Tomato Rate: टमाटर के भाव में गिरावट, 10 रुपये किलो रेट.. लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान
आंध्र प्रदेश के रायलसीमा में टमाटर की रिकॉर्ड आवक से कीमतों में भारी गिरावट आई है. किसानों को औसतन 14.70 रुपये प्रति किलो और कम गुणवत्ता वाले टमाटर के 10 से 11.30 रुपये प्रति किलो ही मिल रहे हैं. खर्च निकालने के बाद किसानों के हाथ में करीब 3.30 रुपये प्रति किलो बच रहे हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
Tomato Price Fall: आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र की टमाटर मंडियों में इस सीजन की सबसे ज्यादा आवक होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. शुक्रवार को प्रमुख मंडियों में 12,215 मीट्रिक टन से ज्यादा टमाटर पहुंचने के बाद कीमतों में तेज गिरावट आ गई. हालात ऐसे हैं कि किसानों को औसतन सिर्फ 14.70 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है, जबकि कम गुणवत्ता वाले टमाटर 10 से 11.30 रुपये प्रति किलो में बिक रहे हैं. किसानों का कहना है कि तुड़ाई, ढुलाई और कमीशन का खर्च निकालने के बाद उनके हाथ में सिर्फ करीब 3.30 रुपये प्रति किलो ही बच रहे हैं. इससे कई किसानों को उत्पादन लागत भी नहीं निकल पा रही है और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के मार्केटिंग विभाग के अनुसार, शुक्रवार को मंडियों में 5,564 मीट्रिक टन फर्स्ट ग्रेड और 6,650 मीट्रिक टन सेकेंड ग्रेड के टमाटर पहुंचे. अच्छी गुणवत्ता वाले टमाटर को कुछ मंडियों में अभी भी बेहतर दाम मिल रहे हैं, जहां मांग बनी हुई है. लेकिन जिन मंडियों में कम गुणवत्ता वाले टमाटर की आवक ज्यादा है, वहां कीमतों में तेज गिरावट आई है. अधिकारियों का कहना है कि टमाटर का मौजूदा सीजन अब अंतिम दौर में है और इस समय फसल की गुणवत्ता ही कीमत तय करने वाला सबसे बड़ा कारण बन गई है. फसल पकने के अंतिम चरण में बेमौसम मौसम का असर पड़ा, जिससे कई इलाकों में टमाटर की गुणवत्ता खराब हुई. इसके कारण बड़ी मात्रा में काले धब्बों वाले और सामान्य गुणवत्ता के टमाटर मंडियों में पहुंच रहे हैं, जिससे किसानों को अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं.
व्यापारी नहीं दे रहे टमाटर की उचित कीमत
व्यापारी खराब गुणवत्ता वाले टमाटर के लिए ऊंची कीमत देने से बच रहे हैं. यही वजह है कि अच्छी और सामान्य गुणवत्ता वाले टमाटर के दाम में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है. आंध्र प्रदेश की प्रमुख टमाटर मंडियों में शामिल मुलकलाचेरुवु में इस समय सीजन के सबसे व्यस्त दिन चल रहे हैं. मंडी अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल टमाटर के दाम रोजाना की आवक, मांग और गुणवत्ता के आधार पर तय हो रहे हैं.
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किसानों को पिछले सप्ताह के मुकाबले बेहतर भाव मिले हैं
हालांकि, कालीकिरी मंडी के किसानों को पिछले सप्ताह के मुकाबले बेहतर भाव मिले हैं. इसकी वजह क्षेत्र के बाहर से खरीदारों की बढ़ी मांग रही. पड़ोसी राज्यों के थोक व्यापारियों और बड़े खरीदारों ने ज्यादा खरीदारी की, जिससे भारी आवक के बावजूद यहां टमाटर के दाम को सहारा मिला. शुक्रवार को सबसे ज्यादा टमाटर की आवक राप्ताडु प्राइवेट मार्केट में दर्ज की गई. यहां एक ही दिन में 6,750 मीट्रिक टन टमाटर पहुंचा, जिससे यह राज्य की सबसे व्यस्त टमाटर मंडियों में शामिल हो गया.
हिमाचल प्रदेश से भी हो रही टमाटर की आवक
मंडियों में कर्नाटक, चित्तूर और हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी मात्रा में टमाटर आ रहा है. इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ गई है और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है. वहीं, पट्टीकोंडा और पीपुल्ली मंडियों में टमाटर की आवक काफी कम रही. कम आवक की वजह से इन मंडियों में टमाटर के दाम अपेक्षाकृत स्थिर बने हुए हैं. कृषि विपणन निदेशक रवि पटनसेट्टी ने किसानों से कहा है कि मंडी में टमाटर लाने से पहले उसकी अच्छी तरह छंटाई और ग्रेडिंग करें. उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले टमाटर को अलग करने से किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं. इस समय खरीदार केवल अच्छी गुणवत्ता वाले टमाटर खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं, जबकि खराब या क्षतिग्रस्त टमाटर के कम दाम मिल रहे हैं.