सिफारिशों के तहत MSP नहीं मिलने से धान किसानों को भारी नुकसान, हर सीजन 1.50 लाख का घाटा

Paddy MSP : संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा है कि धान किसानों स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के अनुसार एमएसपी नहीं दिया जा रहा है. जबकि, 2014 में भाजपा के चुनावी वादों में यह शामिल था. इसे अब तक लागू नहीं किए जाने से किसान कम मूल्य पा रहे हैं और भारी घाटे से आर्थिक संकट झेल रहे हैं.

नोएडा | Published: 7 Aug, 2026 | 01:07 PM

एमएस स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू न होने के कारण देश में औसतन पांच एकड़ वाले धान किसान को हर फसल चक्र (सीजन) में लगभग 1.50 लाख रुपये का नुकसान होता है. सरकार एमएसपी देने का दावा करती है पर सच्चाई किसानों को घाटे में डाल रही है और आर्थिक रूप से कमजोर कर रही है. संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने यह बात कही. किसान संगठन ने 10 अगस्त को देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है और इसमें भारी संख्या में किसानों को शामिल होने की अपील की है.

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने एक बयान जारी कर धान किसानों से 10 अगस्त को आयोजित होने वाले विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने का आह्वान किया. किसान संगठन ने याद दिलाया कि स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के अनुसार एमएसपी देना 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चुनावी वादों में शामिल था. मोदी सरकार ने लागत से ज्यादा मूल्य देने का वादा करती है तो एमएसपी गारंटी कानून लागू क्यों नहीं कर रही है.

हर सीजन धान किसानों को 1.50 लाख का नुकसान

एसकेएम ने कहा कि एमएस स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू न होने के कारण देश में औसतन 5 एकड़ वाले धान किसान को हर फसल सीजन में लगभग 1.50 लाख रुपये का नुकसान होता है. इसके तहत सरकार जो एमएसपी दे रही है उसमें किसान भारी घाटा झेल रहे हैं. ऐसी स्थिति में मुनाफा छोड़िये धान किसान अपनी लागत का पैसा भी नहीं हासिल कर पा रहा है. सरकार की किसान विरोधी नीति के चलते अन्नदाता आर्थिक रूप से कमजोर होते जा रहे हैं.

धान पर 802 रुपये नुकसान झेल रहे किसान

बयान में कहा गया कि सरकार की ओर से तय किया गया धान का एमएसपी 2441 रुपये प्रति क्विंटल है. स्वामीनाथन आयोग का फॉर्मूला (C2+50%) के अनुसार धान का यह मूल्य 3243 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए. किसानों को प्रति क्विंटल 802 रुपये का घाटा हो रहा है. दावा किया गया है कि कुछ अन्य फसलों के एमएसपी को लेकर भी यही स्थिति है. एसकेएम ने किसानों को उपज का भरपूर मूल्य दिए जाने की मांग की और आयोग की सिफारिशें लागू करने की अपील सरकार से की है.

10 अगस्त से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और 26 नवंबर को मार्च की घोषणा

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने अपनी सात मुख्य मांगों को मनवाने के लिए 10 अगस्त से शुरू होने वाले चरणबद्ध देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है. यह आंदोलन 26 नवंबर को दिल्ली और देश भर में लगभग 100 जगहों पर किसानों के मार्च और कई दिनों तक चलने वाले बड़े प्रदर्शनों के साथ समाप्त होगा. SKM नेताओं ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत 1,000 से ज़्यादा जगहों पर ‘जेल भरो’, ‘रेल रोको’ और ‘रोड रोको’ प्रदर्शनों से होगी और यह तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं.

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