Mandi bhav: 89999 रुपये क्विंटल हुई मिर्च, जल्द ही एक लाख रुपये के पार पहुंचने की है उम्मीद

बायडगी मिर्च का उपयोग नेल पॉलिश और अन्य कॉस्मेटिक उत्पादों में प्राकृतिक रंग के रूप में भी किया जाता है, इसलिए इसकी बढ़ती कीमतों का असर सौंदर्य उत्पादों पर भी पड़ सकता है. आमतौर पर मिर्च के दाम गुणवत्ता के अनुसार 35,000 से 50,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहते हैं, लेकिन इस बार कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं.

नोएडा | Updated On: 20 Feb, 2026 | 01:10 PM

Karnataka News: कर्नाटक में बायडगी मिर्च की कीमत 80,000 रुपये क्विंटल के पार पहुंच गई है. इससे किसानों की अच्छी कमाई हो रही है. लेकिन अन्नदाताओं को उम्मीद है कि मिर्च की कीमतों में अभी और बढ़ोतरी हो सकती है. जल्द ही कीमतें एक लाख रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच सकती हैं. खासकर गडग जिले में मिर्च किसानों को उम्मीद है कि बायडगी मिर्च की कीमत जल्द ही 1 लाख रुपये प्रति क्विंटल पार कर जाएगी. हालांकि, इस हफ्ते रोन के किसान विजयकुमार सज्जनार को अपनी फसल के लिए 89,999 रुपये प्रति क्विंटल का रिकॉर्ड भाव मिला, जो पहले लक्कुंडी के किसान को मिले 74,099 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा है. बायडगी मिर्च गडग के अलावा धारवाड़ और हावेरी जिलों में भी उगाई जाती है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, विजयकुमार ने खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें इतनी बड़ी कीमत की उम्मीद नहीं थी, लेकिन उनकी फसल पूरी तरह जैविक (ऑर्गेनिक) होने के कारण उन्हें अच्छे दाम मिलने का भरोसा था. इस उपलब्धि से सभी किसान उत्साहित हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही कीमत 1 लाख रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच जाएगी. बई, हैदराबाद और देश के कई हिस्सों से एजेंट बड़ी मात्रा में बायडगी मिर्च खरीदते हैं, जिसे मिर्च पाउडर  बनाने वाली कंपनियों को सप्लाई किया जाता है. कीमतों में इस ऐतिहासिक बढ़ोतरी से किसान बेहद खुश हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि भाव जल्द ही एक लाख रुपये प्रति क्विंटल पार कर जाएगा. कई किसानों ने इस रिकॉर्ड पर मिठाई बांटकर जश्न भी मनाया.

कॉस्मेटिक उत्पादों में होता है मिर्च का इस्तेमाल

बायडगी मिर्च का उपयोग नेल पॉलिश और अन्य कॉस्मेटिक उत्पादों  में प्राकृतिक रंग के रूप में भी किया जाता है, इसलिए इसकी बढ़ती कीमतों का असर सौंदर्य उत्पादों पर भी पड़ सकता है. आमतौर पर मिर्च के दाम गुणवत्ता के अनुसार 35,000 से 50,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहते हैं, लेकिन इस बार कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. जनवरी 2023 में कोटुमचागी के किसान शरणप्पा को 70,499 रुपये मिले थे. पिछले हफ्ते लक्कुंडी के चंद्रु को 74,099 रुपये प्रति क्विंटल मिले और अब विजयकुमार को 89,999 रुपये का अब तक का सबसे ऊंचा भाव मिला है.

वहीं, विजयपुरा जिले में प्याज किसानों की हालत खराब है. खुले बाजार में दाम गिरकर करीब 800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं, जो लागत से भी कम हैं. इससे किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे. पिछले मॉनसून में ज्यादा बारिश और बाढ़ के कारण फसल को भारी नुकसान हुआ था, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

31,000 हेक्टेयर में लगी प्याज की फसल नष्ट

यह जिला चित्रदुर्ग के बाद राज्य के सबसे बड़े प्याज उत्पादक  क्षेत्रों में से एक है. खासकर बसवाना बागेवाड़ी और कोल्हार तालुक में बड़े पैमाने पर खेती होती है. भारी बारिश और बाढ़ से मानसून की 80 फीसदी से ज्यादा फसल खराब हो गई. किसानों को उम्मीद थी कि सूखी और सर्दियों की फसल से नुकसान की भरपाई हो जाएगी, लेकिन गिरते दामों ने उम्मीद तोड़ दी. अनुमान के मुताबिक, मॉनसून के दौरान करीब 31,000 हेक्टेयर में लगी प्याज की फसल नष्ट हुई. सर्दियों में लगभग 23,000 हेक्टेयर में खेती की गई, जबकि गर्मी की फसल के लिए करीब 25,000 हेक्टेयर में बुवाई की तैयारी है.

Published: 20 Feb, 2026 | 01:03 PM

Topics: