GI Tag Special Story: रसोई का स्वाद बढ़ाए, पेट भी रखे दुरुस्त! जानिए ऊंझा जीरे का कमाल

गुजरात में हर साल करीब 4 लाख टन जीरे का उत्पादन होता है. राज्य के बनासकांठा, पाटन, मेहसाणा, कच्छ और सुरेंद्रनगर जिले जीरे की खेती के प्रमुख केंद्र हैं, जहां बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाती है. ऐसे गुजरात का ऊंझा बाजार एशिया की सबसे बड़ी जीरा मंडी माना जाता है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 27 Jul, 2026 | 04:29 PM

Cumin Cultivation: जीरा भारतीय रसोई का ऐसा मसाला है, जो खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है. खास बात यह है कि गुजरात के ऊंझा में उगाए जाने वाले जीरे को हाल ही में जीआई टैग भी मिला है. इस टैग के मिलने के बाद ऊंझा जीरे की पहचान और मजबूत हुई है. माना जा रहा है कि इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग बढ़ेगी और किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.

दरअसल, भारत में सबसे अधिक जीरा की खेती गुजरात में की जाती है. गुजरात में हर साल औसतन करीब 3.81 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जीरे की खेती  होती है. हालांकि, बाजार में जीरे के दाम और मौसम की स्थिति के अनुसार इसका रकबा बढ़ या घट सकता है. साल 2025 में लगभग 4.73 लाख हेक्टेयर में जीरे की बुवाई की गई थी, जो सामान्य से अधिक थी. ऐसे किसान यहां पर अलग-अलग किस्म के जीरे की खेती करते हैं, लेकिन ऊंझा जीरा की बात ही अलग है. यह अपनी तेज खुशबू के लिए लोगों के बीच मशहूर है. यही वजह है कि इसे इसी महीने जीआई टैग मिला.

मेहसाना जिले में किसान करते हैं खेती

अगर ऊंझा जीरा की खासियत की बात करें तो यह अपनी विशिष्ट गुणवत्ता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. इसकी प्राकृतिक सुगंध,  उच्च तेल सामग्री और बोल्ड दाने अन्य जीरा की किस्मों से अलग बनाते हैं. ऐसे इसकी खेती मेहसाना जिले में होती है. अब जीआई टैग मिलने के बाद किसानों को कमाई में बढ़ोतरी की उम्मीद है. तो आइए जानते हैं गुजरात में कैसे की जाती है जीरे की खेती.

बलुई दोमट मिट्टी में करें जीरे की बुवाई

जीरे की अच्छी पैदावार के लिए शुष्क और ठंडा मौसम, बलुई दोमट मिट्टी और सही समय पर बुवाई सबसे जरूरी मानी जाती है. यदि किसान इन बातों का ध्यान रखें, तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर हो सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जीरे की अच्छी फसल के लिए अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक किसान बुवाई कर सकते हैं. ऐसे 5 नवंबर के आसपास बुवाई करना सबसे उपयुक्त माना जाता है.

तापमान 24 से 28 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए

जीरे की खेती के लिए पानी की अच्छी निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेहतर रहती है. बुवाई के समय तापमान 24 से 28 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए, जिससे बीज का अंकुरण अच्छा होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए. जीरे की फसल करीब 100 से 120 दिन में तैयार होती है और इस दौरान 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है. सही समय पर सिंचाई और देखभाल करने से फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती हैं.

इन जिलों में किसान करतें हैं खेती

गुजरात में हर साल करीब 4 लाख टन जीरे का उत्पादन होता है. राज्य के बनासकांठा, पाटन, मेहसाणा, कच्छ और सुरेंद्रनगर जिले जीरे की खेती के प्रमुख केंद्र हैं, जहां बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाती है. ऐसे गुजरात का ऊंझा बाजार एशिया की सबसे बड़ी जीरा मंडी माना जाता है. यहां बड़ी मात्रा में जीरे की खरीद-बिक्री होती है और देशभर के व्यापारियों की नजर ऊंझा के भाव पर रहती है. यहां तय होने वाली कीमतों का असर देश के अन्य बाजारों पर भी पड़ता है.

खबर की मुख्य बातें

  • 3.81 लाख हेक्टेयर में गुजरात में हर साल औसतन जीरे की खेती होती है.
  • 4.73 लाख हेक्टेयर में 2025 में जीरे की बुवाई हुई, जो सामान्य से अधिक थी.
  • करीब 4 लाख टन जीरे का उत्पादन गुजरात में हर साल होता है.
  • 24°C से 28°C तापमान जीरे की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है.
  • 100 से 120 दिन में जीरे की फसल तैयार हो जाती है.
  • 4 से 5 सिंचाई पूरे फसल चक्र के दौरान पर्याप्त मानी जाती हैं.

 

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Published: 27 Jul, 2026 | 04:24 PM

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