Cotton Rate: देश में कम बारिश और कपास की धीमी बुवाई का असर अब बाजार में दिखने लगा है. कपास की कीमतों में 800 रुपये प्रति कैंडी तक की तेजी आ गई है. कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 10 जुलाई तक कपास की बुवाई पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत घटकर 79.54 लाख हेक्टेयर रह गई है. जबकि पिछले साल इसी समय यह 93.95 लाख हेक्टेयर थी. हालांकि, वैश्विक बाजार में बढ़ते दाम घरेलू कीमतों को सहारा दे रहे हैं.
कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने पिछले दो दिनों में कपास का भाव 800 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) बढ़ा दिया है. कपड़ा मिलों और व्यापारियों की मजबूत मांग के कारण बाजार में तेजी बनी हुई है. रायचूर के कॉटन सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब ने बिजनेसलाइन से कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कपास के दाम बढ़ रहे हैं. न्यूयॉर्क के आईसीई एक्सचेंज में कपास का वायदा भाव 75-76 सेंट प्रति पाउंड से बढ़कर 81-82 सेंट प्रति पाउंड पहुंच गया है.
1.5 लाख गांठ कपास की हुई बिक्री
उन्होंने कहा कि देरी से पहुंचे मानसून और नई फसल को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण बाजार में तेजी आई है. वहीं, CCI की बिक्री भी मजबूत बनी हुई है. सोमवार को CCI ने 1.2 लाख से अधिक गांठ (बेल) और मंगलवार को करीब 1.5 लाख गांठ कपास की बिक्री की. कॉटन कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी अपने स्टॉक की बिक्री कर रही हैं और वे CCI से करीब 1,000 रुपये प्रति कैंडी अधिक कीमत पर कपास बेच रही हैं.
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कपास की फसल को लेकर घबराने की जरूरत नहीं
रायचूर के कॉटन सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब ने कहा कि जिन इलाकों में कपास की बुवाई हो चुकी है, वहां अब जल्द बारिश होना जरूरी है. खासकर कर्नाटक और तेलंगाना के कई हिस्सों में बारिश नहीं हुई है. अगर जल्द बारिश नहीं हुई, तो नई कपास की फसल प्रभावित हो सकती है. हालांकि, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) की फसल समिति के अध्यक्ष अतुल गणात्रा का मानना है कि अल नीनो का कपास की फसल पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि कम बारिश से कई बार कपास की उपज, गुणवत्ता और रकबा बेहतर हो सकता है. इसलिए फिलहाल कपास की फसल को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है.
80 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई पूरी
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) की फसल समिति के अध्यक्ष अतुल गणात्रा ने कहा कि इस समय देश में करीब 80 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 86 लाख हेक्टेयर था. उन्होंने कहा कि अब बारिश में कुछ दिनों का विराम होने से किसान तेजी से कपास की बुवाई कर रहे हैं. उनका अनुमान है कि 25 जुलाई तक कपास का रकबा 1 करोड़ हेक्टेयर (100 लाख हेक्टेयर) से अधिक हो जाएगा, क्योंकि लगभग सभी कपास उत्पादक क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो चुकी है.
कपास का रकबा करीब 20 प्रतिशत अधिक
अतुल गणात्रा ने कहा कि दक्षिण भारत में इस साल कपास का रकबा पिछले साल के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत अधिक है. उनका कहना है कि देर से बारिश होने के कारण कई किसानों के पास अब कपास की बुवाई ही सबसे बेहतर विकल्प बचा है. उन्होंने अनुमान जताया कि इस सीजन में देश में कपास की कुल बुवाई 1.25 से 1.30 करोड़ हेक्टेयर (125-130 लाख हेक्टेयर) तक पहुंच सकती है, जो पिछले साल की तुलना में 10 से 15 प्रतिशत अधिक होगी.
64,000 रुपये प्रति कैंडी के भाव पर कपास खरीद
अतुल गणात्रा ने कहा कि देश की बड़ी कपड़ा मिलें फिलहाल 64,000 रुपये प्रति कैंडी के भाव पर कपास खरीद रही हैं. हालांकि, उनके पास पहले से ही 3 से 4 महीने का कपास का स्टॉक मौजूद है. उन्होंने कहा कि मिलों ने पहले कम कीमत पर कपास खरीदी थी और अब मौजूदा भाव पर खरीदारी करके अपनी औसत खरीद कीमत संतुलित कर रही हैं. अधिकांश बड़ी मिलों के पास नवंबर तक, जबकि कुछ के पास दिसंबर के अंत तक का स्टॉक है.