किसानों के पास अभी भी पड़ा है 25 फीसदी कपास, 27 फरवरी को बंद हो गई खरीदी तो कम हो जाएगा रेट!
निजी बाजार में घाटा देख किसानों ने CCI में पंजीकरण कराया, जहां भाव 8,100 रुपये प्रति क्विंटल तय था. लेकिन सख्त नियमों और प्रक्रियात्मक दिक्कतों के कारण कई किसानों को फिर निजी व्यापारियों को ही कपास बेचनी पड़ी. कई किसानों को स्लॉट बुक करने के बाद भी पुष्टि नहीं मिली है.
Maharashtra News: महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में करीब 25 फीसदी कपास अभी भी किसानों और व्यापारियों के पास पड़ी हुई है. 27 फरवरी के बाद अगर कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) खरीद बंद कर देता है तो कीमतों में गिरावट की आशंका बढ़ गई है. बेहतर दाम पाने के लिए हजारों किसानों ने CCI में पंजीकरण कर स्लॉट बुक किए थे. अब तक जिले में CCI ने 15,74,462.4 क्विंटल कपास खरीदी है, लेकिन बड़ी मात्रा में फसल अभी भी बिना बिके पड़ी है. खरीद की आखिरी तारीख में सिर्फ एक हफ्ता बचा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यवतमाल पारंपरिक रूप से कपास उत्पादन का बड़ा जिला रहा है. इस साल यहां करीब पांच लाख हेक्टेयर में कपास की खेती की गई. 2024-25 सीजन में भारी नुकसान झेलने के बाद कई किसान आर्थिक रूप से टूट गए थे और उनके पास अगली फसल के लिए पूंजी भी नहीं बची थी. फिर भी खेत खाली न छोड़ने के लिए उन्होंने ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेकर खेती जारी रखी. लेकिन खरीफ 2025 में अत्यधिक बारिश के कारण हजारों हेक्टेयर में कपास की फसल बर्बाद हो गई. इससे जिले के कई इलाकों में कपास की पैदावार काफी कम हो गई. जो कपास आमतौर पर दशहरे तक मंडी पहुंच जाती थी, वह इस बार दिवाली के आसपास किसानों के घर पहुंची. मजबूरी में कई किसानों ने अपनी उपज निजी व्यापारियों को 7,200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेची, जिससे उन्हें प्रति क्विंटल करीब 800 रुपये का नुकसान हुआ.
निजी बाजार में घाटा देख किसानों ने CCI में पंजीकरण कराया
वहीं, निजी बाजार में घाटा देख किसानों ने CCI में पंजीकरण कराया, जहां भाव 8,100 रुपये प्रति क्विंटल तय था. लेकिन सख्त नियमों और प्रक्रियात्मक दिक्कतों के कारण कई किसानों को फिर निजी व्यापारियों को ही कपास बेचनी पड़ी. कई किसानों को स्लॉट बुक करने के बाद भी पुष्टि नहीं मिली है. खरीद बंद होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं, जिससे किसानों को डर है कि CCI बाकी स्टॉक समय पर नहीं खरीद पाएगी. अगर खरीद रुक गई तो उन्हें फिर कम दाम पर बेचना पड़ेगा और कपास के दाम गिर सकते हैं. किसान यूनियन नेता बाला निवाल ने कहा कि बेमौसम बारिश देर तक जारी रही और कुछ इलाकों में अभी भी तुड़ाई चल रही है. उन्होंने किसानों को राहत देने के लिए CCI की खरीद अवधि बढ़ाने की मांग की है.
तेलंगाना में CCI ने कपास खरीदी की समय सीमा बढ़ाई
वहीं, कल खबर सामने आई थी कि तेलंगाना में कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने राज्य सरकार के अनुरोध पर कपास की खरीद की अवधि महीने के अंत तक बढ़ाने का फैसला किया है. कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने कहा कि अब तक CCI ने 8.8 लाख से अधिक किसानों से 16.15 लाख टन कपास खरीदी है, जिसकी कीमत 12,823 रुपये करोड़ है. उन्होंने कहा कि चौथी तुड़ाई (पिकिंग) अभी जारी है, इसलिए उन्होंने केंद्रीय कपड़ा मंत्री, CCI और राज्य के दो केंद्रीय मंत्रियों जी. किशन रेड्डी और बंदी संजय कुमार को खरीद की तारीख बढ़ाने के लिए पत्र लिखा था.
2.24 लाख टन कम गुणवत्ता वाली कपास भी खरीदी गई
मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे बढ़ी हुई समय-सीमा का लाभ उठाएं और उचित औसत गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए 8,110 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी कपास CCI को बेचें. उन्होंने यह भी कहा कि बाजार में किसानों से 2.24 लाख टन कम गुणवत्ता वाली कपास भी खरीदी गई है, जबकि अभी 9.99 लाख टन कपास का स्टॉक किसानों के पास मौजूद है. बता दें कि तेलंगाना भारत के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में से एक है. खरीफ 2025 में राज्य में 20 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की खेती होने का अनुमान था, जिससे यह देश के शीर्ष उत्पादकों में शामिल है.