकट  की वजह से कीमतों में तेज गिरावट आई थी, लेकिन अब बाजार फिर से सुधर रहा है. मार्च के दूसरे हफ्ते में यह कीमत गिरकर करीब 5.40 रुपये (थोक) तक पहुंच गई थी, क्योंकि गल्फ देशों को होने वाला निर्यात अचानक प्रभावित हो गया था. गल्फ क्षेत्र कर्नाटक और आसपास के राज्यों के अंडों का एक बड़ा निर्यात बाजार है. हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि स्थानीय मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है, जिससे कीमतों पर असर पड़ रहा है.

कीमतों में गिरावट से इस सेक्टर को काफी नुकसान

सप्लायर्स के अनुसार, अंडों की कीमतों में अब सुधार इसलिए हो रहा है, क्योंकि भीषण गर्मी की वजह से उत्पादन में 20 फीसदी से 30 फीसदी तक कमी आई है. इसके साथ ही, पश्चिम एशिया संकट के दौरान रुका हुआ गल्फ और अन्य देशों को होने वाला निर्यात अब धीरे-धीरे फिर से शुरू हो गया है. नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी के जोनल चेयरमैन एमपी सतीश बाबू ने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा कि बाजार पहले आई भारी गिरावट से धीरे-धीरे उबर रहा है. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान कीमतों में गिरावट से इस सेक्टर को काफी नुकसान हुआ था.

अंडा उत्पादन में 20 फीसदी तक कमी

हालांकि, अब दाम बेहतर हो रहे हैं, लेकिन स्थानीय मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है. क्षेत्र में उत्पादन लगभग 20 फीसदी कम हुआ है, जबकि निर्यात फिलहाल करीब 50 फीसदी क्षमता पर ही शुरू हो पाया है. संकट से पहले इस क्षेत्र से रोजाना करीब 80 लाख से 1 करोड़ अंडों का निर्यात गल्फ देशों में होता था. लेकिन अब केवल कुछ ही गल्फ देशों में सीमित मात्रा में ही सप्लाई फिर से शुरू हो पाई है. इसके साथ ही निर्यातकों को अब पहले की तुलना में लगभग दोगुना फ्रेट (ढुलाई) खर्च भी देना पड़ रहा है. कुछ राज्यों में चुनाव से जुड़ी मांग ने हाल के दिनों में बाजार को थोड़ा सहारा दिया है.

स्थानीय मार्केट में अंडी की मांग कमजोर

डीके कन्नड़ एग सप्लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अल्विन पिंटो ने कहा कि गर्मी के कारण अंडों की खपत  कम हो गई है. एलपीजी संकट की वजह से कई ढाबे और छोटे रेस्टोरेंट बंद हो गए हैं या उन्होंने अपना मेन्यू छोटा कर दिया है, जिससे मांग और भी घट गई है. उडुपी में सप्लाई भी काफी कम हो गई है. पहले जहां रोज करीब 350 ट्रे अंडे जाते थे, अब यह घटकर सिर्फ 150 ट्रे रह गया है. इसके अलावा मिड-डे मील कार्यक्रम के लिए अंडों की सप्लाई न होने से भी स्थानीय बाजार में मांग कमजोर बनी हुई है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 26 Apr, 2026 | 12:07 PM
ज्ञान का सम्मान क्विज

केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी कितने रुपये तय किया है?

सवाल का दीजिए सही जवाब और जीतिए ₹1000 का इनाम! 🏆
पिछले Quiz का सही जवाब
पुंगनूर नस्ल
विजेताओं के नाम
सुभाष चंद्र गुप्ता- किसनपुर, अमेठी, उत्तर प्रदेश

लेटेस्ट न्यूज़