Vegetable Price Hike: पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ने का असर अब आम लोगों की रसोई पर भी दिखने लगा है. ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से देशभर में फल और सब्जियां महंगी हो रही हैं. दिल्ली से लेकर बिहार और महाराष्ट्र तक बाजारों में कीमतें बढ़ गई हैं. दिल्ली में सेब 200 रुपये से बढ़कर 240 रुपये किलो हो गया है, जबकि बिहार में केले के दाम भी बढ़ गए हैं. मुंबई के थोक बाजारों में महंगाई का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है, जहां फल और सब्जियों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं.
मुंबई के क्रॉफर्ड मार्केट के विक्रेताओं का कहना है कि ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने और पश्चिम एशिया संकट की वजह से आयात में हो रही दिक्कतों के कारण व्यापारियों और ग्राहकों दोनों पर दबाव बढ़ गया है. ताजा बढ़ोतरी के बाद मुंबई में पेट्रोल की कीमत 91 पैसे बढ़कर 107.59 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल 94 पैसे महंगा होकर 94.08 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. इससे फलों के रेट पर भी असर पड़ा है. एक लीची बेचने वाले विक्रेता ने कहा कि जो लीची 250 रुपये किलो में बिकनी चाहिए थी, वह अब 350 रुपये में बिक रही है. उन्होंने कहा कि कीमत बढ़ने से ग्राहक भी कम हो गए हैं, जिससे बिक्री प्रभावित हो रही है.
अनार और एवोकाडो महंगे हो गए
विक्रेता के मुताबिक उन्हें अब पहले की तरह कमाई नहीं हो पा रही है और यह उनके लिए बड़ी समस्या बन गई है. कुछ अन्य फल विक्रेताओं ने यह भी बताया कि अनार और एवोकाडो के दाम भी काफी महंगे हो गए हैं. वहीं, एक आम विक्रेता ने बताया कि सप्लाई में रुकावट और ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने की वजह से स्थानीय बाजार में आम के दाम सीधे प्रभावित हो रहे हैं.
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170 रुपये प्रति किलो माल ढुलाई
विक्रेता के अनुसार, आम वाशी से आता है, लेकिन अब ढुलाई महंगी होने के कारण यह पहले से ज्यादा महंगा हो गया है. उन्होंने कहा कि माल की कमी भी हो रही है और इसी वजह से कीमतें बढ़ गई हैं. महात्मा ज्योतिबा फुले मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष निल कराले ने ‘द फ्री प्रेस जर्नल’ को बताया कि माल ढुलाई (फ्रेट) खर्च बढ़कर करीब 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जिससे लॉजिस्टिक्स काफी महंगा हो गया है. उन्होंने यह भी कहा कि फ्लाइट सेवाएं अब भरोसेमंद नहीं रही हैं और बार-बार रद्द होने से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है.
लागत 20 फीसदी तक बढ़ गई
कराले ने कहा कि इस साल उन्हें युद्ध की वजह से लगभग 1 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. उनके मुताबिक उड़ानों का शेड्यूल ठीक नहीं है और कैंसिलेशन की वजह से जल्दी खराब होने वाले (पेरिशेबल) सामान के कारोबार पर बड़ा असर पड़ रहा है. उन्होंने आगे बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने से देशी और विदेशी बाजार दोनों में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है. लागत करीब 20 फीसदी तक बढ़ गई है, जबकि मुनाफा सिर्फ 10- 15 फीसदी ही रह गया है. ऐसे में यह कारोबार अब सिर्फ ब्रेक-ईवन (ना फायदा, ना नुकसान) की स्थिति में चल रहा है. आम की कीमतों पर उन्होंने कहा कि मुंबई में ज्यादातर आम कोंकण क्षेत्र से आते हैं, लेकिन इस साल हर बाजार में दाम ऊंचे बने हुए हैं, जिससे ग्राहकों और व्यापारियों दोनों पर असर पड़ रहा है.