खाद की खपत में यूरिया सबसे आगे, 21 दिन में 30.6 लाख टन बिक्री, किसान छोड़ रहे बाकी खाद?
Fertilizer Price: अगस्त में खाद की खपत में यूरिया सबसे आगे रहा. 1 से 21 अगस्त के बीच 30.6 लाख टन यूरिया की बिक्री हुई, जबकि DAP की खपत 6.8 लाख टन रही. यूरिया की कम कीमत को इसकी ज्यादा मांग की बड़ी वजह माना जा रहा है. उद्योग जगत ने यूरिया की कीमत धीरे-धीरे बढ़ाने और सभी खादों के दाम में संतुलन बनाने की मांग की है.
Urea Consumption: अगस्त में किसानों के बीच खाद की मांग और इस्तेमाल को लेकर नई तस्वीर सामने आई है. 1 से 21 अगस्त के बीच देश में यूरिया की खपत सबसे ज्यादा रही. इस दौरान करीब 30.6 लाख टन यूरिया की बिक्री हुई. वहीं DAP की खपत 6.8 लाख टन, कॉम्प्लेक्स खाद की 8.5 लाख टन और MOP की खपत 1.2 लाख टन रही. आंकड़ों से साफ है कि दूसरी खादों के मुकाबले किसान यूरिया पर ज्यादा निर्भर हैं.
अगस्त में यूरिया की 80 फीसदी मांग पूरी
सरकार ने अगस्त के लिए कुल 38.01 लाख टन यूरिया की मांग का अनुमान लगाया था. 21 अगस्त तक इसका करीब 80 फीसदी हिस्सा खरीदा जा चुका था. इसी तरह DAP की अनुमानित मांग 9.81 लाख टन थी, जिसमें से करीब 70 फीसदी की खपत हो चुकी है. कॉम्प्लेक्स खाद की अगस्त की अनुमानित मांग 15.27 लाख टन थी और अब तक करीब 56 फीसदी खपत हो चुकी है. वहीं MOP की अनुमानित मांग 3.27 लाख टन थी, लेकिन इसकी सिर्फ 38 फीसदी खपत हुई है.
यूरिया सस्ता होने से बढ़ी निर्भरता
खाद की खपत में इतना बड़ा अंतर सिर्फ जरूरत की वजह से नहीं है. इसकी एक बड़ी वजह अलग-अलग खादों की कीमतों में भारी अंतर भी है. सरकार के नियंत्रण में यूरिया का 45 किलो का बैग 267 रुपये में मिलता है. इसके मुकाबले 50 किलो DAP की अधिकतम कीमत 1,350 रुपये है. वहीं MAP और MOP जैसे खादों की कीमत करीब 1,700 से 2,200 रुपये प्रति 50 किलो बैग तक रहती है. कॉम्प्लेक्स खाद की कीमत भी लगभग 1,500 से 2,650 रुपये प्रति बैग है. जिंक और दूसरे सूक्ष्म पोषक तत्वों वाली कुछ कॉम्प्लेक्स खाद की कीमत 40 किलो के बैग के लिए 2,650 रुपये से भी ज्यादा है. यही वजह है कि किसान कम कीमत वाले यूरिया का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं. उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यूरिया की कीमत बाकी खादों की तुलना में बहुत कम होने से खाद के इस्तेमाल का संतुलन बिगड़ रहा है.
यूरिया की कीमत धीरे-धीरे बढ़ाने की मांग
उद्योग जगत का मानना है कि सभी खादों की कीमतों में ज्यादा अंतर नहीं होना चाहिए. इसके लिए यूरिया समेत दूसरी खादों के दाम को धीरे-धीरे संतुलित करने की जरूरत है. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रमुख यूरिया कंपनी के CEO ने भी कहा है कि यूरिया का बैग 267 रुपये पर लंबे समय तक बनाए रखने का कोई खास आधार नहीं है, जबकि कई जगह किसान इसे करीब 300 रुपये में खरीद रहे हैं. उद्योग ने सरकार से यूरिया की MRP को एक साथ बढ़ाने के बजाय छोटे-छोटे चरणों में बढ़ाने का सुझाव दिया है. उत्तर प्रदेश भी इस तरह के बदलाव के समर्थन में है.
जमीन के रिकॉर्ड से जोड़ी जाएगी खाद की बिक्री
सरकार खाद की बिक्री को जमीन के रिकॉर्ड से जोड़ने का पायलट प्रोग्राम भी चला रही है. फिलहाल यह व्यवस्था 22 राज्यों के 56 जिलों में शुरू की गई है और आगे इसे 80 जिलों तक बढ़ाने की योजना है. इसका मकसद खाद की बिक्री और किसानों की वास्तविक जरूरत के बीच बेहतर तालमेल बनाना है.
मोबाइल ऐप से होगी खाद की बुकिंग
खाद की बिक्री व्यवस्था को डिजिटल बनाने के लिए फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (एफएफएस) को मोबाइल ऐप आधारित बुकिंग सिस्टम के रूप में लागू किया जा रहा है. इसे पहले से चल रहे इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (आईएफएमएस) से जोड़ा गया है. आईएफएमएस में 14 करोड़ से ज्यादा आधार से जुड़े खरीदारों और 2.5 लाख से ज्यादा रिटेलरों का रिकॉर्ड है. यह सिस्टम हर साल करीब 7 करोड़ टन खाद की बिक्री को ट्रैक करता है और करीब 2 लाख करोड़ रुपये की खाद सब्सिडी से जुड़ा है. पायलट प्रोजेक्ट से शुरुआती प्रतिक्रिया अच्छी मिली है. हालांकि QR कोड बनाने और ऐप के काम करने में कुछ दिक्कतें सामने आई हैं. ऐसी स्थिति में किसानों के लिए ऑफलाइन बिक्री की सुविधा भी जारी रखी गई है.