सीफूड निर्यात में ओडिशा का बजा डंका, एक साल में 5428 करोड़ की कमाई.. जानें कैसे बढ़ा कारोबार

ओडिशा ने 2025-26 में समुद्री उत्पाद निर्यात में नया रिकॉर्ड बनाया है. राज्य से 1 लाख टन से अधिक सीफूड का निर्यात हुआ, जिसकी कीमत 5,428 करोड़ रुपये से ज्यादा रही. झींगा उत्पादन, बेहतर प्रोसेसिंग सुविधाएं और पारादीप पोर्ट से बढ़े कंटेनर शिपमेंट ने निर्यात को नई रफ्तार दी है.

Kisan India
नोएडा | Published: 12 Jun, 2026 | 12:30 PM

Odisha News: ओडिशा समुद्री उत्पाद (सीफूड) निर्यात के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है. वर्ष 2025-26 में राज्य से सीफूड निर्यात में मात्रा और मूल्य दोनों के स्तर पर उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में ओडिशा से 1 लाख टन से अधिक सीफूड का निर्यात हुआ, जिसकी कुल कीमत 5,428.67 करोड़ रुपये रही. यह पिछले वर्ष की तुलना में निर्यात मात्रा में 9.63 प्रतिशत और निर्यात मूल्य में 11.90 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है. बढ़ती वैश्विक मांग और बेहतर निर्यात सुविधाओं की बदौलत राज्य का सीफूड कारोबार तेजी से आगे बढ़ रहा है. हालांकि, मछली पालन के विस्तार, बेहतर प्रोसेसिंग सुविधाओं और पारादीप बंदरगाह से बढ़े कंटेनर शिपमेंट के कारण निर्यात को मजबूती मिली है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में समुद्री उत्पाद (सीफूड) निर्यात को मजबूत बनाने के लिए एक विकसित ढांचा तैयार हो चुका है. फिलहाल यहां 64 पंजीकृत सीफूड निर्यातक, 45 प्रोसेसिंग प्लांट, आधुनिक कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं और 36 झींगा हैचरी (Shrimp Hatcheries) मौजूद हैं. इससे समुद्री उत्पादों की पूरी सप्लाई और प्रोसेसिंग व्यवस्था मजबूत हो रही है. झींगा इस क्षेत्र का सबसे प्रमुख उत्पाद बना हुआ है. इस साल वन्नामेई (Vannamei) झींगे का उत्पादन 53,628 टन तक पहुंच गया है. अमेरिका और चीन जैसे बड़े बाजारों में बढ़ती मांग के कारण निर्यात से होने वाली कमाई में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

पारादीप पोर्ट के जरिए सीफूड निर्यात तेजी से बढ़ा

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पारादीप पोर्ट के जरिए कंटेनर में सीफूड निर्यात तेजी से बढ़ा है. इस साल कंटेनरों की आवाजाही  76 से बढ़कर 158 हो गई है, यानी इसमें 107 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है. इस बढ़ोतरी से परिवहन लागत कम होने और निर्यात की प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है, जिससे पूर्वी भारत के सीफूड निर्यातकों को फायदा मिलेगा. राज्य में मत्स्य पालन और समुद्री उत्पादों का पूरा ढांचा लगातार मजबूत किया जा रहा है. पारादीप, धामरा और बालरामगड़ी जैसे बड़े मछली बंदरगाह इस सेक्टर की रीढ़ बने हुए हैं. इसके अलावा बहाबलपुर, बलूगांव, चूडामणि और कोसिया जैसे मछली उतार केंद्र भी इस व्यवस्था को सहयोग दे रहे हैं. बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और वैल्यू एडिशन (उत्पादों में अतिरिक्त प्रोसेसिंग) की वजह से राज्य की निर्यात क्षमता और मजबूत हुई है.

फ्रूट निर्यात में बड़ी संभावनाएं

इसके साथ ही राज्य अब अपने कृषि उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है. ओडिशा काजू, मूंगफली, शकरकंद, आम, अनानास, ड्रैगन फ्रूट, मोटे अनाज (मिलेट्स), मसाले, डेयरी उत्पाद, फूलों की खेती  (फ्लोरिकल्चर) और प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पादों के निर्यात की बड़ी संभावनाएं तलाश रहा है. इसके अलावा जीआई टैग वाले (Geographical Indication) कई खास उत्पाद भी निर्यात सूची में शामिल हैं. रायगढ़ा में स्थित MITS मेगा फूड पार्क इस दिशा में अहम भूमिका निभाने वाला है.. यह फूड प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात आधारित उद्योगों को बढ़ावा देगा, जिससे किसानों और उद्यमियों के लिए नए रोजगार और व्यापार के अवसर पैदा होंगे.

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