क्या है ‘एग कार्ट योजना’ जिससे महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर.. बिजनेस के लिए मिलेंगे 50 हजार
इस योजना का मकसद स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को स्थायी आय का साधन देना है, साथ ही लोगों में अंडों के पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाना भी है. इस योजना के तहत कुल 200 एग कार्ट 12 नगर निगमों में बांटे जाएंगे. इनमें GHMC, मलकाजगिरी और साइबराबाद को 40-40 कार्ट मिलेंगे.
Telangana News: तेलंगाना में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए राहत भरी खबर है. अब उनकी कमाई पहले से बेहतर होगी. इसके लिए राज्य सरकार अहम पहल शुरू करने जा रही है. इस पहल के तहत शहरी इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को ‘एग कार्ट योजना’ के माध्यम से अंडे और अंडे से बने व्यंजन बेचने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपनी आय बढ़ा सकेंगी. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी.
तेलंगाना मिशन फॉर एलिमिनेशन ऑफ पॉवर्टी इन म्युनिसिपल एरियाज (TMEPMA) और नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) मिलकर 12 नगर निगमों में स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को खास डिजाइन किए गए एग कार्ट उपलब्ध कराएंगे. हर लाभार्थी महिला को लगभग 35,000 रुपये की एग कार्ट और 15,000 रुपये के रसोई उपकरण दिए जाएंगे. यानी कुल 50,000 रुपये की सहायता मिलेगी, इन कार्ट्स के जरिए महिलाएं अंडे, अंडे से बने पकवान और चिकन से जुड़े उत्पाद बेचकर अपनी कमाई कर सकेंगी और आत्मनिर्भर बन सकेंगी.
नलगोंडा और कोठागुडेम को 5-5 कार्ट दिए जाएंगे
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना का मकसद स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को स्थायी आय का साधन देना है, साथ ही लोगों में अंडों के पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाना भी है. इस योजना के तहत कुल 200 एग कार्ट 12 नगर निगमों में बांटे जाएंगे. इनमें GHMC, मलकाजगिरी और साइबराबाद को 40-40 कार्ट मिलेंगे. वहीं वारंगल और हनमकोंडा को 20-20 कार्ट दिए जाएंगे. करीमनगर, रामागुंडम, निजामाबाद और खम्मम को 10-10 कार्ट मिलेंगे, जबकि महबूबनगर, मंचेरियल, नलगोंडा और कोठागुडेम को 5-5 कार्ट दिए जाएंगे.
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प्रोटीन की कमी को दूर करने में भी मदद करेगी
कहा जा रहा है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को स्थायी स्वरोजगार (self-employment) का अवसर देना है, साथ ही लोगों में अंडों की खपत और पोषण से जुड़ी जागरूकता बढ़ाना भी है. TMEPMA ने अलग-अलग नगर निगमों को लक्ष्य (targets) तय करके दिए हैं और आयुक्तों को निर्देश दिया गया है कि वे योग्य लाभार्थियों की पहचान करें और योजना को सही तरीके से लागू करें. इस पहल के जरिए महिलाओं को कच्चे अंडे और उनसे बने व्यंजन बेचकर आय कमाने का मौका मिलेगा. साथ ही यह योजना स्थानीय लोगों में प्रोटीन की कमी को दूर करने में भी मदद करेगी, क्योंकि इससे अंडे ज्यादा आसानी से और सस्ते में उपलब्ध हो सकेंगे.
अंडा उत्पादन में लगभग 12-13 फीसदी का योगदान
तेलंगाना भारत के प्रमुख अंडा उत्पादक राज्यों में से एक है और यह देश के कुल अंडा उत्पादन में लगभग 12-13 फीसदी का योगदान देता है. राज्य में रोजाना करीब 3.5 से 3.7 करोड़ अंडे तैयार किए जाते हैं, जिससे यह देश का तीसरा सबसे बड़ा अंडा उत्पादक राज्य बन गया है. यहां उत्पादित अंडों का लगभग आधा हिस्सा राज्य के भीतर ही खपत हो जाता है, जबकि बाकी अंडे दूसरे राज्यों में भेजे जाते हैं. मई 2026 तक हैदराबाद में अंडे की थोक कीमत लगभग 5.25 रुपये प्रति अंडा रही. तेलंगाना में पोल्ट्री उद्योग काफी मजबूत है और यह ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों में लोगों की आजीविका का बड़ा जरिया है. हालांकि, पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण अंडों के निर्यात पर असर पड़ा है, जिससे स्थानीय बाजार की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है.