देश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को संतुलित और पौष्टिक आहार देना बेहद जरूरी माना जाता है. ऐसे में सूडान चरी (Sudan Grass) पशुपालकों के लिए कम लागत में अधिक फायदा देने वाला हरा चारा साबित हो सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, सूडान चरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है और सही तरीके से खिलाने पर पशुओं की सेहत बेहतर रखने के साथ दूध उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार बुवाई करने के बाद किसान कई बार इसकी कटाई कर सकते हैं, जिससे बार-बार बीज और खेत की तैयारी का खर्च नहीं उठाना पड़ता.
कम लागत में कई बार मिलेगा हरा चारा
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम बताते हैं कि सूडान चरी तेजी से बढ़ने वाली चारा फसल है. पहली कटाई के बाद यह लगभग 25 दिनों के अंतराल में दोबारा कटाई के लिए तैयार हो जाती है. यही वजह है कि यह पशुपालकों के लिए बेहद किफायती विकल्प मानी जाती है. बार-बार कटाई होने से पूरे मौसम में पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता बनी रहती है. इससे बाजार से महंगा चारा खरीदने की जरूरत कम होती है और पशुपालन की लागत घटती है. नियमित रूप से पौष्टिक हरा चारा मिलने से पशुओं का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और दुग्ध उत्पादन में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिल सकता है.
मई से अगस्त तक करें बुवाई, अपनाएं वैज्ञानिक तरीका
विशेषज्ञों के अनुसार सूडान चरी की बुवाई मई से अगस्त के बीच करना सबसे उपयुक्त माना जाता है. यह खरीफ मौसम की फसल है और गर्म व नम मौसम में अच्छी बढ़वार करती है. बहुत अधिक ठंड वाले मौसम में इसकी खेती से बचना चाहिए, क्योंकि कम तापमान पौधों की वृद्धि को प्रभावित करता है. किसानों को इसकी बुवाई हमेशा कतारों और मेड़ों पर करनी चाहिए. इससे फसल का प्रबंधन आसान होता है और पौधों का विकास बेहतर होता है. यदि पौधे अधिक लंबे हो जाएं तो समय-समय पर पत्तियों की कटाई करना भी जरूरी है, ताकि नई बढ़वार तेजी से हो सके और अगली कटाई अच्छी मिले.
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खिलाने में बरतें सावधानी, भूसे के साथ ही दें चारा
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, सूडान चरी जितनी लाभदायक है, उसे खिलाते समय उतनी ही सावधानी भी जरूरी है. इस चारे को कभी भी अकेले पशुओं को नहीं देना चाहिए. इसे हमेशा भूसे या अन्य सूखे चारे के साथ मिलाकर संतुलित मात्रा में खिलाना चाहिए. विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि पशुओं को अधिक मात्रा में केवल सूडान चरी ही खिला दी जाए तो पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं और लिवर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए संतुलित आहार व्यवस्था अपनाना आवश्यक है. उनका कहना है कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से सूडान चरी की खेती करें, समय पर कटाई करें और सही अनुपात में इसे पशुओं के आहार में शामिल करें, तो पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, दूध उत्पादन बढ़ेगा और पशुपालकों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है. कम लागत और बार-बार मिलने वाले हरे चारे की वजह से सूडान चरी आधुनिक पशुपालन के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रही है.