मसाला निर्यात को झटका, एक्सपोर्ट में 6 फीसदी की गिरावट.. जीरा ने बिगाड़ा खेल

कुछ मसालों के निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इमली का निर्यात 42 प्रतिशत बढ़कर 50.77 मिलियन डॉलर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 35.78 मिलियन डॉलर था. वहीं, करी पाउडर और करी पेस्ट का निर्यात भी 5 प्रतिशत बढ़कर 259.98 मिलियन डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 247.59 मिलियन डॉलर था. हालांकि, पुदीना (मिंट) उत्पादों के निर्यात में गिरावट देखने को मिली.

नोएडा | Updated On: 4 Jun, 2026 | 02:03 PM

Spice Export: भारत के मसाला निर्यात को वित्त वर्ष 2025-26 में झटका लगा है. मिर्च और जीरा जैसे प्रमुख मसालों की विदेशों में मांग घटने से निर्यात में कमी दर्ज की गई. पिछले साल के मुकाबले मसाला निर्यात 6 प्रतिशत घटकर 4.43 अरब डॉलर रह गया. इससे मसाला कारोबार से जुड़े निर्यातकों और किसानों की चिंता बढ़ गई है. वहीं, मात्रा के हिसाब से भी निर्यात 4 प्रतिशत घटकर 17.34 लाख टन रह गया, जो पिछले वर्ष 17.99 लाख टन था.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि रुपये के मूल्य में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही और मसाला निर्यात 2 प्रतिशत घटकर 39,140 करोड़ रुपये पर पहुंचा, जो पिछले वर्ष 39,994 करोड़ रुपये था. भारत के मसाला निर्यात में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मिर्च और जीरे की कमजोर विदेशी मांग रही. चीन और बांग्लादेश जैसे प्रमुख खरीदार देशों से मांग कम होने के कारण मिर्च निर्यात प्रभावित हुआ. वित्त वर्ष 2025-26 में मिर्च का निर्यात मात्रा के हिसाब से 4 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 12 प्रतिशत घटकर 1.17 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष 1.34 अरब डॉलर था.

जीरे के निर्यात में भी बड़ी गिरावट

वहीं, जीरे के निर्यात  में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई. इसका निर्यात 14 प्रतिशत घटकर 1.96 लाख टन रह गया, जबकि मूल्य के हिसाब से इसमें 28 प्रतिशत की कमी आई और यह 524.22 मिलियन डॉलर पर सिमट गया. इसके अलावा मसाला तेल और ओलियोरेजिन का निर्यात 1 प्रतिशत घटकर 528.73 मिलियन डॉलर तथा हल्दी का निर्यात 4 प्रतिशत घटकर 327 मिलियन डॉलर रह गया. इससे साफ है कि प्रमुख मसालों की वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारत के मसाला कारोबार पर पड़ा है.

जहां मिर्च और जीरे के निर्यात में गिरावट देखने को मिली, वहीं कुछ मसालों ने बेहतर प्रदर्शन किया. काली मिर्च  के निर्यात की मात्रा में 5 प्रतिशत की कमी आई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छे दाम मिलने से इसके निर्यात मूल्य में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. वित्त वर्ष 2025-26 में काली मिर्च का निर्यात 137.84 मिलियन डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष 124.5 मिलियन डॉलर था.

अदरक, इमली, धनिया की कैसी रही स्थिति

इसके अलावा छोटी इलायची, बड़ी इलायची, अदरक, इमली, धनिया और करी पाउडर व पेस्ट के निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई. छोटी इलायची का निर्यात सबसे ज्यादा बढ़ा, जिसका मूल्य 124 प्रतिशत बढ़कर 413 मिलियन डॉलर पहुंच गया. इसकी निर्यात मात्रा भी 124 प्रतिशत बढ़कर 15,050 टन हो गई, जो पिछले वर्ष 6,728 टन थी. वहीं, बड़ी इलायची का निर्यात मूल्य 31 प्रतिशत बढ़कर 35.52 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया. इससे पता चलता है कि कुछ मसालों की मजबूत वैश्विक मांग ने निर्यात को सहारा दिया.

इन मसालों का निर्यात रहा बेहतर

कुछ मसालों के निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इमली का निर्यात 42 प्रतिशत बढ़कर 50.77 मिलियन डॉलर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 35.78 मिलियन डॉलर था. वहीं, करी पाउडर और करी पेस्ट का निर्यात भी 5 प्रतिशत बढ़कर 259.98 मिलियन डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 247.59 मिलियन डॉलर था. हालांकि, पुदीना (मिंट) उत्पादों के निर्यात में गिरावट देखने को मिली. वित्त वर्ष 2025-26 में इसका निर्यात 15 प्रतिशत घटकर 354 मिलियन डॉलर रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 417 मिलियन डॉलर था. इससे पता चलता है कि कुछ मसालों और मसाला उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ी, जबकि कुछ उत्पादों की मांग कमजोर रही.

Published: 4 Jun, 2026 | 01:57 PM

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