अब गांव में ही मिलेगी खाद-बीज की सुविधा, जम्मू-कश्मीर में 140 ‘किसान खिदमत घर’ शुरू
Rajouri Farmers: जम्मू-कश्मीर के राजौरी में 140 किसान खिदमत घर शुरू होने से किसानों को अब बीज, खाद, मशीनरी और सरकारी योजनाओं की जानकारी गांव में ही मिलेगी. इस पहल से खेती आसान होगी, समय बचेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे. यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है.
Kisan Khidmat Ghar: जम्मू-कश्मीर के राजौरी के पहाड़ी और सीमावर्ती गांवों में अब खेती से जुड़ी परेशानियों का हल गांव के भीतर ही मिलने लगा है. सरकार ने किसानों को बीज, खाद, मशीनरी, सरकारी योजनाओं की जानकारी और विशेषज्ञ सलाह एक ही जगह देने के लिए 140 किसान खिदमत घर (KKG) शुरू किए हैं. ये केंद्र 312 पंचायतों तक सेवाएं पहुंचाएंगे और किसानों को लंबी दूरी तय करने की परेशानी से राहत देंगे. HADP के तहत शुरू हुई यह पहल खेती को आसान बनाने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा जरिया भी बन रही है.
गांव-गांव तक पहुंचेगी खेती की हर जरूरी सुविधा
पहले राजौरी के दूरदराज इलाकों-डूंगी, नौशेरा, मंजाकोट, बुधल और कोटरंका जैसे क्षेत्रों-के किसानों को बीज, खाद या सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए तहसील या जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता था. इसमें समय भी लगता था और खर्च भी बढ़ता था. अब किसान खिदमत घर पंचायत स्तर पर ही वन-स्टॉप सर्विस सेंटर की तरह काम करेंगे. यहां किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज, उर्वरक, कीटनाशक, कृषि उपकरण और फसल प्रबंधन से जुड़ी सलाह एक ही छत के नीचे मिलेगी. इससे खेती का काम समय पर होगा और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है.
युवाओं को मिला नया रोजगार और उद्यम का मौका
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इन केंद्रों को चलाने की जिम्मेदारी स्थानीय युवाओं और कृषि स्नातकों को दी गई है. यानी यह पहल सिर्फ किसानों के लिए सुविधा केंद्र नहीं, बल्कि गांव के पढ़े-लिखे युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता का नया रास्ता भी है. हर केंद्र को करीब 8.5 लाख रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है. इससे गांव में ही रोजगार पैदा हो रहा है और युवा खेती से जुड़े बिजनेस मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं. HADP का फोकस खेती को लाभकारी बनाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है.
#WATCH राजौरी, जम्मू-कश्मीर: ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच को मज़बूत करने और रोज़गार के अवसर पैदा करने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर, राजौरी ज़िले में 312 पंचायतों की सेवा के लिए 140 ‘किसान खिदमत घर’ (KKGs) केंद्र स्थापित किए गए हैं। pic.twitter.com/kmllRYcMOg
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 10, 2026
मोबाइल ऐप और पोर्टल से डिजिटल खेती को बढ़ावा
किसान खिदमत घर सिर्फ ऑफलाइन सुविधा तक सीमित नहीं हैं. किसान अब Kisan Khidmat Ghar ऐप और पोर्टल के जरिए भी अपनी जानकारी अपडेट कर सकते हैं, सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं और विशेषज्ञों से सलाह ले सकते हैं. HADP पोर्टल पर 171 से ज्यादा योजनाएं और गतिविधियां उपलब्ध हैं, जिनका फायदा किसान आसानी से उठा सकते हैं. डिजिटल सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान अपनी फसल, जमीन और सब्सिडी से जुड़ी जानकारी मोबाइल पर ही देख सकते हैं. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों का भरोसा भी मजबूत होगा.
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
किसान खिदमत घरों का असली लक्ष्य किसानों की छोटी-बड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान करना है. चाहे बीज की जरूरत हो, मशीन किराए पर लेनी हो, फसल बीमा की जानकारी चाहिए या नई तकनीक सीखनी हो-अब हर सुविधा गांव के पास उपलब्ध होगी. विशेषज्ञ किसानों को मिट्टी की जांच, आधुनिक खेती, ऑर्गेनिक तरीके, बागवानी, पशुपालन और भेड़ पालन जैसे विकल्पों पर भी सलाह देंगे. राजौरी जैसे सीमावर्ती जिले में यह पहल खेती को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है. इससे किसानों की लागत घटेगी, समय बचेगा और आय बढ़ाने के नए रास्ते खुलेंगे. स्थानीय लोगों का मानना है कि यह योजना आने वाले समय में गांवों की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है और खेती को युवाओं के लिए भी आकर्षक बना सकती है.