Tomato Farming: महाराष्ट्र के जुन्नर और अंबेगांव तहसीलों में लगातार हो रही भारी बारिश ने टमाटर किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कटाई के लिए तैयार टमाटर की फसल बारिश से खराब हो गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है. इससे फसलों में फफूंद और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियां तेजी से फैल रही हैं. किसानों का कहना है कि इससे टमाटर की गुणवत्ता और उत्पादन, दोनों पर असर पड़ा है. वहीं, मंडियों में टमाटर की आवक 60 फीसदी तक कम हो गई है.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, सह्याद्रि पर्वतमाला की तलहटी में स्थित इन दोनों तहसीलों के कई इलाकों में लगातार चार दिनों तक 24 घंटे में 200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई. किसानों का कहना है कि खेती की लागत पहले ही काफी बढ़ चुकी है और अब फसल खराब होने से निवेश की भरपाई करना भी मुश्किल हो गया है. भारी बारिश का असर महाराष्ट्र की प्रमुख टमाटर मंडियों में भी साफ दिखाई दे रहा है. नारायणगांव कृषि उपज मंडी (APMC) में टमाटर की आवक 50 से 60 फीसदी तक घट गई है. हालांकि, दूसरे राज्यों से टमाटर की लगातार आपूर्ति होने के कारण कीमतों में अब तक बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है.
लगातार बारिश से खेतों में पानी भर गया
जुन्नर के किसान ईश्वर गायकवाड़ ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि लगातार बारिश से खेतों में पानी भर गया, जिससे टमाटर के पौधे सूखने लगे और फल सड़ गए. उन्होंने कहा कि कटाई से पहले ही कई टमाटर फफूंद की चपेट में आ गए. उनके मुताबिक, उनकी करीब आधी फसल खराब हो चुकी है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी महाराष्ट्र में टमाटर की फसल अधिक बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. फल बनने के समय लगातार बारिश होने से झुलसा (ब्लाइट) और फल सड़ने जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं. इससे टमाटर की गुणवत्ता खराब हो जाती है और उसे थोक मंडियों में बेचना मुश्किल हो जाता है.
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50,000 क्रेट टमाटर की आवक
बारिश का असर नारायणगांव कृषि उपज मंडी (APMC) में भी दिख रहा है. जहां सीजन के दौरान रोजाना 50,000 से 55,000 क्रेट (20 किलो) टमाटर की आवक होती थी, वहीं इस सप्ताह यह घटकर करीब 25,000 क्रेट रह गई. आवक कम होने के बावजूद थोक बाजार में टमाटर का भाव 200 से 400 रुपये प्रति क्रेट के बीच बना हुआ है. व्यापारियों का कहना है कि दूसरे राज्यों से आ रही आपूर्ति और कमजोर मांग के कारण कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई.
10 से 20 फीसदी टमाटर को नुकसान
व्यापारियों के अनुसार, पानी भरे खेतों से निकाले गए टमाटर जल्दी खराब हो रहे हैं. कई बार खुदरा बाजार तक पहुंचने से पहले ही 10 से 20 फीसदी टमाटर खराब हो जाते हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. टमाटर की खेती में किसानों को प्रति एकड़ लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं. इसमें पौधे, खाद, दवाइयां, मजदूरी और फसल को सहारा देने की लागत शामिल होती है. लेकिन इस बार भारी बारिश से फसल खराब होने के कारण कई किसानों को अपनी लागत निकालना भी मुश्किल लग रहा है.