केंद्र सरकार ने रविवार को कहा कि वह खाद उत्पादन से लेकर खुदरा बिक्री तक उर्वरकों की निगरानी करने वाले देशव्यापी डिजिटल मंच का विस्तार कर रही है. इसके तहत उर्वरकों की खरीद को व्यक्तिगत किसानों के भूमि रिकॉर्ड से जोड़ने और सब्सिडी भुगतान की अधिक करीबी निगरानी के लिए नई सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं. सरकार ने कहा कि फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट का डिजिटल आधार इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है. इसके तहत कई डिजिटल पहल शुरू की गई हैं, जिसका मकसद पारदर्शिता बढ़ाना, फर्टिलाइज़र की उपलब्धता में सुधार करना है.
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग ने बताया है कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) की तकनीकी मदद से संचालित एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (IFMS) का विस्तार किया जा रहा है, ताकि खाद की उपलब्धता, सप्लाई और विक्रेताओं की जानकारी डिजिटली ट्रैक की जा सके और उर्वरक वितरण प्रणाली पर निगरानी बेहतर की जा सके. विभाग ने बताया कि वर्तमान में 14 करोड़ से अधिक आधार से जुड़े किसान खरीदारों और 2.5 लाख से अधिक खुदरा विक्रेता पहले ही उर्वक प्रबंधन प्रणाणी में दर्ज हैं.
सालाना उर्वरक बिक्री और सब्सिडी का लेखाजोखा मिलेगा
एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (IFMS) के तहत उत्पादन, आयात, आवागमन, स्टॉक की उपलब्धता, खुदरा बिक्री और सब्सिडी प्रोसेसिंग की निगरानी शामिल हैं. राष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाला यह सिस्टम सालाना लगभग 7 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक बिक्री के लेनदेन को कवर करता है. इसके साथ ही सालाना लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी के मैनेजमेंट में भी मदद करता है.
नए डैशबोर्ड और एनालिटिकल टूल बनाए गए
प्रणाली के विस्तार की कड़ी में फर्टिलाइजर के प्रोडक्शन, इंपोर्ट, डिस्पैच, मूवमेंट, स्टॉक और रिटेल बिक्री की एक साथ जानकारी देने के लिए नए डैशबोर्ड और एनालिटिकल टूल बनाए गए हैं. ये टूल राष्ट्रीय, राज्य, जिला और खुदरा विक्रेता स्तर पर मॉनिटरिंग करने में मदद करते हैं, जिससे असामान्य ट्रेंड और सप्लाई से जुड़ी उभरती स्थितियों का शुरुआती स्टेज में ही पता लगाया जा सकता है. एनालिटिक्स के बढ़ते उपयोग से खरीदारों की विभिन्न श्रेणियों, जमीन के मालिकाना हक, फसलों, जिलों और फर्टिलाइज़र के प्रकारों के आधार पर फर्टिलाइज़र की खरीद की जांच करना भी संभव हो गया है. इससे बिक्री का रिकॉर्ड रखने के लिए, खपत के पैटर्न का पता लगाने और मॉनिटरिंग के आधार पर फैसले लिए जा सकेंगे.
किसान, जमीन और फसल संबंधी डेटा इंटीग्रेट
डेटा आधारित उर्वरक प्रबंधन की दिशा में iFMS का राज्यों तथा अन्य सरकारी प्लेटफॉर्म की ओर से बनाए गए किसान, भूमि और फसल डेटाबेस के साथ एकीकरण किया जा रहा है. हरियाणा में मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) के साथ एकीकरण और उसके बाद एग्रीस्टैक के साथ एकीकरण की दिशा में किए गए कार्य ने उर्वरक लेन-देन को किसान और कृषि संबंधी जानकारी से जोड़ने के लिए तंत्र स्थापित किए हैं. इन पहलों ने उर्वरक खरीदारों का किसान और भूमि अभिलेखों से मिलान करने में बहुमूल्य अनुभव प्रदान किया तथा भूमि और फसल संबंधी जानकारी की उपलब्धता और गुणवत्ता से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों को उजागर किया. इससे खाद की जरूरतों और खपत की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलेगी.