ग्वार कोरमा फ्यूचर्स ट्रेडिंग की शुरुआत 24 जुलाई से, NCDEX के फैसले से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
Guar Korma Futures: ग्वार किसानों और कारोबारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. NCDEX 24 जुलाई 2026 से पहली बार ग्वार कोरमा फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट शुरू करने जा रहा है. इससे किसानों, प्रोसेसर और निर्यातकों को कीमतों में उतार-चढ़ाव के जोखिम से बचने में मदद मिलेगी.
NCDEX Guar Korma: देश के ग्वार किसानों, प्रोसेसिंग उद्योग और निर्यातकों के लिए अच्छी खबर है. नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) ने घोषणा की है कि 24 जुलाई 2026 से ग्वार कोरमा (Guar Korma) फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की शुरुआत की जाएगी. यह पहली बार होगा जब ग्वार कोरमा के लिए संगठित फ्यूचर्स बाजार उपलब्ध होगा. इससे किसानों और कारोबारियों को कीमतों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव से बचने में मदद मिलेगी और बाजार में ज्यादा पारदर्शिता आएगी.
भारत दुनिया का करीब 80 प्रतिशत ग्वार उत्पादन करता है और ग्वार कोरमा का सबसे बड़ा निर्यातक भी माना जाता है. इसकी सबसे ज्यादा मांग यूरोप के डेयरी उद्योग में पशु आहार के रूप में होती है.
सितंबर 2026 से शुरू होंगे पहले कॉन्ट्रैक्ट
एनसीडीईएक्स के मुताबिक शुरुआती फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट सितंबर 2026 से जनवरी 2027 तक के लिए उपलब्ध रहेंगे. इसके बाद जरूरत के अनुसार नए कॉन्ट्रैक्ट जारी किए जाएंगे. इस कॉन्ट्रैक्ट की ट्रेडिंग यूनिट 5 टन होगी और इसकी डिलीवरी राजस्थान के जोधपुर वेयरहाउस से की जाएगी. कॉन्ट्रैक्ट का समय पूरा होने पर फिजिकल डिलीवरी जरूरी होगी.
पहली बार मिलेगा कीमतों के जोखिम से बचाव
अब तक ग्वार कोरमा के लिए कोई संगठित फ्यूचर्स बाजार नहीं था. इसकी कीमतें घरेलू मांग, निर्यात, पशु आहार उद्योग और प्रोसेसिंग सेक्टर की जरूरतों के आधार पर बदलती रहती थीं. ऐसे में किसानों और व्यापारियों को कई बार नुकसान उठाना पड़ता था. ऐसे में फ्यूचर्स बाजार शुरू होने से निर्यातक पहले से अपनी बिक्री कीमत तय कर सकेंगे. वहीं प्रोसेसर अपने स्टॉक की बेहतर योजना बना पाएंगे. इसका फायदा आखिरकार किसानों तक भी पहुंचेगा, क्योंकि उन्हें बाजार के सही संकेत और बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी.
किसानों और उद्योग को क्या फायदा होगा?
इस नई व्यवस्था से ग्वार से जुड़े सभी लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है. किसानों को फसल के बेहतर मूल्य का अंदाजा मिलेगा. निर्यातक भविष्य की कीमत पहले से तय कर सकेंगे. प्रोसेसिंग उद्योग कीमतों में अचानक होने वाले बदलाव से खुद को सुरक्षित रख पाएगा. वहीं पशु आहार बनाने वाली कंपनियों को भी पारदर्शी बाजार भाव पर खरीदारी करने में सुविधा होगी.
आखिर क्या होता है ग्वार कोरमा?
ग्वार कोरमा, ग्वार बीज की प्रोसेसिंग के दौरान निकलने वाला एक अहम उत्पाद है. ग्वार से मुख्य रूप से ग्वार गम, ग्वार कोरमा और ग्वार चूरी तैयार होती है. ग्वार कोरमा में भूनने के बाद करीब 55 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है. यह प्राकृतिक, शाकाहारी और नॉन-जीएमओ प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है. इसका इस्तेमाल पशु, पोल्ट्री, मछली और सूअर पालन के चारे में बड़े पैमाने पर किया जाता है.
विदेशों में भी बढ़ रही है मांग
पिछले कुछ सालों में नॉर्वे, नीदरलैंड, जर्मनी, चीन और यूनाइटेड किंगडम भारत से सबसे ज्यादा ग्वार कोरमा खरीदने वाले देशों में रहे हैं. यूरोप में डेयरी उद्योग इसे सोयाबीन मील के अच्छे विकल्प के तौर पर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करता है, क्योंकि यह पशुओं के लिए प्रोटीन से भरपूर चारा माना जाता है. ग्वार कोरमा फ्यूचर्स शुरू होने से किसानों और कारोबारियों को कीमतों का बेहतर अनुमान लगाने में मदद मिलेगी. इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी, ग्वार कोरमा के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की पकड़ पहले से ज्यादा मजबूत हो सकेगी.