MSP पर होगी प्याज की खरीद? GI टैग ‘बैंगलोर रोज’ का भाव 1500 से घटकर 100 रुपये बोरी

कर्नाटक के GI टैग वाले ‘बैंगलोर रोज’ प्याज की कीमतों में भारी गिरावट से किसान संकट में हैं. पहले 1200-1500 रुपये प्रति बोरी मिलने वाला प्याज अब 100 रुपये से भी कम में बिक रहा है. निर्यात घटने से हालात बिगड़ गए हैं. ऐसे में किसानों ने सरकार से मदद की मांग की है.

नोएडा | Updated On: 20 Apr, 2026 | 12:42 PM

Onion Price Fall: कर्नाटक में GI टैग प्राप्त प्याज ‘बैंगलोर रोज’ की कीमत में भारी गिरावट आई है. किसान 100 रुपये बोरी ( एक बोरी में 60 किलो) प्याज बेचने को मजबूर हैं. हालांकि, पहले ‘बैंगलोर रोज’ प्याज की कीमत में 1200 रुपये से 1500 रुपये बोरी थी. यानी कीमत 1100 से 1400 रुपये बोरी कम हो गई है. ऐसे में किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. चिकबल्लापुर के सांसद के. सुधाकर ने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि GI टैग ‘बैंगलोर रोज’ प्याज उगाने वाले किसान भारी संकट में हैं. ऐसे में केंद्र सरकार को प्याज किसानों को नुकसान से निकालने के लिए सरकारी खरीद शुरू करनी चाहिए.

दरअसल, ‘बैंगलोर रोज’ खास किस्म का प्याज है. इसका आकार छोटा, रंग लाल और स्वाद काफी तेज होता है. यह प्याज मुख्य रूप से कर्नाटक के चिकबल्लापुर, कोलार और बेंगलुरु ग्रामीण इलाकों में उगाया जाता है. पश्चिम एशिया में चल रही टेंशन  के कारण इसके निर्यात पर असर पड़ा है, जिससे बाजार में कीमतें बुरी तरह गिर गई हैं. पहले जहां एक बोरी के दाम 1200 से 1500 रुपये थे, अब वह 100 रुपये से भी नीचे आ गए हैं, जिससे किसानों को गंभीर आर्थिक नुकसान हो रहा है.

सांसद ने शिवराज सिंह चौहान को लिखा पत्र

सांसद के. सुधाकर का कहना है कि निर्यात प्रभावित होने के चलते बड़ी मात्रा में जल्दी खराब होने वाला प्याज नहीं बिक पा रहा है, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है. ऐसे में के. सुधाकर ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान  को पत्र लिखकर सरकार से तुरंत मदद की मांग की है. उन्होंने कहा है कि किसानों को नुकसान से बचाने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकार को खरीद जैसे कदम उठाने चाहिए.

प्याज की सरकारी खरीद की मांग की

साथ ही, उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को भी पत्र लिखकर नए निर्यात बाजार खोलने के लिए जल्दी कदम उठाने की अपील की है. उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को लॉजिस्टिक सपोर्ट और एक्सपोर्ट इंसेंटिव दिए जाएं, ताकि इस फसल का कारोबार फिर से ठीक हो सके. दीर्घकालिक समाधान के तौर पर के. सुधाकर ने सुझाव दिया है कि क्षेत्र में प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाए, जैसे प्याज को सुखाने और अचार बनाने की यूनिट्स लगाई जाए. उन्होंने कहा कि इन यूनिट्स को प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत स्थापित किया जा सकता है. उनका कहना है कि इससे कच्चे माल के निर्यात पर निर्भरता कम होगी और किसानों को वैल्यू एडिशन के जरिए ज्यादा फायदा मिलेगा.

किसान नहीं कर रहे प्याज की कटाई

वहीं, चिकबल्लापुर के किसानों का कहना है कि पहले यह फसल दक्षिण-पूर्व एशिया में निर्यात होती थी, लेकिन अब बाजार प्रभावित हो गया है. एक किसान ने कहा कि पिछले साल जहां 50 किलो की बोरी 800 रुपये में बिकती थी, अब कीमत घटकर करीब 200 रुपये रह गई है. वहीं, कीमतों में गिरावट के चलते कई किसानों ने फसल की कटाई रोक दी है, जबकि कुछ ने विरोध में प्याज सड़कों पर फेंक दिए. किसानों का भी कहना है कि प्याज को सुखाने और अचार बनाने की यूनिट्स की जरूरत है, लेकिन फिलहाल भंडारणकी सुविधा बहुत कम है और सिर्फ कुछ किसानों तक सीमित है. इसलिए पूरे जिले के लिए बड़े स्तर पर स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है.

Published: 20 Apr, 2026 | 12:35 PM

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