त्योहारी सीजन से पहले चीनी के दाम में उछाल, थोक कीमत 4000 रुपये प्रति टन बढ़ी

महाराष्ट्र में एक महीने में चीनी के दाम 4,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन बढ़ गए हैं. कम बारिश, अल नीनो की आशंका और सीमित आपूर्ति के कारण कीमतों में तेजी आई है. उद्योग का अनुमान है कि मौजूदा भाव बने रहने पर चीनी मिलों को अगले सीजन में 11,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 16 Jul, 2026 | 08:06 AM

त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही महाराष्ट्र में चीनी महंगी हो गई है. पिछले एक महीने के दौरान चीनी की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है. एस-ग्रेड चीनी का भाव 38,000 रुपये से बढ़कर 42,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन पहुंच गया है. यानी एक महीने में कीमत 4,000 रुपये प्रति टन बढ़ी है. चीनी के बढ़ते दाम से चीनी मिलों की कमाई बढ़ने की उम्मीद है. वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि कम बारिश, अल नीनो की आशंका और घरेलू बाजार में चीनी की सीमित उपलब्धता के कारण चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. मांग के मुकाबले आपूर्ति कम रहने की चिंता से बाजार में तेजी बनी हुई है और आने वाले समय में कीमतें ऊंचे स्तर पर रह सकती हैं.

चीनी की कीमतों में इस बढ़ोतरी से फिलहाल चीनी मिलों को फायदा  हो रहा है, हालांकि अगर यही रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं पर भी इसका असर पड़ सकता है. चीनी की बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा फायदा चीनी मिलों को मिलने की उम्मीद है. उद्योग के अनुमान के अनुसार, अगर मौजूदा कीमतें इसी तरह बनी रहीं तो अगले चीनी सीजन में मिलों को करीब 11,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हो सकती है.

गन्ना उत्पादक इलाकों में सामान्य से कम बारिश हुई

विशेषज्ञों का कहना है कि जून में मानसून देर से पहुंचा और कई गन्ना उत्पादक  इलाकों में सामान्य से कम बारिश हुई. इससे खेतों में खड़ी गन्ने की फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है. किसानों और उद्योग को डर है कि इसका असर अगले साल चीनी उत्पादन पर पड़ सकता है. जेके इंडिया ईएग्रीटेक लिमिटेड के निदेशक हेमंत शाह ने न्यूज वेबसाइट चीनी मंंडी से कहा कि आने वाले महीनों में चीनी की कीमतें मजबूत बनी रह सकती हैं. इसकी वजह त्योहारी सीजन में चीनी की मांग बढ़ना और आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता है. उनका कहना है कि अगर उत्पादन को लेकर चिंता बनी रहती है और त्योहारों के दौरान मांग बढ़ती है, तो चीनी के दाम फिलहाल ऊंचे स्तर पर बने रह सकते हैं.

मई 2026 में चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी

केंद्र सरकार ने मई 2026 में चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी थी. सरकार का कहना था कि त्योहारी सीजन में देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना जरूरी है. साथ ही, अल नीनो और कम बारिश  के कारण अगले साल चीनी उत्पादन प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई थी. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात पर रोक और मौसम से जुड़ी चिंताओं के कारण घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता सीमित रहने की उम्मीद है. यही वजह है कि चीनी की कीमतों में तेजी बनी हुई है.

बिक्री के लिए 22 लाख टन चीनी का कोटा तय

जेके इंडिया ईएग्रीटेक लिमिटेड के निदेशक हेमंत शाह ने कहा कि जुलाई 2026 के लिए सरकार ने घरेलू बाजार में बिक्री के लिए 22 लाख मीट्रिक टन (LMT) चीनी का कोटा तय किया है. वहीं, जून 2026 में यह कोटा 22.5 लाख मीट्रिक टन था. उन्होंने कहा कि चीनी के दाम 4,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन बढ़ने से चीनी मिलों को सिर्फ जुलाई महीने में ही करीब 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई होने की संभावना है. वहीं, अगस्त में घरेलू बाजार में 23 से 24 लाख टन चीनी की बिक्री होने का अनुमान है.

अच्छी बारिश होने से गन्ने की फसल को राहत

चीनी उद्योग का अनुमान है कि अगर पूरे सीजन में चीनी के दाम मौजूदा स्तर के आसपास बने रहे, तो चीनी मिलों की कमाई पिछले साल के मुकाबले करीब 11,000 करोड़ रुपये अधिक हो सकती है. हाल के हफ्तों में कई राज्यों में अच्छी बारिश होने से गन्ने की फसल को राहत मिली है. इससे मिट्टी में नमी बढ़ी है और तेज गर्मी व पहले हुई कम बारिश के कारण फसल पर पड़ रहा दबाव कुछ कम हुआ है. इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल चीनी उत्पादन पिछले साल से कम रह सकता है.

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Published: 16 Jul, 2026 | 08:02 AM

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