एक साल में 11 फीसदी कम हुआ आलू का रेट, सप्लाई और मांग में भारी अंतर.. कीमतों में और आएगी कमी?

उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में बंपर आलू उत्पादन और पुराने स्टॉक के कारण कीमतें गिर गई हैं. दिल्ली में आलू 10- 12 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. नासिक में प्याज के भाव 1,000 रुपये प्रति क्विंटल हैं, जिससे किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं. निर्यात भी दबाव में है.

नोएडा | Updated On: 28 Feb, 2026 | 12:58 PM

Potato Price Fall: उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में इस साल आलू की बंपर पैदावार हुई है, जबकि मार्केट में अभी पुराने स्टॉक की भरमार है. पिछले सीजन का बचा हुआ आलू भी अब मंडियों में पहुंच रहा है, जिससे सप्लाई बढ़ गई है. ऐसे में आलू की कीमतों में तेज गिरावट आई है. उपभोक्ता मामलों के विभाग की प्राइस मॉनिटरिंग सेल के मुताबिक, शुक्रवार को देश में आलू का औसत खुदरा दाम 21.85 रुपये प्रति किलो रहा. यह कीमत पिछले महीने के मुकाबले करीब 2.47 फीसदी कम है और एक साल पहले की तुलना में 11 फीसदी से ज्यादा घट चुकी है. वहीं, दिल्ली और आसपास के इलाकों में फिलहाल आलू 10 से 12 रुपये प्रति किलो के बीच बिक रहा है.

देश की सबसे बड़ी थोक कृषि मंडी आजादपुर मंडी के कमीशन एजेंटों के मुताबिक, ज्यादा सप्लाई और कम मांग  की वजह से बाजार में आलू के दाम 3 से 5 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं. फिलहाल कटाई और भंडारण का काम शुरू हो चुका है और प्रमुख उत्पादक राज्यों में फसल अच्छी है. ऐसे में जुलाई तक कीमतों पर दबाव बने रहने की संभावना है. ऐसे आम तौर पर फरवरी में कटाई के बाद आलू को कोल्ड स्टोरेज में रख दिया जाता है और नवंबर तक उसी से घरेलू मांग पूरी की जाती है. लेकिन इस साल स्टॉक जनवरी तक कोल्ड स्टोरेज में पड़ा रहा, जिससे बाजार में ज्यादा माल आ गया और सप्लाई बढ़ने से दाम गिर गए.

आलू का उत्पादन 581 लाख टन रहने का अनुमान

कृषि मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, 2024- 25 फसल वर्ष (जुलाई- जून) में आलू का उत्पादन  581 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि चालू वर्ष में यह करीब 600 लाख टन तक पहुंच सकता है. कारोबारियों का कहना है कि देश का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य पश्चिम में 2025- 26 फसल वर्ष में 140 से 150 लाख टन आलू उत्पादन हो सकता है, जो पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा होगा. इस बीच, प्याज की कीमतों में भी गिरावट आई है. शुक्रवार को देश में प्याज का औसत खुदरा दाम 26.96 रुपये प्रति किलो रहा, जो एक महीने पहले की तुलना में 6 फीसदी कम और पिछले साल के मुकाबले 27 फीसदी सस्ता है.

लासलगांव एपीएमसी में प्याज की कीमतों में गिरावट

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नासिक के लासलगांव एपीएमसी के निदेशक जयदत्त होल्कर ने कहा है कि अच्छी खरीफ और गर्मी की फसल की संभावना के कारण बाजार में प्याज की आवक बढ़ गई है. इसी वजह से मौजूदा समय में प्याज के औसत दाम घटकर करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस वित्त वर्ष में निर्यात की रफ्तार धीमी रही है, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ा है. वहीं, नासिक में किसान पिछले कुछ दिनों से गिरती कीमतों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

प्याज किसानों को भी हो रहा है आर्थिक नुकसान

इस समय बाजार में प्याज का भाव करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है, जो उत्पादन लागत से काफी कम है. किसानों के मुताबिक एक क्विंटल प्याज उगाने में 1,600 से 1,800 रुपये तक खर्च आता है. ऐसे में कम दाम पर बिक्री करने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. भारत के प्याज निर्यात को भी इस समय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. बांग्लादेश और सऊदी अरब अब अपनी घरेलू पैदावार पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं. वहीं, पाकिस्तान और सूडान से आयात उनकी कमजोर मुद्रा के कारण सस्ता पड़ रहा है, जिससे भारतीय प्याज को प्रतिस्पर्धा मिल रही है.

प्याज निर्यात 22 फीसदी घटकर 298.69 मिलियन डॉलर रह गया

व्यापारियों का कहना है कि भारत को नए निर्यात बाजार तलाशने और प्याज से जुड़े वैल्यू एडेड उत्पादों को बढ़ावा देने की जरूरत है. अप्रैल- दिसंबर FY26 के दौरान भारत का प्याज निर्यात 22 फीसदी घटकर 298.69 मिलियन डॉलर रह गया, जो 2024- 25 की इसी अवधि में 380 मिलियन डॉलर था. सरकार ने 13 सितंबर 2024 को लगाए गए 20 फीसदी निर्यात शुल्क को 1 अप्रैल 2025 से हटा दिया था. वहीं, सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार जनवरी 2026 में प्याज की कीमतें सालाना आधार पर 29 फीसदी घटीं, जबकि आलू के दामों में भी सालाना बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

Published: 28 Feb, 2026 | 12:58 PM

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