तोतापुरी आम के दाम धड़ाम, 3 रुपये किलो रेट.. किसान नहीं निकाल पा रहे लागत
कर्नाटक में तोतापुरी आम की कीमत गिरकर 3 रुपये प्रति किलो रह गई है, जिससे किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं. कम मांग और अधिक आवक के कारण बाजार में भाव टूट गए हैं. किसान सरकारी खरीद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जबकि 12 हजार से ज्यादा किसान पहले ही समर्थन मूल्य योजना के लिए पंजीकरण करा चुके हैं.
Karnataka Mango Farmers: कर्नाटक में तोतापुरी आम की कीमतों में भारी गिरावट से किसान परेशान हैं. कृषि उपज मंडी समिति (APMC) की मंडियों में बड़ी संख्या में किसान अपनी फसल लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें बहुत कम दाम मिल रहे हैं. हालात यह हैं कि तोतापुरी आम का भाव 4.37 रुपये प्रति किलो से गिरकर सिर्फ 3 रुपये प्रति किलो रह गया है. ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. वे लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं.
कोलार मैंगो ग्रोअर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष नीलातुर चिन्नप्पा रेड्डी ने द हिन्दू से कहा कि आम की खेती करने वाले किसानों के पास दूसरी फसल उगाने का विकल्प नहीं होता. एक बार आम के पेड़ लगाने के बाद उन्हें हटाकर दूसरी फसल नहीं लगाई जा सकती. ऐसे में कीमतें गिरने का सबसे ज्यादा नुकसान आम किसानों को उठाना पड़ता है. इसी बीच, पिछले सप्ताह सहकारिता विभाग ने केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को पत्र लिखकर प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट स्कीम (PDPS) के तहत तोतापुरी आम की सरकारी खरीद 1.30 लाख टन से बढ़ाकर 5.20 लाख टन करने की मांग की थी. हालांकि, अब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है.
12,000 से अधिक किसान पंजीकरण करा चुके हैं
फिलहाल 12,000 से अधिक किसान समर्थन मूल्य का लाभ लेने के लिए पंजीकरण करा चुके हैं. वहीं, बागवानी विभाग का कहना है कि यदि सरकार खरीद की सीमा बढ़ाती है तो करीब 4,000 और किसान भी इस योजना के तहत पंजीकरण करा सकते हैं. कोलार कृषि उपज मंडी समिति (APMC) के सचिव टी.एस. रवि कुमार ने कहा कि बाजार में तोतापुरी आम की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अधिक आवक और कम मांग है. उन्होंने कहा कि 2024 में तोतापुरी आम 20 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, लेकिन अब इसकी कीमत घटकर 3 से 4 रुपये प्रति किलो रह गई है.
तापुरी आम का इस्तेमाल पल्प बनाने वाली फैक्ट्रियों में होता है
उन्होंने कहा कि कोलार में पैदा होने वाले अधिकांश तोतापुरी आम का इस्तेमाल पल्प बनाने वाली फैक्ट्रियों में होता है. इसी पल्प से बाद में जूस और अन्य पेय पदार्थ तैयार किए जाते हैं. लेकिन इस समय फैक्ट्रियों में भी मांग कमजोर है. कोलार जिले के श्रीनिवासपुर के किसान रमेश बाबू ने कहा कि उन्होंने करीब दो एकड़ में तोतापुरी आम की खेती की थी और 8 टन उत्पादन हुआ. वह सरकारी समर्थन मूल्य पर आम बेचने के लिए एपीएमसी मंडी पहुंचे, लेकिन जब तक उनका नंबर आया, तब तक सरकारी खरीद की तय सीमा पूरी हो चुकी थी.
रमेश बाबू ने कहा कि बागवानी विभाग के अधिकारियों ने उन्हें टोकन देकर इंतजार करने को कहा है. अधिकारियों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार खरीद की सीमा बढ़ाती है, तो किसानों से और आम खरीदे जाएंगे. फिलहाल उन्होंने आम को घर के एक बड़े कमरे में रख दिया है. यदि सरकार ने जल्द कोई फैसला नहीं लिया, तो उन्हें मजबूरी में मंडी में जो भी कीमत मिलेगी, उसी पर आम बेचना पड़ेगा.
2023 में तोतापुरी आम 70 रुपये किलो तक खरीदा गया
कोलार जिले में आम का पल्प बनाने वाली एक फैक्ट्री के मालिक के. सूर्य चंद्र राव ने कहा कि 2022 और 2023 में तोतापुरी आम 50 से 70 रुपये प्रति किलो तक खरीदा जाता था. लेकिन पिछले दो वर्षों से इसकी कीमतों में लगातार गिरावट आई है. उन्होंने कहा कि इसकी सबसे बड़ी वजह बाजार में आम के जूस की मांग कम होना है. अब लोग दूसरे फलों के फ्लेवर वाले पेय पदार्थ ज्यादा खरीद रहे हैं. वहीं, पिछले कुछ वर्षों में आम के जूस की बोतलों की कीमत भी नहीं बढ़ी है, जिससे प्रोसेसिंग कंपनियों का मुनाफा कम हुआ है.