17 रुपये किलो में बिक रहा टमाटर, लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान.. खेती में बढ़ा नुकसान
हिमाचल प्रदेश के सोलन में टमाटर किसानों को इस सीजन कम कीमत और घटे उत्पादन की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. खराब मौसम, ब्लैक रॉट बीमारी और दूसरे राज्यों से ज्यादा आवक के कारण दाम गिरे हैं. किसानों का कहना है कि मौजूदा बाजार भाव से खेती की लागत भी नहीं निकल पा रही है.
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के टमाटर किसानों के लिए यह सीजन मुश्किल भरा साबित हो रहा है. खराब मौसम और दूसरे राज्यों से बड़ी मात्रा में टमाटर आने की वजह से किसानों को अपनी फसल का अच्छा दाम नहीं मिल रहा है. 7 जून से अब तक सोलन APMC मंडी में 24 किलो वाले 1.07 लाख से ज्यादा टमाटर के क्रेट बिक चुके हैं. इससे करीब 4.28 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है. अभी किसान 400 रुपये क्रेट टमाटर बेच रहे हैं. यानी उन्हें 16.67 रुपये प्रति किलो रेट मिल रहा है.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, मंडी में टमाटर की कीमत 400 रुपये प्रति क्रेट से लेकर प्रीमियम किस्म ‘हीम सोहना’ के लिए 2,900 रुपये प्रति क्रेट तक रही है. हालांकि, अधिकांश किसानों को उम्मीद के मुताबिक दाम नहीं मिल रहे हैं. इस साल सोलन के टमाटर किसानों को पिछले साल की तुलना में कम उत्पादन और कम कीमत, दोनों का सामना करना पड़ रहा है. पिछले साल इसी अवधि में 1,21,852 क्रेट टमाटर बिके थे, जबकि इस बार अब तक 1,07,001 क्रेट की ही बिक्री हुई है.
क्या है टमाटर का ताजा रेट
कीमतों में भी गिरावट आई है. पिछले साल टमाटर का न्यूनतम भाव 600 रुपये प्रति क्रेट और अधिकतम 3,800 रुपये प्रति क्रेट था. वहीं, इस साल कीमत 400 रुपये से 2,900 रुपये प्रति क्रेट के बीच रही. औसत कीमत भी 2,100 रुपये प्रति क्रेट (करीब 87.5 रुपये प्रति किलो) से घटकर 1,700 रुपये प्रति क्रेट (करीब 70 रुपये प्रति किलो) रह गई है.
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बेंगलुरु से आने वाले टमाटर की मांग बढ़ी
सोलन के टमाटर कारोबारी तीर्थ नंद के मुताबिक, बेंगलुरु से आने वाले बेहतर गुणवत्ता वाले टमाटरों ने देश के बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है. इसकी वजह से हिमाचल के टमाटरों की मांग घटी है. साथ ही, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान से इस साल पहले के मुकाबले कम व्यापारी सोलन मंडी में खरीदारी के लिए पहुंचे हैं. सोलन के टमाटर कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है. आमतौर पर जुलाई के मध्य तक दूसरे राज्यों से टमाटर की आवक कम हो जाती है, लेकिन इस साल अब तक बाहर से टमाटर की सप्लाई ज्यादा बनी हुई है. जैसे-जैसे यह आवक घटेगी, स्थानीय टमाटर की मांग बढ़ सकती है.
टमाटर की फसल को काफी नुकसान
किसानों के मुताबिक, भारी बारिश, अधिक तापमान और ब्लैक रॉट (काला सड़न) जैसी बीमारियों ने इस बार टमाटर की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है. इससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुए हैं. हालांकि, पॉलीहाउस में टमाटर उगाने वाले किसानों को खुले खेतों की तुलना में बेहतर कीमत मिली है. किसानों का कहना है कि इस बार खराब मौसम की वजह से फसलों में बीमारियां ज्यादा फैलीं. इससे उन्हें कीटनाशकों का बार-बार छिड़काव करना पड़ा, जिसके कारण खेती की लागत काफी बढ़ गई. टमाटर किसान सुनील का कहना है कि अब टमाटर की खेती मुनाफे का सौदा नहीं रह गई है. बाजार में जो कीमत मिल रही है, वह खेती की लागत निकालने के लिए भी पर्याप्त नहीं है. ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.