विदेशियों की जुबान को भाया मालदा आम, 7 दिन में चट कर गए 10 टन मैंगो, 100 टन निर्यात का अनुमान

Mango Export Rises: कृषि अधिकारियों ने बताया कि लगभग 7 टन आम पश्चिमी एशियाई देशों और 3 टन इटली के मिलान शहर को भेजा जा चुका है. 7 दिनों के दौरान कुल 10 टन मालदा आम निर्यात किया जा चुका है और डिमांड में अभी भी तेजी देखी जा रही है. ऐसे में जुलाई के दौरान 100 टन निर्यात का आंकड़ा पार होने का अनुमान है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 1 Jul, 2026 | 08:04 PM

विदेशी बाजारों में बंगाल के मालदा आम की खूब डिमांड बढ़ी है. पश्चिम एशियाई और इटली के लोगों को मालदा आम का स्वाद इस कदर पसंद आया है कि 7 दिन में निर्यात 10 टन पर पहुंच गया है. मालदा आम को जीआई टैग हासिल है और यह प्रीमियम किस्म का आम स्वाद में बेहद मीठा, रसीला और गूदे से भरा होता है. इसकी खुशबू दूर से ही अपनी मौजूदगी बता देती है. अधिकारियों ने कहा कि एक सप्ताह में मालदा आम का निर्यात 10 टन के आंकड़े को पार कर गया है और डिमांड में देखी जा रही तेजी बताती है कि 100 टन निर्यात आंकड़ा इस सीजन पार हो जाएगा.

बढ़ती वैश्विक मांग के चलते 100 टन आम निर्यात की उम्मीद

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले ने पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 टन प्रीमियम किस्म के आम का निर्यात किया है और इस सीजन में निर्यात खेप के 100 टन का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है. मूलरूप से बंगाल के मालदा जिले में सर्वाधिक पैदावार के चलते इसे मालदा आम (Malda mango) कहा जाता है और इसे जीआई टैग हासिल है. बिहार में इसे दूधिया मालदा (Dudhiya Malda) के नाम से भी जाना जाता है, भारत के सबसे बेहतरीन और रसीले आमों में से एक है. अपनी पतली त्वचा, छोटे बीज (गुठली), भरपूर मीठे गूदे और खास सुगंध के लिए इसे आमों का राजा भी कहा जाता है.

पश्चिम एशिया और इटली के लोगों की जुबान पर चढ़ा आम

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (ICAR-CISH) कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के प्रमुख दुष्यंत राघव ने पीटीआई को बताया लगभग 7 टन आम पहले ही पश्चिमी एशियाई देशों और 3 टन इटली के मिलान शहर को भेजे जा चुके हैं. 7 दिनों के दौरान कुल 10 टन मालदा आम निर्यात किया जा चुका है और डिमांड में अभी भी तेजी देखी जा रही है. दुष्यंत राघव ने कहा कि अब तक ‘आम्रपाली’ आम निर्यात किए गया है. हमें अगले महीने में ‘वृंदावनी’, ‘फजली’ और ‘अश्विना’ किस्मों सहित 100 टन और निर्यात खेप भेजने की उम्मीद है. आने वाले दिनों में कई देशों से प्रीमियम मालदा आम खरीदने की उम्मीद है.

विदेशी मांग बढ़ने से घरेलू किसानों को बढ़िया कीमतें मिल रहीं

कृषि वैज्ञानिक दुष्यंत राघव ने कहा कि विदेशों से मांग बढ़ने के बाद किसानों को घरेलू बाजार में बेहतर दाम मिल रहे हैं. बागवानी केंद्र के उप निदेशक सामंत लायक ने कहा कि निर्यात के लिए जीएपी मानकों को पूरा करके उगाए जाने वाले आम के बागों से पहले ही लगभग 10 टन आम निर्यात किए जा चुके हैं और अगले महीने के लिए काफी ज्यादा मात्रा उपज तैयार है. विदेशी डिमांड को देखते हुए इस सीजन 100 टन निर्यात का अनुमान है.

मालदा के अलावा आम्रपाली और लखनभोग की डिमांड

विदेशी बाजारों के लिए निर्यात किए गए आम किस्मों में मालदा आम के साथ ही आम्रपाली, लखनभोग आम समेत अन्य बेस्ट क्वालिटी वाले आमों की खेप शामिल थी. अधिकारियों ने बताया कि इस निर्यात पहल को आईसीएआर-सीआईएसएच केवीके (मालदा), जिला प्रशासन, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात संवर्धन प्राधिकरण, जिला बागवानी कार्यालय और मालदा मैंगो मर्चेंट चैंबर ऑफ कॉमर्स ने मिलकर आगे बढ़ाया है. इन सभी ने मिलकर अच्छी क्वालिटी के उत्पादन, प्रमाणपत्र, लॉजिस्टिक और बाजार तक पहुंचने की व्यवस्था की है.

आम निर्यात क्षमता बढ़ी पर हिमसागर और लंगड़ा के शौकीन कम हुए

अधिकारियों ने कहा कि इस पहल से मालदा आम के निर्यात की क्षमता बढ़ी है. किसानों के लिए बाजार का दायरा बढ़ा है और अंतरराष्ट्रीय बिक्री से उनकी आमदनी में सुधार हुआ है. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस सत्र में ‘हिमसागर’ और ‘लंगड़ा’ जैसी मालदा की मशहूर किस्मों का निर्यात नहीं हो सका, क्योंकि मौसम की वजह से ये निर्यात के लिए जरूरी गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर पाईं.

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