Hajipur Banana Farming: हाजीपुर में बार-बार आई बाढ़ ने केले की खेती की कमर तोड़ दी है. वैशाली का यह इलाका चाइना बनाना और मालभोग जैसी केले की किस्मों के लिए देशभर में जाना जाता है, लेकिन इस मौसम में चार-पांच बार आई बाढ़ और लगातार जलभराव ने किसानों की तैयार फसल बर्बाद कर दी है. इसका असर आने वाले त्योहारों पर भी पड़ सकता है. किसान सरकार से मुआवजे के साथ-साथ बाढ़ से स्थायी राहत की मांग कर रहे हैं.
चार-पांच बार आई बाढ़, केले की फसल बर्बाद
हाजीपुर और गंगा नदी के आसपास के इलाकों में बार-बार आई बाढ़ से केले के खेत पानी में डूब गए हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, किसानों ने बताया कि क्षेत्र में कम से कम चार-पांच बार बाढ़ आ चुकी है और कई किसानों की जान भी गई है. केले की खेती त्योहारों के दौरान होने वाली मांग को ध्यान में रखकर की गई थी, लेकिन फसल बर्बाद होने से किसान और इससे जुड़े लोग मुश्किल में हैं. किसानों ने मीडिया से बताया कि चार बार बाढ़ आने से केले के साथ परवल और गेहूं की फसल भी नष्ट हो गई है.
फसल खराब, अब कर्ज लेकर खेती की चिंता
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,किसानों ने बताया कि केले की फसल बर्बाद होने के बाद उसे खेत से हटाने और कटाई में भी काफी पैसा खर्च होगा. अगर फसल से कोई मुनाफा नहीं मिला तो किसानों को दोबारा खेती शुरू करने के लिए कर्ज लेना पड़ सकता है. पानी अभी भी कई खेतों में जमा है, इसलिए किसानों को यह भी चिंता है कि अगली बार गेहूं की खेती हो पाएगी या नहीं. किसानों का कहना है कि लगातार नुकसान से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है.
VIDEO | Vaishali, Bihar: Floods destroy banana crops in Hajipur’s Raghopur.
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/d8jp61yd2p)#Bihar pic.twitter.com/0k8tmovnsg
— Press Trust of India (@PTI_News) September 9, 2026
13,500 से 18,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक मदद
बाढ़ से फसल बर्बाद होने पर बिहार सरकार की कृषि इनपुट सब्सिडी के तहत किसानों को 13,500 रुपये से 18,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक आर्थिक सहायता मिलने का प्रावधान है. इसके लिए 13 अंकों की किसान पंजीकरण संख्या, जमीन की रसीद या LPC जरूरी है. बटाईदार किसानों के लिए वार्ड सदस्य या कृषि समन्वयक से हस्ताक्षरित स्व-घोषणा पत्र की जरूरत हो सकती है. किसान अपने क्षेत्र के किसान सलाहकार या कृषि समन्वयक से संपर्क कर आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.
फसल सहायता से लेकर बाजार की आपूर्ति तक तैयारी
बिहार राज्य फसल सहायता योजना के तहत नुकसान के आकलन के आधार पर भी किसानों को सहायता मिलती है. दिए गए विवरण के अनुसार, 20 फीसदी तक नुकसान पर करीब 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और 20 फीसदी से अधिक नुकसान पर 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद का प्रावधान है. बाढ़ प्रभावित घोषित क्षेत्रों के किसानों को प्राथमिकता मिल सकती है. इसके लिए किसान अपने ब्लॉक कृषि कार्यालय से जानकारी ले सकते हैं. पानी उतरने के बाद बीमारी और मिट्टी की समस्या से बचने के लिए हरिहरपुर केला अनुसंधान केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से सलाह ली जा सकती है.
टिश्यू कल्चर के पौधों का इस्तेमाल भी अगली फसल के लिए किया जा सकता है. वहीं, बर्बाद खड़े केले के तनों से केला रेशा निकालकर अतिरिक्त कमाई का रास्ता बनाया जा सकता है. त्योहारों की मांग पूरी करने के लिए कटिहार, किशनगंज और भागलपुर से केले की आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे बड़े उत्पादक राज्यों से भी परिवहन के जरिए बाजार की जरूरत पूरी की जा सकती है. किसानों ने सरकार से मुआवजा देने और बाढ़ रोकने के लिए बांध तथा स्थायी रोकथाम व्यवस्था में निवेश की मांग की है. कुछ किसानों का मानना है कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में केले के किसानों का मुआवजा और बाढ़ का मुद्दा बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है.