200 साल के संघर्ष के बाद मिल रहा जमीन का पट्टा, पीढ़ियां मजदूर बनकर गुजरीं अब मालिक बनेंगे चाय किसान

Assam tea labororss land ownership struggle end now: असम के चाय बागानों में काम करने वाले मजदूर 200 साल से भी ज्यादा समय से उन जमीनों का मालिकाना हक मांगते आ रहे हैं, जिन पर वह रह रहे हैं और चाय उगा रहे हैं. लेकिन, उन्हें न्याय नहीं मिला पर अब मोदी सरकार ने मजदूरों को मालिक बनाने की ठान ली है. वह मजदूरों को भूमि पट्टे सौंपेंगे.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 13 Mar, 2026 | 03:13 PM

असम के चाय बागानों में काम करने वाले किसानों को मजदूर कहा जाता है. क्योंकि, वह जिस जमीन पर चाय उगाते हैं और जिस बागान में रहते हैं वह उनका नहीं होता है. चाय मजदूरों की कई पीढ़ियां 200 साल से भी ज्यादा समय से उन जमीनों पर मालिकाना हक मांगती रही हैं, जिन पर वे रहते हैं और उनके पूर्वज भी रहे थे. लेकिन, इतना वक्त गुजरने के बाद अब जाकर चाय मजदूरों को मालिकाना हक देने पर पीएम मोदी ने मुहर लगा दी है. आज वह 3.5 लाख परिवारों को जमीन का पट्टा सौंपेंगे और जो मजदूर रहे हैं उन्हें उस जमीन का मालिक बनाने का इतिहास लिखेंगे.

असम के चाय बागानों में 45 लाख से ज्यादा मजदूर और कर्मचारी

असम में भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक है और यह कुल उत्पादन का 55 फीसदी योगदान देता है. असम में 800 से अधिक बड़े चाय बागान हैं और 60,000 से ज्यादा छोटे चाय बागान हैं. इन चाय बागानों को सरकार और निजी मालिक चलाते हैं. इन बागानों में चाय जनजाति समुदाय के 45 लाख से अधिक लोग रहते हैं. इन चाय बागानों में काम करने वाले लोगों को चाय मजदूर कहा जाता है. यह चाय बागानों में ही पीढ़ियों से रहते आए हैं. लेकिन, उन जमीनों पर इनका कोई अधिकार नहीं रहा है.

200 साल से जहां पर रह रहे, खेती कर रहे उसके मालिक नहीं थे

असम के चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों 200 साल से भी ज्यादा समय से उन जमीनों का मालिकाना हक मांगते आ रहे हैं, जिन पर वह रह रहे हैं और चाय उगा रहे हैं. लेकिन, उन्हें न्याय नहीं मिला. राज्य के चाय बागानों में काम करने वाले लाखों श्रमिक पीढ़ियों से बागानों के भीतर बनी लाइनों या कॉलोनियों में रहते हैं, लेकिन जिस जमीन पर वे रहते हैं वह आमतौर पर चाय कंपनियों या सरकार के अधीन है. इसलिए इन श्रमिकों के पास अपनी जमीन का कानूनी मालिकाना हक नहीं है और वे केवल कामगार के रूप में वहां रह पाते हैं.

850 बागानों के 3.5 लाख परिवारों को पीएम सौपेंगे जमीन का पट्टा

चाय बागानों के मजदूरों की जमीन पर मालिकाना हक की मांग को राज्य सरकार की संस्तुति पर केंद्र सरकार ने मान लिया है. इसी के चलते आज 13 मार्च को पीएम मोदी गुवाहाटी में 850 चाय बागानों के मजदूरों को जमीन का पट्टा सौपेंगे. इससे 3.5 लाख परिवारों को उन जमीनों का मालिकाना हक मिल जाएगा जो पीढ़ियों से वहां रहते आए हैं. गुवाहाटी के कार्यक्रम में पीएम मोदी 700 ऐसे चाय मजदूरों को पट्टा के प्रमाण पत्र सौंपने के बुलाया गया है. इसके साथ ही जमीन का मालिक बनने का उनका सपना पूरा हो रहा है.

चाय मजदूर गर्व से जमीन के मालिक बनने के लिए तैयार

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि हर तरफ उत्साह का माहौल है. हमारे चाय बागान समुदाय में उत्साह बढ़ता जा रहा है, क्योंकि वे गुवाहाटी पहुंच चुके हैं और इतिहास में पहली बार गर्व से जमीन के मालिक बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उन्होंने कहा कि आज पीएम मोदी चाय बागान मजदूरों को जमीन के पट्टे वितरित करेंगे और उन्हें जमीन का मालिकाना हक देंगे.

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Published: 13 Mar, 2026 | 03:02 PM
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