महाराष्ट्र में खराब सोयाबीन बीजों पर बवाल, 3615 शिकायतें दर्ज.. 6000 हेक्टेयर फसल पर संकट
महाराष्ट्र में खराब गुणवत्ता वाले सोयाबीन बीजों को लेकर किसानों की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं. कृषि विभाग को अब तक 3,615 शिकायतें मिली हैं और करीब 6,000 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है. जांच में 581 बीज नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद कई बीज कंपनियों के खिलाफ एफआईआर और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
Maharashtra News: महाराष्ट्र में खरीफ सीजन के दौरान खराब गुणवत्ता वाले सोयाबीन बीजों को लेकर किसानों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं. राज्य के कृषि विभाग को अब तक 3,615 शिकायतें मिली हैं और इसका असर करीब 6,000 हेक्टेयर क्षेत्र पर पड़ा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा शिकायतें अकोला, अमरावती, बुलढाणा और यवतमाल जैसे प्रमुख सोयाबीन उत्पादक जिलों से आई हैं. इसके अलावा विदर्भ और मराठवाड़ा के 16 अन्य जिलों से भी किसानों ने बीजों के ठीक से अंकुरित न होने की शिकायत की है.
कृषि विभाग ने जांच के लिए 5,638 बीज नमूने सरकारी प्रयोगशालाओं में भेजे हैं. इनमें से 581 नमूने तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिससे बाजार में बिक रहे कुछ सोयाबीन बीजों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. जांच में बड़ी संख्या में बीज नमूने फेल होने के बाद कृषि विभाग ने संबंधित बीज कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. इस मामले ने किसानों को बेचे जा रहे सोयाबीन बीजों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सबसे ज्यादा असर विदर्भ और मराठवाड़ा में
कृषि विभाग के गुणवत्ता नियंत्रण एवं कृषि आदान-प्रदान निदेशक सुनील बोरकर ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि शुरुआती जांच के अनुसार करीब 6,000 हेक्टेयर में लगी सोयाबीन की फसल प्रभावित हुई है. उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा असर विदर्भ और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में देखने को मिला है. सुनील बोरकर ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच के बाद भी बीजों की गुणवत्ता को लेकर यह समस्या सामने आई है. उन्होंने कहा कि विभाग पूरे मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रहा है, ताकि इसकी असली वजह का पता लगाया जा सके.
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बीज कंपनियों के खिलाफ चार एफआईआर दर्ज
अब तक अकोला, अमरावती और वर्धा जिलों में बीज कंपनियों के खिलाफ चार एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. जिन मामलों में शुरुआती जांच में खराब या मानक से कम गुणवत्ता वाले बीज बेचने की पुष्टि हुई है, वहां आपराधिक जांच भी शुरू कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी एफआईआर दर्ज हो सकती हैं. नागपुर के कृषि विशेषज्ञ विजय जावंधिया ने कहा कि बीज कंपनियों के रिकॉर्ड की गहन जांच होनी चाहिए. उनके अनुसार, यह पता लगाया जाए कि बीज कहां से खरीदे गए और उनकी गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की गई. उन्होंने कहा कि कंपनियों को अपने खेतों और बीजों के स्रोत का पूरा रिकॉर्ड दिखाना चाहिए, तभी पूरे मामले की सही तस्वीर सामने आएगी.
37.36 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई
सोयाबीन महाराष्ट्र की प्रमुख तिलहन फसल है. इस सीजन में राज्य में करीब 37.36 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई है. विदर्भ और मराठवाड़ा के किसानों की आय का बड़ा हिस्सा इसी फसल पर निर्भर करता है, इसलिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीज किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. अधिकारियों के अनुसार, इस खरीफ सीजन में महाराष्ट्र में निजी कंपनियों द्वारा तैयार 18.57 लाख क्विंटल से अधिक सोयाबीन बीज बेचे गए हैं. कृषि विभाग का अनुमान है कि राज्य के करीब 75 प्रतिशत किसान अपने पास सुरक्षित रखे बीज इस्तेमाल करते हैं, जबकि बाकी किसान बाजार से बीज खरीदते हैं.
5 सेंटीमीटर से अधिक गहराई पर बीज बोते हैं किसान
कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई बार अंकुरण कम होने की वजह सिर्फ बीज की गुणवत्ता नहीं होती. अगर किसान बीज को सही तरीके से सुखाकर नहीं रखते, कम नमी वाली मिट्टी में बुवाई करते हैं या 5 सेंटीमीटर से अधिक गहराई पर बीज बोते हैं, तो भी अंकुरण प्रभावित हो सकता है. उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारी इन सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं और प्रयोगशालाओं में हर बीज नमूने की विस्तार से जांच की जा रही है.
सरकार इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही
वहीं, अकोला के किसान नेता विलास ताठोड़ ने आरोप लगाया कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही है. उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं. उन्होंने कहा कि विदर्भ में हालात काफी गंभीर हैं और आने वाले महीनों में किसानों का आक्रोश बढ़ सकता है. उन्होंने खराब गुणवत्ता वाले बीज बेचने वाली कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने की मांग की.
शिकायत का पंजीकरण कर जांच शुरू
बीज प्रमाणन और गुणवत्ता नियंत्रण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हर शिकायत का पंजीकरण कर उसकी जांच की जा रही है. किसानों से मिले बीजों के नमूने लेकर उन्हें मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा जा रहा है. जिन मामलों में जांच में बीज की गुणवत्ता खराब पाई जा रही है, वहां संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है.