गैर बासमती चावल के निर्यात को कैसे मिलेगा बढ़ावा ? समिति ने अतिरिक्त राशि FD में लगाने का किया फैसला

गैर-बासमती चावल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बने NBDF फंड की अतिरिक्त राशि को FD में निवेश करने का फैसला किया गया है. APEDA ने निर्यातकों से 9.66 करोड़ रुपये जुटाए हैं. हालांकि, कुछ निर्यातकों का कहना है कि इस राशि को जमा रखने के बजाय निर्यात प्रोत्साहन, प्रचार-प्रसार और वैश्विक बाजार में भारतीय चावल की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर खर्च किया जाना चाहिए.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 11 Jun, 2026 | 08:58 AM

Non-Basmati Rice Export: गैर-बासमती चावल के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए नॉन-बासमती राइस डेवलपमेंट फंड (NBDF) की एक आंतरिक समिति ने फंड की अतिरिक्त राशि को टर्म डिपॉजिट (FD) में निवेश करने का फैसला किया है. यह फंड सरकारी कृषि निर्यात संवर्धन संस्था APEDA द्वारा संचालित किया जाता है. समिति ने तय किया है कि कर और प्रशासनिक खर्चों को घटाने के बाद फंड में 1 करोड़ रुपये से अधिक बची राशि को टर्म डिपॉजिट में रखा जाएगा. हालांकि, इस फंड का मुख्य उद्देश्य गैर-बासमती चावल के निर्यात को बढ़ावा देने से जुड़ी गतिविधियों पर खर्च करना था.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, 25 सितंबर 2025 से 30 अप्रैल 2026 के बीच APEDA ने गैर-बासमती चावल निर्यातकों से अनिवार्य कॉन्ट्रैक्ट रजिस्ट्रेशन शुल्क के रूप में 9.66 करोड़ रुपये जुटाए हैं. यह राशि NBDF में जमा की गई है, जिसका उपयोग मूल रूप से निर्यात प्रोत्साहन कार्यक्रमों के लिए किया जाना था. वाणिज्य विभाग (DoC) ने जुलाई 2025 में गैर-बासमती चावल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए गैर-बासमती राइस डेवलपमेंट फंड (NBDF) के गठन को मंजूरी दी थी. इस फंड का संचालन APEDA के अध्यक्ष की अगुवाई वाली एक समिति कर रही है, जिसमें कुल आठ सदस्य शामिल हैं. इनमें उद्योग जगत के तीन प्रतिनिधि भी हैं. हालांकि, फंड के संचालन और उपयोग से जुड़े नियम सितंबर 2025 में तय किए गए, जब निर्यातकों से शुल्क वसूली शुरू हुई.

30 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखने की अनुमति

विभाग ने APEDA को कॉन्ट्रैक्ट रजिस्ट्रेशन शुल्क से जुटाई गई राशि का 30 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखने की अनुमति दी है. यह शुल्क 9.44 रुपये प्रति टन (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) की दर से लिया जा रहा है. हालांकि, पिछले महीने हुई NBDF समिति की दूसरी बैठक में आंतरिक ऑडिटर ने फंड की स्थिति की जानकारी दी. APEDA ने अब तक करीब 1.02 करोड़ टन (10.23 मिलियन टन) गैर-बासमती चावल निर्यात के लिए रजिस्ट्रेशन-कम-अलोकेशन सर्टिफिकेट (RCAC) जारी किए हैं. इसके बदले 30 अप्रैल 2026 तक कुल 9.66 करोड़ रुपये कॉन्ट्रैक्ट रजिस्ट्रेशन शुल्क के रूप में जुटाए गए हैं.

5 से 6 करोड़ रुपये बच सकते हैं

उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि कर, सेवा शुल्क और APEDA के 30 प्रतिशत हिस्से को निकालने के बाद भी फंड में लगभग 5 से 6 करोड़ रुपये बच सकते हैं. इस राशि का उपयोग गैर-बासमती चावल के निर्यात को बढ़ावा देने वाली विभिन्न गतिविधियों पर किया जा सकता है. हालांकि, समिति ने 1 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि को टर्म डिपॉजिट (FD) में निवेश करने का निर्णय लिया है.

IIC में NBDF समिति के सचिव, APEDA के अनाज (सीरियल) प्रभाग के प्रमुख और APEDA के कुछ अन्य अधिकारी शामिल हैं. एक अधिकारी ने कहा कि समिति का उद्देश्य फंड का पारदर्शी और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना, निवेश की निगरानी करना तथा इस्तेमाल न हो रही राशि के लिए निवेश रणनीति तैयार करना है. साथ ही कम जोखिम के साथ पूंजी की सुरक्षा  और फंड की बेहतर वृद्धि सुनिश्चित करना भी इसका लक्ष्य है. पिछले महीने हुई NBDF समिति की बैठक में सदस्यों को यह भी बताया गया कि फंड से कुछ खर्च किए जा चुके हैं. इनमें रायपुर में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट और दुबई में होने वाली गल्फूड 2026 प्रदर्शनी के लिए प्रदर्शनी स्थल (स्पेस) किराए पर लेने का खर्च शामिल है.

गैर-बासमती चावल के निर्यात को बढ़ावा

सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट रजिस्ट्रेशन शुल्क से जुटाई गई राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा गैर-बासमती चावल के निर्यात को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर खर्च किया जाना है. इसके अलावा इस फंड से हेल्प डेस्क और प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के वेतन का भुगतान  भी किया जा सकता है, जैसा कि NBDF समिति तय करेगी. दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि इस फंड का उपयोग किसानों को गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (GAP) और जैविक खेती का प्रशिक्षण देने, नॉन-बासमती चावल के उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने, अनुसंधान एवं विकास कार्यों, विस्तार सेवाओं, व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों की विदेश यात्राओं, प्रचार-प्रसार कार्यक्रमों, खरीदार-विक्रेता बैठकों तथा उपभोक्ता सर्वेक्षण और शोध अध्ययनों के लिए किया जाएगा.

बेहतर कीमत नहीं मिल रही है

हालांकि, चावल उद्योग से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों वाली NBDF समिति ने फंड की राशि को टर्म डिपॉजिट (FD) में निवेश कर एक कोष (कॉर्पस) बनाने के फैसले का समर्थन किया है. वहीं, कुछ निर्यातकों का मानना है कि फंड में मौजूद राशि बहुत बड़ी नहीं है, इसलिए इसे निष्क्रिय रखने के बजाय निर्यात बढ़ाने वाली गतिविधियों पर खर्च किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल को कई प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर कीमत नहीं मिल रही है, ऐसे में निर्यात प्रोत्साहन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है.

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Published: 11 Jun, 2026 | 08:46 AM

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