Telangana News: अल नीनो और कम बारिश की आशंका को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने किसानों से धान की खेती कम करने की अपील की है. सरकार ने सलाह दी है कि किसान धान की जगह कम पानी में उगने वाली फसलों की खेती करें. सरकार ने किसानों से मोटे अनाज और दलहन बोने को कहा है, ताकि पानी की कमी का असर खेती पर कम पड़े. साथ ही किसानों को कम लागत में ज्यादा मुनाफा हो. खास बात यह है कि तेलंगाना में अभी तक औसत से 35 प्रतिशत कम बारिश हुई है. यही वजह है कि सरकार की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं.
तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव ने कहा है कि राज्य में बारिश की कमी को देखते हुए यह सलाह दी गई है. उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है. ऐसे में पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ने की जरूरत है. कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव ने कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश होने का असर तेलंगाना पर भी पड़ सकता है. इससे कृष्णा और गोदावरी नदी परियोजनाओं के तहत सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता इस सीजन में चुनौती बन सकती है.
किसानों को समय पर मिलेगी सही सलाह
इसलिए उन्होंने किसानों से अपील की कि वे कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता दें. साथ ही मंत्री ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सिंचाई, भूजल और मौसम विभाग के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में रहें, ताकि मौसम और पानी की स्थिति के अनुसार किसानों को समय पर सही सलाह और जरूरी जानकारी दी जा सके.
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अच्छी किस्मों की खेती करने की अपील
कृषि मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे किसानों को कम समय में तैयार होने वाली और ज्यादा पैदावार देने वाली मोटे अनाज (मिलेट्स) और दलहन की किस्मों की जानकारी दें, ताकि कम बारिश की स्थिति में भी किसानों को अच्छा उत्पादन मिल सके. वहीं, मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा कि तेलंगाना में अब तक सामान्य से 30 से 35 प्रतिशत कम बारिश हुई है. उनका अनुमान है कि अगले तीन महीनों में भी बारिश की स्थिति में ज्यादा सुधार होने की संभावना नहीं है. इसलिए किसानों को मौसम के अनुसार खेती की योजना बनाने की सलाह दी गई है.
15 जुलाई से तीन चरणों वाली कंटीजेंसी योजना लागू
बड़ी बात यह है कि अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने राज्य में आज से यानी 15 जुलाई से तीन चरणों वाली कंटीजेंसी योजना लागू की है. इसके तहत कम बारिश होने पर धान की खेती सीमित की जाएगी और किसानों को कम पानी में होने वाली वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. सरकार ने यह जिलेवार योजना मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए तैयार की है, ताकि कम बारिश की स्थिति में किसानों का नुकसान कम हो सके. कहा जा रहा है कि अगर बारिश सामान्य से कम रहती है तो सरकार करीब 50 लाख एकड़ में किसानों को धान की जगह वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करेगी.